ईशान किशन के अंगूठे की चोट ने बदल दी कप्तानी की तस्वीर
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने सीनियर क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। महज 15 साल की उम्र में उन्हें दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की कप्तानी करने का मौका मिला। यह पहली बार है जब वैभव ने सीनियर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली है।
ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे सेमीफाइनल मुकाबले में यह बदलाव नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने के बाद हुआ। ईशान किशन के दाएं अंगूठे में चोट लगने के बाद उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। वह उस समय विकेटकीपिंग कर रहे थे। इसके बाद टीम के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी ने नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली।
पहले उपकप्तान थे वैभव, अचानक मिली कप्तानी
दलीप ट्रॉफी के लिए वैभव सूर्यवंशी को ईस्ट जोन टीम का उपकप्तान बनाया गया था। उनकी जिम्मेदारी ईशान किशन के डिप्टी के तौर पर थी। हालांकि मुकाबले के दौरान कप्तान के चोटिल होने के बाद परिस्थितियां अचानक बदल गईं।
महज 15 वर्ष की उम्र में सीनियर प्रथम श्रेणी क्रिकेट की टीम की कमान संभालना वैभव के लिए बड़ा अनुभव है। इससे उन्हें मैदान पर फैसले लेने, गेंदबाजों का इस्तेमाल करने और विपक्षी टीम के खिलाफ रणनीति बनाने का अवसर मिला।
ईशान किशन के बाहर होने के बाद कुमार कुशाग्र ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली, जबकि वैभव ने टीम की कप्तानी संभाली।
क्वार्टर फाइनल में गेंद से भी दिखाया था दम
वैभव सूर्यवंशी इस टूर्नामेंट में सिर्फ बल्लेबाजी के लिए ही चर्चा में नहीं रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उनका बल्ला ज्यादा नहीं चला और उन्होंने केवल आठ रन बनाए थे। लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने प्रभाव छोड़ा।
उन्होंने मुकाबले में दो विकेट हासिल किए। ईस्ट जोन ने यह मैच पारी और 210 रन से अपने नाम किया था। इस प्रदर्शन से यह भी सामने आया कि जरूरत पड़ने पर वैभव गेंद से योगदान देने की क्षमता रखते हैं।

‘मैं विकेट लेने वाला खिलाड़ी हूं’
क्वार्टर फाइनल के दौरान गेंदबाजी करने के अनुभव को लेकर वैभव ने बीसीसीआई डोमेस्टिक के वीडियो में दिलचस्प बात कही थी।
उन्होंने बताया था कि जब विपक्षी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे, तब ईशान किशन ने उन्हें दो-तीन ओवर गेंदबाजी करने का मौका दिया। वैभव ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि ईशान को लगा कि वह जोखिम ले रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वैभव विकेट लेने वाला खिलाड़ी है।
उनकी यह टिप्पणी उनके आत्मविश्वास को भी दिखाती है। कम उम्र में बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में योगदान देना उनके खेल की बहुमुखी क्षमता को दर्शाता है।
सेंट्रल जोन पर शुरुआती दबाव
सेमीफाइनल मुकाबले के पहले दिन ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने सेंट्रल जोन के बल्लेबाजों को शुरुआत से ही दबाव में रखा। पहले सत्र के 32 ओवर के बाद सेंट्रल जोन का स्कोर 81 रन पर तीन विकेट था।
अभिजीत के सरकार और मुकेश कुमार ने ईस्ट जोन को शुरुआती सफलताएं दिलाईं। अभिजीत ने पहले घंटे के दौरान अमन मोखाड़े और कुनाल चंदेला को पवेलियन भेजा।
इसके बाद अनुभवी तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने सेंट्रल जोन के कप्तान रजत पाटीदार को क्लीन बोल्ड कर दिया। इससे सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी पर और दबाव बढ़ गया।
सारांश जैन की वापसी भी चर्चा में
सेंट्रल जोन की टीम में सारांश जैन की वापसी भी इस मुकाबले की खास बात रही। सारांश ने इसी महीने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू किया था।
वहीं ईस्ट जोन की ओर से अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और सेंट्रल जोन के कप्तान रजत पाटीदार के बीच मुकाबला भी देखने को मिला। ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने शुरुआत में जिस तरह दबाव बनाया, उससे मैच का शुरुआती रुख काफी दिलचस्प हो गया।
चोट से बदली भूमिका, वैभव के लिए बना यादगार दिन
ईशान किशन की चोट ईस्ट जोन के लिए निश्चित रूप से चिंता का विषय बनी, लेकिन इसी घटना ने वैभव सूर्यवंशी के करियर में एक यादगार अध्याय जोड़ दिया।
जिस खिलाड़ी को मुकाबले से पहले उपकप्तान की भूमिका मिली थी, उसे अचानक पूरी टीम का नेतृत्व करना पड़ा। 15 साल की उम्र में सीनियर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कप्तानी का अनुभव उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
वैभव के लिए यह सिर्फ एक मैच की कप्तानी नहीं, बल्कि दबाव में निर्णय लेने और सीनियर खिलाड़ियों के साथ नेतृत्व करने की पहली बड़ी परीक्षा भी है। आने वाले समय में यह अनुभव उनके क्रिकेटिंग सफर में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है, यह देखने वाली बात होगी।
निष्कर्ष
ईशान किशन के दाएं अंगूठे में चोट लगने के बाद 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की कप्तानी संभालने का मौका मिला। पहले उपकप्तान के तौर पर टीम में शामिल वैभव ने पहली बार सीनियर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी योगदान देने वाले वैभव के लिए यह अनुभव उनके उभरते करियर का अहम पड़ाव बन गया है।

