केरल: के त्रिशूर जिले से ड्रग्स तस्करी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला एंटी-नारकोटिक स्पेशल एक्शन फोर्स (DANSAF) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो महिलाओं सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान पुलिस ने खुलासा किया कि गिरफ्तार महिलाओं में से एक ने जांच से बचने के लिए करीब 2 ग्राम एमडीएमए (MDMA) अपने शरीर के निजी अंग में छिपाकर रखा था।
यह खुलासा पुलिस जांच के दौरान हुआ, जिसने पूरे ड्रग्स नेटवर्क की परतें खोल दीं। बाद की छापेमारी में पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से कुल 308 ग्राम एमडीएमए बरामद किया, जिसे हाल के महीनों में त्रिशूर जिले की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी में से एक माना जा रहा है।
वाहन जांच के दौरान हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, जिला एंटी-नारकोटिक स्पेशल एक्शन फोर्स को सूचना मिली थी कि पलक्कड़ के एक रिसॉर्ट से त्रिशूर की ओर जा रही एक कार में नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर वणियमपारा क्षेत्र में वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया।
पुलिस ने संदिग्ध स्विफ्ट कार को रोककर उसकी तलाशी ली। कार में चार लोग सवार थे, जिनकी पहचान शिफास (26), विद्या (28), जिष्णु (27) और श्रीलक्ष्मी (20) के रूप में हुई। सभी गुरुवायुर-पावरट्टी क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
तलाशी में सामने आया चौंकाने वाला सच
प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को महिला के शरीर के निजी अंग में छिपाकर रखा गया करीब 2 ग्राम एमडीएमए मिला। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा सुरक्षा जांच से बचने और ड्रग्स की तस्करी को आसान बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
महिला से पूछताछ के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया। इसके बाद आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने शिफास के घर पर छापा मारा, जहां से 18 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया।
वर्कशॉप से मिला भारी मात्रा में ड्रग्स
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस की टीम चावक्कड़ के पंचारामुक्कू इलाके स्थित एक एल्युमीनियम वर्कशॉप तक पहुंची। यहां छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने एक पैकेट के अंदर छिपाकर रखा गया 288 ग्राम एमडीएमए बरामद किया।
पुलिस के अनुसार, नशीले पदार्थों को बेहद सुनियोजित तरीके से पैक कर छिपाया गया था, जिससे पहली नजर में किसी को संदेह न हो।

कुल 308 ग्राम एमडीएमए जब्त
पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कुल 308 ग्राम एमडीएमए बरामद किया। जांच के दौरान ड्रग नेटवर्क से जुड़े तीन और संदिग्धों—शब्बीर (34), अनशाद (31) और टी.टी. सुमेष (25)—को भी गिरफ्तार किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन और डिजिटल सबूतों की जांच से कई अन्य संदिग्धों की पहचान भी की जा रही है। पुलिस अब इस नेटवर्क के सप्लाई चैन, फाइनेंसिंग और अन्य राज्यों से संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
डिजिटल सबूत बने जांच की बड़ी कड़ी
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम जानकारियां मिली हैं। चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा के आधार पर अधिकारियों को संदेह है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं बल्कि संगठित ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ मोबाइल डेटा की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रग्स की सप्लाई कहां से हो रही थी और किन-किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी।
युवाओं में बढ़ती ड्रग्स की चुनौती
केरल सहित देश के कई राज्यों में हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स, विशेष रूप से एमडीएमए की तस्करी और खपत में तेजी देखी गई है। पुलिस लगातार विशेष अभियान चलाकर ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एमडीएमए जैसे सिंथेटिक ड्रग्स युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। यही वजह है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां ड्रग्स तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चला रही हैं।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस या नारकोटिक्स हेल्पलाइन को दें। अधिकारियों का कहना है कि समाज और पुलिस के सहयोग से ही ड्रग्स माफिया पर प्रभावी कार्रवाई संभव है।
निष्कर्ष
केरल के त्रिशूर में सामने आया यह मामला दर्शाता है कि ड्रग्स तस्कर कानून से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हालांकि पुलिस की सतर्कता और लगातार कार्रवाई के चलते इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ और कुल 308 ग्राम एमडीएमए जब्त किया गया। जांच अभी जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

