खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत के जैन संत को मिला विशेष निमंत्रण, ईरान ने बताया दोस्ती और सम्मान का प्रतीक
ईरान: के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर दुनिया भर की निगाहें तेहरान पर टिकी हुई हैं। इस बीच भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सांस्कृतिक घटनाक्रम सामने आया है। जैन संत एवं अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि को ईरान सरकार की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय द्वारा भेजे गए निमंत्रण पत्र में कहा गया है कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में आचार्य लोकेश मुनि की उपस्थिति दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान, आध्यात्मिक संवाद और मित्रता का प्रतीक होगी।
4 और 5 जुलाई को होगा राजकीय अंतिम संस्कार
ईरान सरकार के अनुसार अयातुल्ला अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार 4 और 5 जुलाई को राजधानी तेहरान में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में शामिल हो सकता है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में करीब 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।
तेहरान में हाई अलर्ट, सुरक्षा के विशेष इंतजाम
अंतिम संस्कार को देखते हुए पूरे तेहरान शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। कई प्रमुख मार्गों पर यातायात सीमित कर दिया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं, एंबुलेंस, आपातकालीन मेडिकल टीमों और परिवहन व्यवस्था को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
सरकारी एजेंसियां भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष कंट्रोल रूम संचालित कर रही हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके।

भारत सरकार के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल
इस कार्यक्रम में भारत सरकार की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेगा।
जानकारी के अनुसार बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आचार्य लोकेश मुनि को क्यों मिला निमंत्रण?
आचार्य लोकेश मुनि लंबे समय से विश्व शांति, अहिंसा, अंतरधार्मिक संवाद और वैश्विक सद्भाव के लिए काम करते रहे हैं।
ईरान ने निमंत्रण पत्र में स्पष्ट किया है कि उनकी उपस्थिति केवल धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि यह भारत और ईरान के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी विश्वास का भी प्रतीक होगी।
ईरान-अमेरिका वार्ता भी जारी
इसी बीच कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत भी जारी है।
सूत्रों के अनुसार तीन अलग-अलग वर्किंग ग्रुप परमाणु कार्यक्रम, कूटनीतिक मुद्दों और विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों पर चर्चा कर रहे हैं।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह चाहता है कि विदेशों में फंसी उसकी लगभग 6 अरब डॉलर की संपत्ति पहले जारी की जाए। इसके बाद ही शांति समझौते के अगले चरण पर आगे बढ़ा जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर कायम है ईरान का रुख
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी सामरिक ताकत है और इस पर उसका अधिकार बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान अपने समुद्री अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। उनके मुताबिक किसी भी परिस्थिति में होर्मुज को लेकर देश की नीति नहीं बदलेगी।
ईरान के भीतर भी बढ़ रही है बेचैनी
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर ईरान के भीतर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
लोग जानना चाहते हैं कि विदेशों में फंसी संपत्तियां कब वापस मिलेंगी, होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण कब बहाल होगा और क्षेत्रीय तनाव कब कम होगा।
इसी कारण ईरानी नेतृत्व पर घरेलू दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
मिनाब हमले और जासूसी मामलों ने बढ़ाई संवेदनशीलता
इसी दौरान ईरान ने एक कथित अमेरिकी मिसाइल हमले का वीडियो जारी किया है, जबकि इजराइल ने एक अमेरिकी नागरिक को ईरान के लिए कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है।
इन घटनाओं के चलते पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा और राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है।
भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से अहम अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की आधिकारिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर मौजूदगी भारत-ईरान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण संदेश दे सकती है।
भारत लंबे समय से ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग करता रहा है। ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला भी माना जा रहा है।
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत के जैन संत आचार्य लोकेश मुनि को मिला निमंत्रण केवल एक औपचारिक आमंत्रण नहीं, बल्कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंधों, सांस्कृतिक सम्मान और आध्यात्मिक संवाद का प्रतीक माना जा रहा है। वहीं करोड़ों लोगों की मौजूदगी और अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था इस आयोजन को विश्व के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में शामिल कर सकती है।

