मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से बुधवार शाम एक बड़ी खबर सामने आई, जब चौक बाजार स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज के दौरान अचानक गुंबद का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। घटना के समय मस्जिद में नमाज अदा की जा रही थी। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर नमाजियों और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुंबद का जो हिस्सा टूटा, वह मस्जिद की ऊपरी छत पर गिरा और सड़क तक नहीं पहुंचा। यदि मलबा सीधे नीचे गिरता तो बाजार में मौजूद लोगों के लिए यह हादसा बेहद गंभीर साबित हो सकता था।
धमाके जैसी आवाज से दहशत में आए लोग
घटना बुधवार शाम करीब 7 बजे की बताई जा रही है। उस समय मस्जिद में नियमित नमाज चल रही थी। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिससे कुछ देर के लिए लोगों को लगा कि कोई बड़ा विस्फोट हुआ है।
आसपास के दुकानदार तुरंत अपनी दुकानों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासी और राहगीर भी मौके की ओर दौड़ पड़े। कुछ देर तक पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
नमाजियों में मची भगदड़ जैसी स्थिति
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि तेज आवाज के कारण नमाज अदा कर रहे लोगों में भी कुछ समय के लिए घबराहट फैल गई। हालांकि मस्जिद के जिम्मेदार लोगों और स्थानीय नागरिकों ने स्थिति को जल्द संभाल लिया, जिससे कोई बड़ी भगदड़ नहीं हुई।
राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई।

सड़क तक नहीं पहुंचा मलबा, टला बड़ा हादसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर गुंबद का हिस्सा गिरा, वह मस्जिद की ऊपरी छत थी। यदि मलबा सीधे सड़क या बाजार में गिरता तो कई राहगीर और दुकानदार इसकी चपेट में आ सकते थे।
चौक बाजार मथुरा का व्यस्त इलाका माना जाता है, जहां शाम के समय लोगों की आवाजाही काफी अधिक रहती है। ऐसे में यह घटना किसी बड़े हादसे का रूप ले सकती थी।
लगातार बारिश को माना जा रहा संभावित कारण
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण गुंबद के बाहरी हिस्से का प्लास्टर और निर्माण सामग्री कमजोर हो सकती है।
हालांकि अभी तक प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि गुंबद का हिस्सा किन कारणों से गिरा। तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ पाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने और ऐतिहासिक भवनों की समय-समय पर संरचनात्मक जांच और रखरखाव आवश्यक होता है, खासकर मानसून के दौरान।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरें
घटना के कुछ ही समय बाद मौके के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। वायरल तस्वीरों में मस्जिद की छत पर गिरे मलबे को देखा जा सकता है।
हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
मस्जिद कमेटी ने फिलहाल नहीं दी प्रतिक्रिया
घटना के बाद जब जामा मस्जिद कमेटी से संपर्क किया गया तो उन्होंने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि संबंधित विभाग द्वारा पूरे ढांचे की तकनीकी जांच कराई जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो।
ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मस्जिद शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। इसलिए इसकी समय-समय पर इंजीनियरिंग जांच और मरम्मत कराई जानी चाहिए।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन की पूरी संरचना का सर्वे कराया जाए और जहां भी कमजोरी हो, वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासन रख रहा है स्थिति पर नजर
घटना के बाद क्षेत्र में एहतियात के तौर पर लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। संबंधित विभाग द्वारा मलबा हटाने और भवन की सुरक्षा का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और समय रहते बड़ा हादसा टल गया।
निष्कर्ष:
मथुरा की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज के दौरान गुंबद का हिस्सा गिरने की घटना ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। सौभाग्य से इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इसने ऐतिहासिक इमारतों के नियमित रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और मरम्मत कार्य पर टिकी हुई है।

