प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संयुक्त प्रेस वार्ता में आतंकवाद, रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करेंगे।
आतंकवाद पर दोनों देशों का साझा संदेश
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमा पार से फैलने वाला आतंकवाद वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की सोच इस मुद्दे पर पूरी तरह समान है और दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर मजबूत सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आतंकवाद से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सूचना साझा करने की व्यवस्था और साझा रणनीति आवश्यक है।
युद्ध का समाधान केवल बातचीत से
दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों और युद्धों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से ही संभव है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता रहा है और आगे भी यही नीति जारी रहेगी।

रक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने का भी निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने के लिए संयुक्त घोषणा (Joint Declaration) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत—
- रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाया जाएगा।
- संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ावा मिलेगा।
- समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ेगा।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए समन्वय मजबूत किया जाएगा।
- रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी जाएगी।
साइबर सुरक्षा पर भी विशेष जोर
आज के डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
दोनों देशों के बीच साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में साइबर सुरक्षा अब पारंपरिक रक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र केवल दो महासागरों का संगम नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक साझेदारी और वैश्विक स्थिरता का महत्वपूर्ण केंद्र है।
उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इस पूरे क्षेत्र में—
- स्वतंत्र नौवहन,
- समुद्री कानूनों के सम्मान,
- सुरक्षित व्यापार मार्ग,
- क्षेत्रीय शांति,
- और नियम-आधारित व्यवस्था
को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध लगातार हो रहे मजबूत
पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में उल्लेखनीय मजबूती आई है।
दोनों देश रक्षा, व्यापार, शिक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, विज्ञान, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदार बन चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ता सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अल्बनीज ने भी दोहराई साझेदारी
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी भारत के साथ संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों और रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
मेलबर्न में आयोजित यह शिखर सम्मेलन केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद, इंडो-पैसिफिक रणनीति, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से यह स्पष्ट हुआ कि भारत वैश्विक मंच पर शांति, स्थिरता और सहयोग की नीति को आगे बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ सख्त और स्पष्ट रुख बनाए हुए है।
निष्कर्ष:
मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संदेश दिया है। आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई, रक्षा और साइबर सुरक्षा में सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता इस बैठक की प्रमुख उपलब्धियां रहीं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।


