मुंबई: हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए मशहूर Evil Dead फ्रेंचाइजी एक बार फिर नए अध्याय के साथ बड़े पर्दे पर लौट आई है। 10 जुलाई को रिलीज हुई Evil Dead Burn ने दर्शकों के सामने खौफ, खून-खराबे और रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों की ऐसी दुनिया पेश की है, जो शुरुआत से अंत तक डर का एहसास बनाए रखती है। हालांकि फिल्म अपने भावनात्मक पक्ष को पूरी मजबूती से नहीं निभा पाती, जिसकी वजह से यह एक बेहतरीन हॉरर अनुभव बनने से थोड़ा पीछे रह जाती है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की शुरुआत एक बेहद भयावह और हिंसक घटना से होती है, जो दर्शकों को तुरंत डर की दुनिया में ले जाती है। इसके बाद कहानी एलिस नाम की महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने हाल ही में अपने पति विलियम को एक रहस्यमयी और भयानक हादसे में खो दिया है।
धीरे-धीरे खुलासा होता है कि विलियम किसी साधारण दुर्घटना का शिकार नहीं हुआ था, बल्कि उस पर एक दुष्ट राक्षसी शक्ति यानी Deadite का कब्जा हो चुका था।
पति की मौत के बाद एलिस उसके परिवार के साथ शहर से दूर स्थित एक पुराने पुश्तैनी घर में पहुंचती है। यहां परिवार के सदस्यों के बीच वर्षों पुराने विवाद, दर्द और छिपे हुए राज सामने आने लगते हैं।
इसी दौरान एक प्राचीन शैतानी शक्ति फिर से जाग उठती है और परिवार के सदस्य एक-एक कर उसकी गिरफ्त में आने लगते हैं। कहानी आगे बढ़ते हुए खून-खराबे, रहस्य, डर और जीवित रहने की जंग में बदल जाती है।
डर के साथ भावनाओं का भी मिश्रण
निर्देशक Sebastien Vanicek ने केवल डराने की कोशिश नहीं की है, बल्कि घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, पारिवारिक तनाव और पीढ़ियों से चले आ रहे मानसिक घावों जैसे गंभीर विषयों को भी कहानी का हिस्सा बनाया है।
फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि जब इंसान मानसिक रूप से कमजोर होता है, तब बुराई सबसे आसानी से उसे अपना शिकार बना लेती है।
हालांकि यह विचार मजबूत है, लेकिन इसकी गहराई उतनी प्रभावशाली नहीं बन पाती, जितनी दर्शक उम्मीद करते हैं।

खून-खराबे की कोई कमी नहीं
यदि आप अत्यधिक हिंसक हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं तो Evil Dead Burn आपको निराश नहीं करेगी।
फिल्म में कटे-फटे शरीर, खून के फव्वारे, वीभत्स दृश्य और कई चौंकाने वाले सीक्वेंस लगातार देखने को मिलते हैं। कई दृश्य इतने वास्तविक लगते हैं कि कमजोर दिल वाले दर्शकों के लिए उन्हें देखना मुश्किल हो सकता है।
विशेष रूप से कार के अंदर फिल्माया गया एक दृश्य, जिसमें सीट बेल्ट, एयरबैग और सनरूफ तक जानलेवा हथियार बन जाते हैं, पूरी फिल्म के सबसे यादगार और डरावने दृश्यों में शामिल है।
हॉरर के बीच हल्की कॉमेडी
फिल्म लगातार डर का माहौल बनाए रखने के बावजूद बीच-बीच में छोटे-छोटे हास्य दृश्य भी प्रस्तुत करती है। ये पल दर्शकों को कुछ सेकंड की राहत देते हैं, लेकिन इसके तुरंत बाद कहानी फिर डरावने माहौल में लौट आती है।
यह संतुलन फिल्म की गति को बनाए रखने में मदद करता है।
अभिनय कैसा है?
मुख्य भूमिका निभाने वाली Souheila Yacoub ने भावनात्मक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण किरदार को प्रभावशाली तरीके से निभाया है।
इसके अलावा Hunter Doohan, Luciane Buchanan, George Pullar, Erroll Shand और अन्य कलाकारों ने भी अपने किरदारों को पूरी गंभीरता के साथ निभाया है।
डेडाइट बने प्रत्येक पात्र का अलग व्यवहार और अलग प्रकार की क्रूरता फिल्म को और अधिक रोचक बनाती है।
कहां रह गई कमी?
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसका भावनात्मक जुड़ाव है।
जहां निर्देशक ने डरावने दृश्यों और हिंसा पर काफी मेहनत की है, वहीं पात्रों के बीच भावनात्मक संबंधों को उतनी मजबूती नहीं मिल पाती। यही कारण है कि कई महत्वपूर्ण दृश्य दर्शकों पर वैसा प्रभाव नहीं छोड़ते जैसा छोड़ सकते थे।
यदि कहानी के भावनात्मक पक्ष को और गहराई मिलती तो यह फिल्म हॉरर शैली की यादगार फिल्मों में शामिल हो सकती थी।
देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आप खौफनाक हॉरर फिल्मों, डार्क माहौल, राक्षसी शक्तियों और अत्यधिक हिंसक दृश्यों के प्रशंसक हैं तो Evil Dead Burn आपके लिए मनोरंजक साबित हो सकती है।
हालांकि जिन दर्शकों को भावनात्मक कहानी और संतुलित पटकथा पसंद है, उन्हें फिल्म कुछ जगह अधूरी महसूस हो सकती है।
निष्कर्ष:
Evil Dead Burn अपने डरावने माहौल, खून-खराबे और शानदार विजुअल इफेक्ट्स से दर्शकों को बांधे रखती है। फिल्म में पारिवारिक रिश्तों और मानसिक आघात जैसे विषयों को शामिल करने की कोशिश की गई है, लेकिन उनका प्रभाव पूरी तरह उभरकर नहीं आ पाता। फिर भी हॉरर फिल्मों के प्रशंसकों के लिए यह एक रोमांचक सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है और फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म को लेकर उत्सुकता भी बढ़ाती है।

