नई दिल्ली। भगवान शिव की आराधना और भक्ति का सबसे पावन महीना श्रावण (सावन) 2026 आज 30 जुलाई से शुरू हो गया है। सुबह होते ही देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। काशी विश्वनाथ धाम, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर, देवघर, बैद्यनाथ धाम और अन्य प्रसिद्ध शिवालयों में “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने विधि-विधान से शिव पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा सावन
इस वर्ष सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है और इसका समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। पूरे एक महीने तक शिव भक्त व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। सावन के दौरान देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पहले दिन मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़
सावन के पहले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु शिवालयों में पहुंचने लगे। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगीं। वहीं उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक के दौरान हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
प्रयागराज के प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर में भी सुबह से जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और व्यवस्थाएं की हैं।

सावन में भगवान शिव को क्या अर्पित करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव को कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करने का विशेष महत्व है।
- गंगाजल या शुद्ध जल
- बेलपत्र
- धतूरा
- भांग
- दूध
- दही
- शहद
- घी
- गन्ने का रस
- सफेद पुष्प
इन सामग्रियों से शिवलिंग का अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
ऐसे करें सावन में शिव पूजा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
पूजा के दौरान बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद और पुष्प अर्पित करें। साथ ही “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप, शिव चालीसा, रुद्राष्टक और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित करना भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।
कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार?
सावन सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष चार सावन सोमवार पड़ेंगे—
- पहला सोमवार – 3 अगस्त
- दूसरा सोमवार – 10 अगस्त
- तीसरा सोमवार – 17 अगस्त
- चौथा सोमवार – 24 अगस्त
इन दिनों व्रत रखने और शिव पूजा करने का विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है।
शिव भक्तों के लिए विशेष धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा करने से रोग, शोक, आर्थिक संकट और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए सोमवार का व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।
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देशभर में भक्तिमय माहौल
सावन शुरू होते ही देशभर में शिव मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में कांवड़ यात्रा भी तेज होगी। लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों से जल लेकर शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने प्रमुख धार्मिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
सावन में इन मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है—
- ॐ नमः शिवाय
- महामृत्युंजय मंत्र
- शिव पंचाक्षर स्तोत्र
- रुद्राष्टक
- शिव चालीसा
मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
निष्कर्ष
श्रावण मास केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। 30 जुलाई से शुरू हुआ यह पावन महीना 28 अगस्त तक चलेगा। पूरे सावन में भगवान शिव की विधिवत पूजा, जलाभिषेक, व्रत और मंत्र जाप को अत्यंत शुभ माना गया है। देशभर के शिवालयों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस पर्व के प्रति लोगों की गहरी आस्था का प्रमाण है।

