मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने शनिवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बॉलीवुड के दो चर्चित अभिनेताओं विवेक ओबेरॉय तथा आर माधवन को लेकर तीखे सवाल उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यदि इन कलाकारों को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में सब कुछ बेहतर हो गया है, तो वे दुबई में क्यों रह रहे हैं।
राज ठाकरे का यह बयान ऐसे समय आया है जब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर फिल्मी हस्तियों की भूमिका को लेकर लगातार बहस चल रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।
विवेक ओबेरॉय और आर माधवन का नाम लेकर उठाया सवाल
मुंबई में एमएनएस के छात्र संगठन महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि देश के कई उद्योगपति और प्रभावशाली लोग भारत छोड़कर विदेशों में बस गए हैं। इसी दौरान उन्होंने अभिनेता विवेक ओबेरॉय और आर माधवन का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि यदि उन्हें भारत की मौजूदा व्यवस्था और विकास मॉडल पर इतना भरोसा है, तो वे विदेश में क्यों रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विवेक ओबेरॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म में उनकी भूमिका निभाई थी। वहीं आर माधवन भी कई मौकों पर प्रधानमंत्री की सराहना कर चुके हैं। ठाकरे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उन्हें भारत से इतना प्रेम है और वे मानते हैं कि देश तेज़ी से विकास कर रहा है, तो उनका स्थायी निवास दुबई क्यों है।
‘सरकारी फिल्म में काम करके वापस दुबई चले जाते हैं’
अपने संबोधन में राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि कुछ कलाकार भारत आते हैं, सरकारी समर्थन वाली फिल्मों में काम करते हैं और फिर वापस दुबई लौट जाते हैं। हालांकि उन्होंने किसी सरकारी दस्तावेज़ या आधिकारिक प्रमाण का हवाला नहीं दिया, बल्कि यह अपनी राजनीतिक टिप्पणी के रूप में कहा।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जहां लोग इसके समर्थन और विरोध में अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
दुबई में रहने को लेकर दोनों अभिनेताओं का पक्ष
विवेक ओबेरॉय और आर माधवन पहले भी अपने दुबई में रहने के कारण सार्वजनिक रूप से बता चुके हैं।
आर माधवन ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने अपने बेटे के पेशेवर स्विमिंग करियर को ध्यान में रखते हुए दुबई में रहने का फैसला किया था, क्योंकि वहां प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध थीं।
वहीं विवेक ओबेरॉय ने कई इंटरव्यू में बताया है कि उन्होंने दुबई में अपने कारोबारी विस्तार और नए व्यवसायों के संचालन के उद्देश्य से वहां निवास बनाया।

पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा पर भी बोले राज ठाकरे
अपने भाषण में राज ठाकरे ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जिस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उचित नहीं था।
उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि ऐसे भटके हुए बच्चों को माफ कर देना चाहिए और उन्हें सही दिशा दिखानी चाहिए। इस पर राज ठाकरे ने कहा कि वह इस सोच से सहमत हैं और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
बीजेपी समर्थकों को भी दी नसीहत
राज ठाकरे ने अपने भाषण में यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखने की बात हो रही है, तो यह सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों द्वारा भी कई नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और ठाकरे परिवार सहित कई नेताओं एवं प्रसिद्ध व्यक्तियों को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है। उनके अनुसार, इस माहौल के कारण कई कलाकार और सार्वजनिक हस्तियां खुलकर अपनी राय रखने से बचती हैं।
‘जैसा बोओगे, वैसा काटोगे’
राज ठाकरे ने कहा कि यदि समाज में सभ्य संवाद की अपेक्षा की जाती है, तो सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को भी संयमित भाषा अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी की भी मां, परिवार या निजी जीवन को निशाना बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने अपने संबोधन का समापन यह कहते हुए किया कि सार्वजनिक जीवन में स्वस्थ बहस और सम्मानजनक भाषा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।
निष्कर्ष
राज ठाकरे के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति और फिल्म जगत दोनों में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर उन्होंने विवेक ओबेरॉय और आर माधवन के दुबई में रहने को लेकर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल की भी आलोचना की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा और परस्पर सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

