सोनम वांगचुक की अपील के बाद टूटा देवेंद्र महतो का आमरण अनशन, लेकिन छात्रों की लड़ाई जारी रखने का ऐलान
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मंगलवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से फोन पर हुई बातचीत के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका यह फैसला आंदोलन को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि उसे और मजबूती से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी यह आंदोलन मंगलवार को 12वें दिन भी जारी रहा। छात्र और अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने फोन पर की अपील
आमरण अनशन के दौरान देवेंद्र महतो लगातार इस बात पर अड़े थे कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब सोनम वांगचुक स्वयं रांची आकर उनसे मुलाकात करेंगे। इसी बीच सोनम वांगचुक ने फोन पर उनसे बातचीत की और उनकी सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की।
वांगचुक ने कहा कि आंदोलन अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन लंबे समय तक बिना पानी और पोषण के अनशन करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कम से कम पानी और शहद का सेवन करने की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि वह आंदोलन के समर्थन में रांची आने का प्रयास करेंगे।
पानी पीकर समाप्त किया अनशन
फोन पर हुई बातचीत के बाद देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक के आग्रह का सम्मान करते हुए पानी ग्रहण किया और अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं और जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
‘सरकार को जगाना हमारा उद्देश्य’
अनशन समाप्त करने के बाद देवेंद्र महतो ने कहा कि उनका उद्देश्य स्वयं को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि सरकार का ध्यान युवाओं की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।
उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना है तो स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया, लेकिन आंदोलन की दिशा और उद्देश्य पहले जैसे ही रहेंगे।
महतो ने आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं से भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र और अभ्यर्थी कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें प्रमुख मांगें हैं—
- JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
- भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- योग्य अभ्यर्थियों को समय पर न्याय दिलाना।
- भविष्य की परीक्षाओं को निष्पक्ष और विवादमुक्त बनाना।
आंदोलनकारियों का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने चाहिए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद जो भी उचित होगा, वही निर्णय लिया जाएगा ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
हालांकि आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि केवल बयान पर्याप्त नहीं हैं और सरकार को जल्द ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड की राजधानी रांची के निकट स्थित एक गांव के निवासी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बुंडू से प्राप्त की और बाद में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से उच्च शिक्षा हासिल की।
वे संस्कृत, कुरमाली तथा अन्य जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में स्नातकोत्तर हैं। इसके अलावा उन्होंने बीएड की डिग्री भी प्राप्त की है।
देवेंद्र महतो वर्ष 2015 से छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने तमाड़ विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा था।
छठी JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन के दौरान उनकी मां का निधन भी हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने छात्र हितों की लड़ाई जारी रखी।
आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा?
अनशन समाप्त होने के बाद अब आंदोलन का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन छात्र संगठन यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने के बाद इस आंदोलन पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की अपील के बाद देवेंद्र महतो ने 12 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया, लेकिन झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अडिग हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम और आंदोलन की आगामी रणनीति पर टिकी हैं।

