Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 72 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदले कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी राजनीतिक पहचान, चुनाव चिह्न और उपचुनावों में उम्मीदवारों को लेकर लगातार नए मोड़ सामने आते रहे। शुरुआत चुनाव आयोग की उस अंतरिम व्यवस्था से हुई, जिसमें प्रतिद्वंद्वी गुटों के विवाद के बीच पुराने ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘दो फूल-घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और सिंबल दिए गए।
पहले दिन आया नाम और सिंबल पर बड़ा फैसला
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद के बीच मूल नाम और पारंपरिक सिंबल को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई थी, जबकि पार्टी की मूल पहचान पर अंतिम फैसला अभी लंबित है।
इसके बाद 18 सितंबर को आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ चुनाव चिह्न मिला। दोनों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग पहचान के साथ मान्यता देने की अंतरिम व्यवस्था की गई है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पार्टी के अंतिम स्वामित्व या मूल पहचान पर अंतिम निर्णय नहीं है। मूल विवाद पर आगे प्रक्रिया जारी रहनी है।
ममता बनर्जी ने फैसले पर क्या कहा?
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतंत्र के इतिहास का ‘Black Day’ बताया और कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से चुनौती देगी। उन्होंने पुराने नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा जारी रखने की बात भी कही।
ममता ने चुनाव आयोग के फैसले के समय पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि उपचुनाव की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके थे। उन्होंने फैसले को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए, जिन्हें उनके राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए; चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के जरिए दोनों गुटों को चुनाव लड़ने के लिए अलग पहचान दी है।

दूसरे दिन नंदीग्राम में उम्मीदवार ने वापस लिया नाम
पार्टी की पहचान को लेकर विवाद के बीच घटनाक्रम नंदीग्राम तक पहुंचा। ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और नंदीग्राम से जुड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद यह कदम उठाया।
इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। ममता ने कांग्रेस को ‘सिस्टर पार्टी’ बताते हुए यह समर्थन विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में बताया।
हालांकि इसके बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी का मामला भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार यह गिरफ्तारी पुराने मामले से जुड़ी थी। ममता गुट और कांग्रेस की ओर से गिरफ्तारी के समय और राजनीतिक संदर्भ को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है।
तीसरे दिन रेजीनगर से आई दूसरी बड़ी खबर
इसके बाद रेजीनगर उपचुनाव ने ममता गुट के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी। पार्टी उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शुरुआत में चुनाव से हटने की घोषणा की। उन्होंने नए चुनाव चिह्न की पहचान, कार्यकर्ताओं की स्थिति और चुनाव प्रचार से जुड़ी परेशानियों को इसका कारण बताया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। करीब डेढ़ घंटे के भीतर चौधरी ने अपना फैसला वापस ले लिया और चुनाव लड़ने का ऐलान किया। बाद में उन्होंने कहा कि वह ममता बनर्जी के निर्देश पर पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में रहेंगे। उन्होंने पुलिस से मुलाकात के बाद कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी बात की।
इस घटनाक्रम ने पिछले तीन दिनों में सामने आए राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच ममता गुट को एक राहत जरूर दी।
अब आगे क्या?
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित हैं और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में हैं।
इस पूरे विवाद का अंतिम राजनीतिक और संगठनात्मक परिणाम अभी सामने नहीं आया है। चुनाव आयोग के अनुसार मूल पार्टी नाम और चिह्न को लेकर विवाद पर अंतिम निर्णय बाद की प्रक्रिया में होगा। इसलिए फिलहाल ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और ‘Football Player’ सिंबल को आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम चुनावी पहचान के रूप में देखना अधिक सटीक है।
निष्कर्ष:
पश्चिम बंगाल में पिछले 72 घंटे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए कई बड़े घटनाक्रम लेकर आए। चुनाव आयोग ने मूल TMC नाम और पारंपरिक ‘दो फूल-घास’ सिंबल को अंतरिम रूप से फ्रीज किया, जिसके बाद ममता गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ चुनाव चिह्न मिला। इसके बाद नंदीग्राम में उम्मीदवार ने नाम वापस लिया और रेजीनगर में उम्मीदवार ने पहले हटने की घोषणा कर फिर चुनाव लड़ने का फैसला किया। अब असली तस्वीर 6 अक्टूबर के उपचुनाव और पार्टी की पहचान पर आगे होने वाली चुनाव आयोग की प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

