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Reading: Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर क्यों नहीं चढ़ाते तवा और कड़ाही? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान
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Home - धर्म - Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर क्यों नहीं चढ़ाते तवा और कड़ाही? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर क्यों नहीं चढ़ाते तवा और कड़ाही? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Rajat Kumar
Last updated: 2026/08/16 at 4:27 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
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नई दिल्ली। सावन महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नाग पंचमी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इस दिन नाग देवता की पूजा और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को लेकर अलग-अलग रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं।

Contents
नाग पंचमी पर तवा क्यों नहीं चढ़ाते?राहु-केतु से भी जोड़ी जाती है मान्यताफिर नाग पंचमी पर क्या बनाया जाता है?जमीन की खुदाई से भी बचने की मान्यताधारदार चीजों के इस्तेमाल से बचने की परंपरातामसिक भोजन और विवाद से बचने की सलाहनाग पंचमी का धार्मिक महत्वनिष्कर्ष

नाग पंचमी से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनका पालन लोग पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। इनमें एक मान्यता यह भी है कि इस दिन घर की रसोई में तवा और कड़ाही नहीं चढ़ानी चाहिए। कई परिवार नाग पंचमी पर तवे पर रोटी सेंकने या कड़ाही में तलने-भूनने के बजाय अलग तरह के पकवान बनाते हैं।

लेकिन आखिर इस परंपरा के पीछे क्या मान्यता है? आइए जानते हैं।

नाग पंचमी पर तवा क्यों नहीं चढ़ाते?

लोक परंपराओं और कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में तवे की आकृति को नाग के फण से जोड़ा जाता है। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन तवे को सीधे अग्नि पर रखने से बचने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है।

मान्यता के अनुसार नाग पंचमी नाग देवताओं की पूजा और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन है। इसलिए इस दिन ऐसी चीजों से बचने की बात कही जाती है, जिन्हें प्रतीकात्मक रूप से नाग से जोड़ा जाता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि तवा न चढ़ाने की परंपरा सभी हिंदू परिवारों या सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं मानी जाती। अलग-अलग स्थानों पर नाग पंचमी के रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं।

राहु-केतु से भी जोड़ी जाती है मान्यता

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग देवताओं और राहु-केतु के बीच संबंध बताया जाता है। इसी आधार पर कुछ लोग मानते हैं कि नाग पंचमी के दिन तवे का इस्तेमाल करने से राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभाव हो सकते हैं।

हालांकि, यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं। इसलिए इसे परंपरा और आस्था के संदर्भ में ही समझना उचित है।

फिर नाग पंचमी पर क्या बनाया जाता है?

तवा नहीं चढ़ाने वाली परंपरा का पालन करने वाले परिवारों में इस दिन ऐसे व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनके लिए तवे की जरूरत न पड़े। कई जगह पूरी, हलवा और अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।

नाग पंचमी पर भोजन को लेकर भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं हैं। कहीं विशेष पकवान बनाए जाते हैं तो कहीं पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।

जमीन की खुदाई से भी बचने की मान्यता

नाग पंचमी से जुड़ी एक अन्य लोक मान्यता जमीन की खुदाई से संबंधित है। मान्यता है कि नागों का संबंध जमीन और पाताल लोक से माना जाता है। इसलिए इस दिन खेत या जमीन की खुदाई करने से बचने की परंपरा कुछ स्थानों पर है।

इस मान्यता के पीछे सांस्कृतिक रूप से प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का भाव भी देखा जाता है। नाग पंचमी के माध्यम से सांपों और अन्य जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देने वाली लोक परंपराएं भी मौजूद हैं।

धारदार चीजों के इस्तेमाल से बचने की परंपरा

कुछ क्षेत्रों में नाग पंचमी के दिन सुई, चाकू और अन्य नुकीली या धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल से भी बचने की परंपरा है। इसे धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है।

हालांकि, यह नियम भी हर स्थान पर समान नहीं है। इसलिए स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यताओं के अनुसार इसका पालन किया जाता है।

तामसिक भोजन और विवाद से बचने की सलाह

नाग पंचमी के दिन कई परिवार सात्विक भोजन करने को प्राथमिकता देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मन और व्यवहार को शांत रखने की कोशिश की जाती है।

इसी कारण लोगों को वाद-विवाद, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के साथ संयमित व्यवहार को इस पर्व का हिस्सा माना जाता है।

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में नागों को भगवान शिव और भगवान विष्णु से भी जोड़ा जाता है। भगवान शिव के गले में नाग का चित्रण और भगवान विष्णु का शेषनाग पर विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

नाग पंचमी पर श्रद्धालु नाग देवता की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा सुरक्षा की कामना करते हैं। कई स्थानों पर नाग मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन भी होते हैं।

निष्कर्ष

नाग पंचमी पर तवा और कड़ाही न चढ़ाने की परंपरा मुख्य रूप से लोक मान्यताओं, धार्मिक प्रतीकों और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों से जुड़ी है। तवे की आकृति को नाग के फण से जोड़ने और नाग देवताओं के सम्मान के कारण कुछ परिवार इस दिन तवे पर रोटी बनाने से बचते हैं। इसी तरह जमीन की खुदाई और धारदार चीजों के इस्तेमाल से बचने जैसी मान्यताएं भी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इन परंपराओं को आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में समझना चाहिए, न कि वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नियम के रूप में।

TAGGED: Festival News, Hindu Dharma, Hindu Festivals, Nag Devta, Nag Panchami, Nag Panchami 2026, Religious Traditions, Sanatan Tradition, Sawan, Spiritual News
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