ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे से नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष अदालत ने 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से बार-बार दुष्कर्म करने के दोषी 27 वर्षीय अनिकेत राजेश निषाद को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2020 का है और करीब छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
विशेष न्यायाधीश जी. टी. पवार ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(n) और 506 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी पर अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत के निर्देश के मुताबिक जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ठाणे को पीड़िता को अतिरिक्त मुआवजा देने पर भी विचार करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने सहमति को लेकर क्या कहा?
इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई थी कि आरोपी और पीड़िता के बीच संबंध सहमति से बने थे। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। ऐसे में कानून के तहत उसकी सहमति को वैध सहमति नहीं माना जा सकता। यही वजह रही कि आरोपी की ओर से रिश्ते को सहमति पर आधारित बताने की दलील अदालत में प्रभावी नहीं हुई।
शादी का झांसा देकर बनाए संबंध
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता की मुलाकात आरोपी से जुलाई 2020 में ठाणे के वागले एस्टेट इलाके में आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा।
आरोप है कि अगस्त से नवंबर 2020 के बीच आरोपी ने नाबालिग को कई बार अपनी बिल्डिंग के एक कमरे में बुलाया। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने उसे शादी का झांसा दिया और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी। इसी दौरान उसने नाबालिग का बार-बार यौन उत्पीड़न किया।
पीड़िता ने काफी समय तक इस घटना के बारे में अपने परिवार को जानकारी नहीं दी। बाद में उसने 1 दिसंबर 2020 को अपनी मां को पूरी घटना बताई। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची और ठाणे के श्रीनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की गई।

बचाव पक्ष ने लॉकडाउन का भी दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दोनों के बीच संबंधों को सहमति से बना हुआ बताया। बचाव पक्ष ने कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन और उस समय लागू आवाजाही प्रतिबंधों का भी हवाला दिया।
बचाव पक्ष की ओर से अभियोजन की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए और यह तर्क देने की कोशिश की गई कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे।
हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। पीड़िता की उम्र और मामले से जुड़े कानूनी प्रावधानों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
छह साल बाद आया फैसला
यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मामले को अदालत में पेश किया गया। करीब छह साल बाद अब विशेष अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
POCSO कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना है। इस मामले में अदालत का फैसला एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों में उसकी उम्र और कानून के प्रावधान बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
पीड़िता को मुआवजा देने का निर्देश
सजा के साथ अदालत ने पीड़िता के लिए आर्थिक सहायता का भी रास्ता साफ किया है। आरोपी पर लगाया गया 11 हजार रुपये का जुर्माना पीड़िता को मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को अतिरिक्त मुआवजा देने पर विचार करने को कहा गया है। अदालत के इस निर्देश का उद्देश्य पीड़िता को कानूनी प्रक्रिया के बाद आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष
ठाणे के इस मामले में अदालत का फैसला नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों में कानून की सख्ती को सामने लाता है। अदालत ने साफ किया कि 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति की कथित सहमति को ऐसे मामलों में कानूनी सहमति नहीं माना जा सकता। छह साल पुराने मामले में 20 साल की कठोर सजा के साथ आरोपी पर जुर्माना भी लगाया गया है।

