नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में यात्रियों के लिए नियमों का उल्लंघन करना अब पहले के मुकाबले काफी महंगा पड़ सकता है। जन विश्वास बिल लागू होने के बाद रेलवे से जुड़े कुछ अपराधों और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि में बड़ा बदलाव हुआ है। इसका असर अब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्रवाई और जुर्माना वसूली के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।
दिल्ली मंडल में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 19 जून से नई पेनल्टी दरें लागू होने के बाद कई श्रेणियों में जुर्माना वसूली में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। खास तौर पर महिला आरक्षित कोच में बिना अधिकार यात्रा करने वालों और रेलवे परिसर में धूम्रपान करने वालों पर अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आर्थिक कार्रवाई की जा रही है।
महिला कोच में घुसना पड़ेगा महंगा
रेलवे के महिला आरक्षित कोच में पुरुष यात्रियों द्वारा अनधिकृत रूप से यात्रा करना पहले भी नियमों का उल्लंघन था, लेकिन अब इसके लिए आर्थिक दंड काफी बढ़ गया है।
नई व्यवस्था के तहत महिला आरक्षित बोगी में अवैध रूप से यात्रा करने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये किया गया है।
दिल्ली मंडल में जुलाई महीने के दौरान RPF ने ऐसे 302 लोगों को पकड़ा। इनसे करीब 7.5 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसकी तुलना अगर मई से करें तो उस महीने इस श्रेणी में करीब 33 हजार रुपये की वसूली हुई थी।
यानी नए जुर्माने के बाद रेलवे नियमों को तोड़ने वालों पर आर्थिक कार्रवाई का असर साफ दिखाई दे रहा है।
ट्रेन और रेलवे परिसर में धूम्रपान भी पड़ेगा भारी
रेलवे परिसर में धूम्रपान करने वालों के खिलाफ भी अब सख्ती बढ़ गई है। पहले इस अपराध के लिए करीब 100 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये तक कर दिया गया है।
जुलाई में RPF ने ऐसे 10 लोगों को पकड़ा और उनसे करीब 20 हजार रुपये वसूले।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नए नियमों का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि यात्रियों को रेलवे परिसर और ट्रेनों में नियमों का पालन करने के लिए अधिक जिम्मेदार बनाना भी है।

बिना अनुमति स्टेशन में प्रवेश पर भी बढ़ी वसूली
रेलवे स्टेशन पर बिना अनुमति प्रवेश करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई में तेजी आई है। जुलाई में इस श्रेणी में करीब 5.9 लाख रुपये की वसूली हुई, जबकि मई में यह आंकड़ा लगभग 1.5 लाख रुपये था।
इसी तरह रेलवे परिसर में फेरी लगाने और भीख मांगने से जुड़े मामलों में भी जुर्माना संग्रह बढ़ा। मई में जहां करीब 4.4 लाख रुपये की वसूली हुई थी, वहीं जुलाई में यह राशि बढ़कर लगभग 5.3 लाख रुपये पहुंच गई।
रेलवे स्टाफ के निर्देश न मानना भी पड़ेगा महंगा
रेलवे की व्यवस्था में कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है। जानकारी के अनुसार, ट्रेन के ड्राइवर या कंडक्टर की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने से जुड़े मामलों में भी जुलाई के दौरान जुर्माना वसूली में बड़ा उछाल देखने को मिला।
इस श्रेणी में जुलाई में करीब 7.2 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि मई में यह रकम लगभग 1.2 लाख रुपये थी।
वसूली गई जुर्माने की राशि भारतीय रेलवे के पास जमा की जाती है।
पहले और अब के नियम में क्या बदला?
RPF के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पहले कई मामलों में जुर्माना लगाने की प्रक्रिया अलग थी। कुछ मामलों में मजिस्ट्रेट के स्तर पर जुर्माना तय किया जाता था और सामान्य तौर पर 100 से 500 रुपये तक की राशि सामने आती थी।
कुछ परिस्थितियों में आर्थिक परेशानी का हवाला देने पर जुर्माने की राशि में राहत भी मिल सकती थी। नई व्यवस्था में कई मामलों के लिए अधिक स्पष्ट और निर्धारित पेनल्टी तय की गई है।
जन विश्वास बिल से बदली कार्रवाई की प्रक्रिया
सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर (RPF) आशुतोष पांडे के अनुसार, जन विश्वास बिल ने कुछ अपराधों से निपटने की प्रक्रिया में बदलाव किया है।
कुछ ऐसे मामलों, जिनमें पहले आपराधिक कार्रवाई या क्रिमिनल पेनल्टी का प्रावधान था, उन्हें अब सिविल पेनल्टी के दायरे में लाया गया है। इसका मतलब है कि कुछ उल्लंघनों पर आपराधिक प्रक्रिया के बजाय प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारी ने बताया कि RPF कर्मचारियों को नए नियमों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं। साथ ही यात्रियों को नए नियमों और जुर्माने के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
यात्रियों के लिए जरूरी संदेश
नए नियमों के बाद यात्रियों के लिए यह समझना जरूरी है कि रेलवे में छोटी लगने वाली लापरवाही भी अब जेब पर भारी पड़ सकती है। महिला आरक्षित कोच में अनधिकृत प्रवेश, धूम्रपान, बिना अनुमति स्टेशन में प्रवेश और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अनदेखी जैसे मामलों में कार्रवाई से बचने के लिए यात्रियों को निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए।
निष्कर्ष
जन विश्वास बिल लागू होने के बाद रेलवे नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि बढ़ने से RPF की कार्रवाई और वसूली दोनों में तेजी आई है। महिला कोच में अवैध यात्रा के लिए 2,500 रुपये और रेलवे परिसर में धूम्रपान के लिए 2,000 रुपये तक का जुर्माना यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव है। रेलवे का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि ट्रेनों और स्टेशनों में अनुशासन, सुरक्षा और नियमों के पालन को मजबूत करना है।

