नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जब नंदग्राम की बबीता की कहानी सामने आई, तो यह सिर्फ एक महिला की सफलता की कहानी नहीं रही, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भर बनने की मिसाल बन गई। आर्थिक तंगी, कारोबार बंद होने और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद बबीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने छोटे से कर्ज के सहारे अपना कारोबार दोबारा शुरू किया और धीरे-धीरे उसे आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बबीता के संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्हें महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल के तौर पर सामने रखा। बबीता की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने खुद मुश्किलों से निकलने के साथ-साथ दूसरे लोगों को भी अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रोत्साहित किया।
कोरोना में बंद हो गया था कारोबार
बबीता के जीवन में सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक कोरोना महामारी के दौरान आया दौर था। लॉकडाउन के कारण उनका कारोबार प्रभावित हुआ और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। आमदनी का जरिया बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया।
बबीता पहले से पूजा सामग्री का कारोबार करती थीं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय दोबारा शुरुआत करने का फैसला किया।
10 हजार रुपये के लोन से दोबारा शुरू की दुकान
वर्ष 2022 में बबीता ने 10 हजार रुपये का लोन लेकर नंदग्राम टैंपो स्टैंड के पास पूजा सामग्री की दुकान फिर से शुरू की। शुरुआत छोटी थी, लेकिन उनके इरादे मजबूत थे।
दुकान दोबारा शुरू करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाया। जरूरत पड़ने पर उन्होंने आगे भी कर्ज लिया और अपने व्यवसाय का विस्तार किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह कारोबार उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का जरिया बन गया।
बबीता की कहानी बताती है कि कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। सही अवसर, मेहनत और लगातार प्रयास से छोटे स्तर का काम भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
तीन बेटों की जिम्मेदारी भी उठाई
बबीता की निजी जिंदगी भी आसान नहीं रही। वह तीन बेटों की मां हैं। उनके बड़े बेटे विनय शर्मा की उम्र 26 वर्ष और दूसरे बेटे राहुल की उम्र 25 वर्ष बताई गई है। उनके सबसे छोटे बेटे ने हाल ही में दसवीं की परीक्षा पास की है।
उनके पति उनसे अलग रहते हैं। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी भी काफी हद तक बबीता के कंधों पर रही। इसके बावजूद उन्होंने अपने कारोबार को संभाला और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की।

खुद आगे बढ़ीं तो दूसरों का हाथ भी थामा
बबीता की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा। उनके मुताबिक, उन्होंने करीब 100 अन्य लोगों को छोटे स्तर पर अपना कारोबार शुरू करने में मदद की है।
यह पहल महिला सशक्तिकरण की उस भावना को मजबूत करती है, जिसमें एक महिला के आत्मनिर्भर बनने के बाद वह दूसरी महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश करती है।
बबीता का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को सही दिशा, थोड़ी आर्थिक मदद और आगे बढ़ने का अवसर मिले, तो वह अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है।
सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का संदेश
बबीता की कहानी में सरकारी योजनाओं और छोटे ऋण की भूमिका भी महत्वपूर्ण नजर आती है। कम राशि से शुरू हुआ कारोबार धीरे-धीरे उनके लिए आय का जरिया बना।
ऐसी कहानियां इस बात की ओर ध्यान खींचती हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए छोटे कारोबार और आसान ऋण किस तरह आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल सकते हैं। हालांकि किसी भी योजना या लोन का लाभ लेने से पहले उसकी पात्रता, शर्तों और आधिकारिक नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
पीएम मोदी के ‘मन की बात’ में जिक्र से मिली नई पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में बबीता की कहानी साझा किए जाने के बाद उनका संघर्ष व्यापक स्तर पर चर्चा में आया। उनका उदाहरण उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है जो आर्थिक परेशानियों या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को आगे नहीं बढ़ा पातीं।
बबीता ने दिखाया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत की जा सकती है। 10 हजार रुपये के छोटे से लोन से शुरू हुआ उनका कारोबार आज उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और दूसरों को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन चुका है।
निष्कर्ष
नंदग्राम की बबीता की कहानी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की ऐसी मिसाल है, जिसमें छोटी शुरुआत ने बड़ा बदलाव पैदा किया। कोरोना के बाद आर्थिक संकट से जूझते हुए उन्होंने 10 हजार रुपये के लोन से अपना कारोबार फिर खड़ा किया और आगे चलकर करीब 100 लोगों को भी स्वरोजगार की दिशा में बढ़ने में मदद करने का दावा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में उनका जिक्र उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी को देशभर तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण अवसर बना है।

