यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में सीटों पर बड़ा पेच
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का मुद्दा लगातार चर्चा में है। दोनों दलों ने 2024 का लोकसभा चुनाव साथ लड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए सीटों का फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है। मौजूदा बातचीत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी और किन सीटों पर उम्मीदवार उतारने का अधिकार मिलेगा?
हालिया रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। 16 सितंबर की NDTV रिपोर्ट के मुताबिक, सपा की ओर से कांग्रेस के लिए करीब 60 से 70 सीटों पर विचार किए जाने की बात सामने आई, जबकि कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग कर रही है। इससे पहले कांग्रेस की ओर से 2017 के गठबंधन फॉर्मूले और 50-50 जैसे विकल्पों की चर्चा भी सामने आती रही है।
ऐसे में 45-50 सीट का आंकड़ा फिलहाल कोई अंतिम या आधिकारिक सीट-बंटवारा फॉर्मूला नहीं है।
अखिलेश का ‘सीट नहीं, जीत’ वाला फॉर्मूला
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से पहले यह संकेत दिया गया है कि गठबंधन में केवल सीटों की संख्या बढ़ाना मुख्य आधार नहीं होना चाहिए। उम्मीदवार की जीतने की क्षमता और स्थानीय राजनीतिक समीकरण को महत्व देने की बात सामने आई है। सपा सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि सहयोगी दलों से संभावित उम्मीदवारों के नाम और संबंधित सीटों पर उनकी स्थिति का आकलन मांगा जा सकता है।
इसका मतलब यह है कि किसी पार्टी को जितनी सीटें चाहिए, उतनी ही सीटें मिल जाएं—ऐसा जरूरी नहीं है। सीट चयन में उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, संगठन और चुनावी स्थिति जैसे पहलुओं को भी बातचीत का आधार बनाया जा सकता है।
कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर क्यों कर रही दावा?
कांग्रेस के भीतर 2017 के सपा-कांग्रेस गठबंधन का उदाहरण दिया जाता रहा है। उस चुनाव में दोनों दलों ने गठबंधन किया था और कांग्रेस ने 100 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
2027 के लिए कांग्रेस की ओर से ज्यादा सीटों की मांग के पीछे 2024 लोकसभा चुनाव के संयुक्त प्रदर्शन को भी एक आधार माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस का तर्क है कि गठबंधन में उसे ऐसी सीटें मिलनी चाहिए जहां उसका संगठन और उम्मीदवार प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
सितंबर की एक रिपोर्ट में कांग्रेस की ओर से 50 प्रतिशत सीटों की मांग का भी उल्लेख किया गया था।
हालांकि, 16 सितंबर को कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि पार्टी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इसे फिलहाल संगठनात्मक तैयारी के तौर पर देखना चाहिए, न कि सपा के साथ अंतिम सीट-बंटवारे की घोषणा के रूप में।
2022 के नतीजे भी बातचीत में अहम
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थी। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े 2022 के चुनाव के उम्मीदवार और पार्टी परिणाम उपलब्ध कराते हैं।
यही अंतर सीट बंटवारे की बातचीत में महत्वपूर्ण संदर्भ बनता है। सपा के पास विधानसभा स्तर पर कांग्रेस की तुलना में बड़ा संगठनात्मक और चुनावी आधार रहा है, जबकि कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

2024 में साथ आए, अब विधानसभा में अलग गणित
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। दोनों दलों ने मिलकर 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य में अच्छा प्रदर्शन किया था।
लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग होते हैं। विधानसभा में 403 सीटें हैं और हर क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवार, जातीय समीकरण, संगठन और क्षेत्रीय मुद्दों की भूमिका अधिक प्रत्यक्ष होती है।
इसी वजह से दोनों दल सीटों की संख्या के साथ-साथ कौन सी सीट किस पार्टी के लिए अधिक उपयुक्त है, इस सवाल पर भी बातचीत कर रहे हैं। दोनों दलों द्वारा 403 विधानसभा सीटों पर अपने-अपने स्तर पर सर्वे कराने की खबरें भी सामने आई थीं।
रायबरेली-अमेठी समेत कई सीटों पर पेच
सीट बंटवारे की बातचीत में केवल संख्या ही मुद्दा नहीं है। कुछ महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी दोनों दलों के बीच सहमति बनाना चुनौती हो सकता है।
NDTV की रिपोर्ट में रायबरेली और अमेठी को बातचीत के महत्वपूर्ण बिंदुओं में बताया गया है। सपा की ओर से कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों की सूची और उनकी चुनावी स्थिति की जानकारी मांगे जाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है।
इसलिए अंतिम फॉर्मूला केवल कुल सीटों की संख्या तय करने से नहीं बनेगा, बल्कि सीटों के चयन पर भी निर्भर करेगा।
राजभर और निषाद को लेकर भी सियासी हलचल
इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। दोनों दल फिलहाल भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा हैं।
हालिया रिपोर्ट में संजय निषाद ने भाजपा से ज्यादा सीटें मिलने की मांग को लेकर अपने राजनीतिक विकल्पों पर पुनर्विचार की बात कही थी। वहीं 16 सितंबर को ओम प्रकाश राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर टिप्पणी की।
इससे साफ है कि 2027 के चुनाव से पहले केवल सपा-कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य सहयोगी दलों के बीच भी सीटों और गठबंधन को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण रहेगी।
सपा के सामने कांग्रेस की मांग, कांग्रेस के सामने सीटों का सवाल
सपा-कांग्रेस बातचीत में फिलहाल दो अलग दृष्टिकोण दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस ज्यादा सीटों के साथ अपने संगठन और राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाना चाहती है, जबकि सपा की ओर से उम्मीदवार की मजबूती और सीट जीतने की संभावना को महत्व देने की बात सामने आई है।
यही अंतर सीट बंटवारे को जटिल बना रहा है। फिलहाल 45-50 सीट, 60-70 सीट या 100 से ज्यादा सीट जैसे अलग-अलग आंकड़े राजनीतिक चर्चाओं और रिपोर्टों में मौजूद हैं, लेकिन किसी संख्या को अंतिम सीट-बंटवारा कहना जल्दबाजी होगी।
आगे क्या होगा?
आने वाले समय में दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत का अगला दौर महत्वपूर्ण होगा। सीटों की संख्या के साथ-साथ उन सीटों की सूची, संभावित उम्मीदवार और स्थानीय संगठन की स्थिति पर चर्चा हो सकती है।
कांग्रेस पहले ही 403 सीटों पर संगठनात्मक तैयारी की बात कर रही है, जबकि सपा की ओर से उम्मीदवार की जीतने की क्षमता पर जोर दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल सीटों का बंटवारा है। कांग्रेस की ओर से बड़े हिस्से की मांग की खबरें हैं, जबकि सपा की रणनीति सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की मजबूती और स्थानीय चुनावी समीकरण पर जोर देने की बताई जा रही है।
16 सितंबर की रिपोर्टों में सपा की ओर से करीब 60-70 सीट और कांग्रेस की ओर से करीब 105 सीट की मांग का उल्लेख है। दूसरी ओर कांग्रेस ने 403 सीटों पर तैयारी की बात कही है।
इसलिए फिलहाल 45-50 सीट को तय फॉर्मूला मानना सही नहीं होगा। असली तस्वीर तब साफ होगी जब दोनों दल सीटों और उम्मीदवारों को लेकर औपचारिक समझौते पर पहुंचेंगे।

