मेरठ: बुधवार की सुबह मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर की आवाज के बीच ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। मशीनें उन इमारतों और व्यावसायिक परिसरों के हिस्सों को गिरा रही थीं, जहां लंबे समय से कारोबार चल रहा था। अपनी संपत्ति और दुकानों पर कार्रवाई होते देख कुछ लोग रोते और बिलखते नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में भी प्रभावित लोगों की भावुक प्रतिक्रिया दिखाई दी।
शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट और गुरुद्वारा रोड पर सील की गई 44 संपत्तियों में से छह पर बुधवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। अधिकारियों के मुताबिक, इन छह संपत्तियों में स्वीकृत आवासीय नक्शे के अनुरूप निर्माण नहीं था और अवैध निर्माण हटाने के लिए पहले नोटिस दिए जा चुके थे।
सुबह छह बजे से बैरिकेडिंग, भारी पुलिस फोर्स तैनात
कार्रवाई से पहले ही इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। सुबह करीब छह बजे सेंट्रल मार्केट और गुरुद्वारा रोड की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान बिजली आपूर्ति भी बंद रही, जिससे आसपास के कई इलाकों में लोगों को परेशानी हुई। स्कूल जाने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को भी रास्ते बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
करीब सवा सात बजे से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। कुछ इमारतों के हिस्से जेसीबी से हटाए गए, जबकि मजबूत निर्माण वाले हिस्सों को तोड़ने के लिए बड़ी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। कार्रवाई कई घंटे तक चली।
बुलडोजर चलता देख रो पड़े लोग
सबसे भावुक दृश्य उस समय सामने आया जब दुकानों और परिसरों पर मशीनें चलनी शुरू हुईं। अपनी संपत्ति पर कार्रवाई देख कुछ भवन स्वामी और उनके परिवार के सदस्य रोते नजर आए।
व्यापारियों और प्रभावित लोगों का कहना है कि इन परिसरों में वर्षों से कारोबार चल रहा था और कई परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी थी। कुछ लोगों ने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध था तो इसे पहले क्यों नहीं रोका गया।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि संबंधित संपत्तियों के संबंध में पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।

44 संपत्तियों पर क्यों हुई कार्रवाई?
यह मामला लंबे समय से चल रहे आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े विवाद का हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
14 जुलाई के आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद ने संबंधित संपत्ति स्वामियों को अवैध निर्माण हटाने के लिए समय दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, समयसीमा समाप्त होने के बाद भी कई जगह निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई।
बुधवार को जिन छह संपत्तियों पर कार्रवाई की गई, अधिकारियों के अनुसार उनके आवासीय नक्शे स्वीकृत नहीं थे। परिषद का कहना है कि इन संपत्तियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जा रहा है।
पांच कॉम्प्लेक्स और एक बैंक्वेट हॉल पर कार्रवाई
बुधवार की कार्रवाई में छह भवन शामिल रहे। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें पांच व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और एक बैंक्वेट हॉल से जुड़ी संपत्ति शामिल थी। इन परिसरों में करीब 35 दुकानें होने की बात सामने आई है।
कार्रवाई से पहले इन स्थानों पर अलग-अलग तरह के कारोबार चलते थे। इनमें कपड़ों की दुकान, भोजनालय, दवा की दुकान, जिम, जूतों का कारोबार और बैंक्वेट हॉल जैसी व्यावसायिक गतिविधियां शामिल थीं।
व्यापारियों ने जताया विरोध
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। अधिकारियों ने उनसे बातचीत की और बताया कि कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ व्यापारिक संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों की जवाबदेही की मांग भी की।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट में फिर आएगा
इस पूरे विवाद में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 21 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई है। आवास एवं विकास परिषद को कार्रवाई से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखने की तैयारी करनी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों के तहत आवासीय भूखंडों पर नियमों के विपरीत किए गए व्यावसायिक निर्माण और इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार की छह संपत्तियों पर हुई कार्रवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताई गई है।
ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने में जुटा निगम
बुलडोजर कार्रवाई के बाद बड़ी मात्रा में मलबा सड़क और आसपास जमा हो गया। इसके बाद नगर निगम की टीमों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया।
आवास एवं विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि नगर निगम की टीम सफाई और मलबा हटाने में लगी रही। प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई के बाद रास्तों और आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही को सामान्य करना बताया गया।
दशकों पुराने बाजार पर कार्रवाई ने बढ़ाई चिंता
सेंट्रल मार्केट में हुई कार्रवाई के बाद आसपास के दूसरे व्यापारिक क्षेत्रों के कारोबारियों में भी चिंता देखी जा रही है। कुछ व्यापारियों को आशंका है कि नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों वाले अन्य क्षेत्रों में भी कार्रवाई का असर पड़ सकता है।
फिलहाल सेंट्रल मार्केट का विवाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके अनुपालन से जुड़ा है। प्रभावित संपत्ति मालिकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया और व्यापारियों की आपत्तियों के बीच प्रशासन का कहना है कि वह अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर रहा है।

