Vande Mataram Controversy: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस विवाद के बीच गीतकार, स्क्रीनराइटर और कवि मनोज मुंतशिर शुक्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। युवा धर्म संसद के दौरान उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को केवल दो छंदों तक सीमित करने को लेकर चल रही बहस पर कहा कि विपक्ष के नेताओं को इस तरह की हरकतों से बाज आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ पूरा गाया जाएगा और पूरा गाना पड़ेगा। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में इस मुद्दे को लेकर बहस फिर तेज हो गई।
मनोज मुंतशिर ने क्या कहा?
मनोज मुंतशिर ने यह टिप्पणी युवा धर्म संसद के दौरान की। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित लाइव म्यूजिकल शो ‘मेरा देश पहले: नरेंद्र मोदी की अनकही कहानी’ का भी संदर्भ था।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में मनोज मुंतशिर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन में ‘सेवा’ को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के जीवन के कई पहलुओं में सबसे ज्यादा सेवा की भावना प्रभावित करती है। इसके बाद ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर उन्होंने दो छंदों तक सीमित करने को लेकर आपत्ति जताई और पूरे गीत के गायन की बात कही।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम्’ के आधिकारिक संस्करण और इसके सार्वजनिक कार्यक्रमों में गायन को लेकर केंद्र तथा कुछ राज्यों के निर्देश चर्चा में हैं।
आखिर दो छंदों को लेकर विवाद क्यों?
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह उनके उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा था। इसके शुरुआती छंद मातृभूमि की प्रशंसा से जुड़े हैं, जबकि गीत के बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों और देवी स्वरूपों से संबंधित संदर्भ आते हैं।
इसी वजह से लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि सार्वजनिक या सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के किस हिस्से का गायन किया जाए। मौजूदा विवाद में भी एक पक्ष आधिकारिक पूर्ण संस्करण के गायन की बात कर रहा है, जबकि कुछ जगहों पर केवल शुरुआती दो छंदों के इस्तेमाल का निर्देश चर्चा में आया है।
यह विवाद केवल संगीत या साहित्य का विषय नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रगीत की औपचारिक भूमिका, सरकारी निर्देश और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक सवाल भी जुड़े हुए हैं।
केंद्र की गाइडलाइन में क्या कहा गया है?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के गायन/वादन से जुड़े आदेश जारी किए थे। मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज में राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण को लेकर दिशा-निर्देश दर्ज हैं। मंत्रालय के अनुसार, जब राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक संस्करण गाया या बजाया जाए तो दर्शकों से सावधान मुद्रा में खड़े रहने की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों हों, तो राष्ट्रगीत पहले प्रस्तुत किया जाता है।
यानी मौजूदा बहस को समझने के लिए यह फर्क जरूरी है कि केंद्र की गाइडलाइन क्या कहती है और किसी राज्य सरकार ने अपने कार्यक्रमों के लिए क्या निर्देश दिए हैं।

कर्नाटक में क्यों पहुंचा मामला अदालत तक?
इसी मुद्दे से जुड़ा एक अलग विवाद कर्नाटक में सामने आया है। कर्नाटक सरकार ने 8 सितंबर को अपने कार्यक्रमों में, कुछ संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी को छोड़कर, ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो छंद गाने का निर्देश दिया था। इस आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि राज्य सरकार का निर्देश केंद्र के 9 जुलाई के दिशा-निर्देश से टकराता है।
इस मामले में अदालत की अंतिम स्थिति ही यह स्पष्ट करेगी कि संबंधित राज्य निर्देशों को लेकर कानूनी रूप से क्या फैसला होता है। इसलिए मौजूदा समय में इसे अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
मनोज मुंतशिर के बयान का राजनीतिक संदर्भ
मनोज मुंतशिर का बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक दलों और अलग-अलग सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उनके बयान में विपक्षी नेताओं पर टिप्पणी भी शामिल थी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मनोज मुंतशिर कोई सरकारी आदेश या न्यायिक फैसला जारी करने वाले अधिकारी नहीं हैं। उनका बयान इस मुद्दे पर उनकी सार्वजनिक राय है। दूसरी ओर, केंद्र की गाइडलाइन सरकारी निर्देश है और कर्नाटक का मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत है। इन तीनों को एक ही स्तर पर रखना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
‘वंदे मातरम्’ का राष्ट्रीय महत्व
‘वंदे मातरम्’ को भारत के राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थान रहा है।
आज भी इसे राष्ट्रीय समारोहों और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जाता है। इसके सम्मान और प्रस्तुति को लेकर केंद्र सरकार समय-समय पर औपचारिक दिशा-निर्देश जारी करती रही है। गृह मंत्रालय की वर्तमान गाइडलाइन में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के औपचारिक प्रस्तुतीकरण से जुड़े नियम शामिल हैं।
आगे क्या?
अब इस पूरे विवाद में दो स्तर महत्वपूर्ण हैं। पहला, सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण को लेकर केंद्र की गाइडलाइन का पालन किस तरह होता है। दूसरा, राज्यों द्वारा जारी अलग-अलग निर्देशों को अदालतों में चुनौती दिए जाने पर न्यायिक संस्थाएं क्या रुख अपनाती हैं।
कर्नाटक से जुड़ी याचिका पर आगे की न्यायिक कार्यवाही इस बहस को कानूनी दिशा दे सकती है। वहीं मनोज मुंतशिर जैसे सार्वजनिक चेहरों के बयान से इस मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।
निष्कर्ष:
‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद के बीच मनोज मुंतशिर ने पूरे गीत के गायन की वकालत की है और कहा है कि इसे पूरा गाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने जुलाई 2026 में राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण और उसके प्रस्तुतीकरण से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। कर्नाटक में केवल दो छंदों के गायन से जुड़ा निर्देश अदालत में चुनौती के अधीन है। इसलिए फिलहाल इस मुद्दे पर अलग-अलग बयानों और सरकारी निर्देशों के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।

