राम मंदिर दान विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
अयोध्या: के राम मंदिर में कथित दान अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर परोक्ष रूप से तीखा हमला बोलते हुए जांच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि मामला इतना गंभीर है तो इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने के बजाय विशेष जांच दल (SIT) को क्यों दी गई।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि जांच एजेंसी का चयन केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि सत्ता के भीतर चल रहे कथित राजनीतिक समीकरणों का परिणाम है। दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विपक्ष पर आस्था के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
‘दिल्ली और लखनऊ के बीच सत्ता संघर्ष’ का आरोप
मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि सत्ता के दो अलग-अलग केंद्र काम कर रहे हैं—एक दिल्ली और दूसरा लखनऊ। उनके अनुसार, इसी कथित आंतरिक खींचतान का असर जांच प्रक्रिया पर भी दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच ED, CBI या आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों को दी जाती, तो जांच की कमान केंद्र सरकार के हाथ में होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और SIT गठित कर मामले को राज्य स्तर पर रखा गया।
अखिलेश ने सवाल किया कि आखिर SIT किसे रिपोर्ट सौंप रही है और जांच की निगरानी किस स्तर पर हो रही है।
‘जनता के गुस्से से डरी हुई है सरकार’
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि दान और चढ़ावे से जुड़े मामले ने करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है और सरकार उसी जनाक्रोश से बचने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, यदि जांच पूरी तरह पारदर्शी होती तो उसे स्वतंत्र एजेंसियों के हवाले किया जाता।
हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।

‘मर्यादा’ पर भी किया कटाक्ष
अपने बयान के दौरान अखिलेश यादव ने भगवान राम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग भगवान राम की मर्यादा की बात करते हैं, वे स्वयं कथित तौर पर उस मर्यादा का पालन नहीं कर पाए।
उन्होंने कहा कि धन के लालच में लोग अपनी सीमाएं भूल गए हैं और यही पूरे विवाद की जड़ है।
भाजपा ने किया पलटवार
अखिलेश यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कानून के अनुसार की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
हालांकि उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण को लेकर पुराना राजनीतिक रुख सभी जानते हैं। ऐसे में इन दलों द्वारा आज मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाना केवल राजनीतिक अवसरवाद है।
SIT जांच पर सबकी नजर
फिलहाल पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम मंदिर के दान प्रबंधन, लेखा प्रणाली, सीसीटीवी रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका तथा वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
राजनीतिक बहस और जनभावनाएं
राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक अत्यंत संवेदनशील विषय भी है। ऐसे में इस मामले पर आने वाले हर राजनीतिक बयान का व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।
जहां विपक्ष निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा का कहना है कि जांच प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और उसके निष्कर्ष इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में राम मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इसके बाद जांच के लिए SIT का गठन किया गया।
मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल लगातार बयान दे रहे हैं। हालांकि अब तक जांच पूरी नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से तय नहीं की गई है।
निष्कर्ष
राम मंदिर दान विवाद अब केवल जांच का विषय नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र भी बन चुका है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने SIT जांच को लेकर कई सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इन आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के लिए SIT जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितना तथ्य है और आगे क्या कार्रवाई होगी।

