उत्तर प्रदेश: के अलीगढ़ से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे रोड इलाके में पाइपलाइन की मरम्मत के दौरान मिट्टी का बड़ा टीला अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे एक मजदूर 14 फीट गहरे गड्ढे में जिंदा दफन हो गया। बाद में उसे बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान 32 वर्षीय महेंद्र के रूप में हुई है, जो मूल रूप से जवां क्षेत्र का रहने वाला था और अपने परिवार के साथ अलीगढ़ में किराए पर रहता था। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, रेलवे रोड पर सीवर लाइन डालने के दौरान पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसे ठीक करने के लिए करीब 14 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। शनिवार दोपहर महेंद्र अपने साथियों के साथ इसी गड्ढे में उतरकर पाइपलाइन की मरम्मत कर रहा था।
इसी दौरान ऊपर की ढीली मिट्टी अचानक धंस गई और एक बड़ा टीला सीधे महेंद्र के ऊपर आ गिरा। देखते ही देखते वह पूरी तरह मिट्टी में दब गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत जेसीबी मशीन की मदद से मिट्टी हटाई और उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

भाई ने लगाया गंभीर आरोप
मृतक के भाई राजकुमार ने इस हादसे को दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और जबरदस्ती का नतीजा बताया है। उनका आरोप है कि गड्ढे की मिट्टी पहले से ही दरक रही थी और उन्होंने जेई (जूनियर इंजीनियर) नरेंद्र सिंह से काम रोकने की गुहार लगाई थी।
राजकुमार के मुताबिक, “हमने हाथ जोड़कर कहा था कि मिट्टी गिर रही है, काम बंद कर दें। लेकिन जेई ने गाली-गलौज की और मेरे भाई को लात मारकर गड्ढे में धकेल दिया।” यह आरोप मामले को और गंभीर बना देता है और जांच की दिशा बदल सकता है।
हादसे के बाद हंगामा
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। जब पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने लगी, तो परिजनों ने विरोध करते हुए शव को छीन लिया और करीब एक घंटे तक हंगामा किया।
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। एसपी सिटी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शांत हुए और शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
परिजनों का कहना है कि मौके पर कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था। न तो मजदूरों को हेलमेट दिया गया था और न ही गड्ढे को सुरक्षित करने के लिए कोई मजबूत सपोर्ट सिस्टम लगाया गया था।
वहीं, नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो तीन दिन में रिपोर्ट देगी।
मुआवजा और सरकारी कार्रवाई
प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, मृतक की पत्नी ने 50 लाख रुपये मुआवजे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री स्तर पर भी इस घटना का संज्ञान लिया गया है और अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष:
अलीगढ़ का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का आईना है। अगर समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते, तो शायद एक मजदूर की जान बचाई जा सकती थी। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


