लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 24वें दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में होने लगी। उन्होंने छात्रों को पढ़ाई पूरी होने तक आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी और कहा कि पढ़ाई के दौरान जल्दबाजी में ऐसे फैसले न लें, जिनका बोझ बाद में परिवार और सरकार दोनों पर पड़े।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आजकल कई छात्र-छात्राएं पढ़ाई के दौरान ही रिश्तों में पड़ जाते हैं और कई मामलों में लड़कियां गर्भवती भी हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पैदा होने वाले बच्चे की जिम्मेदारी अंततः सरकार तक पहुंच जाती है। इसलिए युवाओं को पहले शिक्षा पूरी कर आत्मनिर्भर बनने पर ध्यान देना चाहिए।
लव मैरिज पर भी रखी स्पष्ट राय
राज्यपाल ने साफ किया कि वह प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि दो लोग एक-दूसरे को पसंद करते हैं तो विवाह करना गलत नहीं है, लेकिन शादी का फैसला तभी लेना चाहिए जब दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों।
उन्होंने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह पढ़ाई के लिए बेंगलुरु गया था तो उन्होंने स्वयं कहा था कि यदि कोई लड़की पसंद हो तो बता देना, शादी करवा देंगे। हालांकि, उनके बेटे को कोई पसंद नहीं आया।
62 हजार से ज्यादा छात्रों को मिली डिग्री
AKTU के 24वें दीक्षांत समारोह में कुल 62,537 विद्यार्थियों को डिग्री और 53 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर सभी डिग्रियों को डिजिलॉकर पर भी अपलोड किया गया, जिससे छात्र भविष्य में डिजिटल माध्यम से अपनी डिग्री का उपयोग कर सकें।
गोल्ड मेडल विजेताओं को मंच पर सम्मानित किया गया और उनके अभिभावकों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।

तकनीक के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनिए
अपने संबोधन में राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि केवल आधुनिक तकनीक का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारत को तकनीक विकसित करने वाला देश बनना होगा।
उन्होंने कहा कि यदि तकनीक के कारण हमारी सांस्कृतिक पहचान कमजोर होती है तो यह सही दिशा नहीं है। आधुनिकता और भारतीय परंपरा के बीच संतुलन बनाकर ही वास्तविक विकास संभव है।
उन्होंने दुर्लभ भारतीय पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण की प्रधानमंत्री की पहल का भी उल्लेख किया और छात्रों से अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
स्वदेशी रक्षा तकनीक पर दिया जोर
राज्यपाल ने DRDO और भारतीय रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि दुनिया को रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आज देश में स्वदेशी युद्धपोत, मिसाइल और लड़ाकू विमानों का निर्माण हो रहा है। छात्रों को भी रक्षा तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में योगदान देने का लक्ष्य रखना चाहिए।
विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी
आनंदीबेन पटेल ने अपने निरीक्षण के अनुभव साझा करते हुए कई विश्वविद्यालयों और छात्रावासों की अव्यवस्थित स्थिति पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि कई जगह पुस्तकालय छात्रों से बहुत दूर बनाए गए हैं, जिससे उनका उपयोग ही नहीं हो पाता। कई हॉस्टलों में खिड़कियां नहीं हैं, पानी की टंकियों पर ढक्कन नहीं लगे, बंदर उनमें नहाते हैं और कमरों की डिजाइन भी छात्रों की जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई निर्माण कार्य केवल बजट खर्च करने के उद्देश्य से किए गए प्रतीत होते हैं। निर्माण विभागों को गुणवत्ता और उपयोगिता पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
छात्रावास और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल
राज्यपाल ने कहा कि कई छात्रावासों में बर्तन धोने की व्यवस्था बेहद खराब है। वॉश एरिया बहुत छोटा है और क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड तक छात्रों की पहुंच के अनुरूप नहीं लगाए गए हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि छात्रावासों, मेस, वॉशरूम और अकादमिक भवनों की गुणवत्ता में तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने एक्सपायरी डेट वाले खाद्य पदार्थों की जांच करने और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की भी सलाह दी।
AKTU प्रशासन को दिए सुधार के निर्देश
राज्यपाल ने AKTU के प्रशासनिक भवन के निरीक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वॉशरूम की सफाई बेहतर होनी चाहिए और कई भवनों का उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन भवनों का उपयोग छात्रों के हित में किया जाए और नए हॉस्टलों में आधुनिक रसोई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं।
निष्कर्ष
AKTU के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का संबोधन केवल डिग्री वितरण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने छात्रों के व्यक्तिगत जीवन, शिक्षा, आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार, स्वदेशी रक्षा, विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक सुधारों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनका संदेश स्पष्ट था कि युवाओं को पहले शिक्षा और करियर पर ध्यान देना चाहिए, आत्मनिर्भर बनने के बाद ही जीवन के बड़े निर्णय लेने चाहिए।

