लखीसराय। बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी के मौके पर बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। सोमवार सुबह मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर के बाहरी परिसर और आने-जाने वाले मार्ग के आसपास अचानक अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
शुरुआती जानकारी में पांच श्रद्धालुओं की मौत और आठ से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है, जबकि 12 से अधिक श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी है। घायलों को उपचार के लिए लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बिजली के तार की खबर के बाद मची अफरा-तफरी
बताया जा रहा है कि हादसे से पहले मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते के आसपास बिजली का तार गिरने की सूचना सामने आई थी। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच करंट फैलने की बात तेजी से फैल गई। भारी भीड़ के बीच यह खबर फैलते ही लोग घबराकर इधर-उधर जाने लगे।
अचानक बढ़ी अफरा-तफरी के कारण लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई श्रद्धालु गिर पड़े, जिसके बाद उनके ऊपर से दूसरे लोग निकलने की कोशिश में स्थिति और गंभीर हो गई।
हालांकि, हादसे की सटीक वजह और बिजली के तार में वास्तव में करंट था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। शुरुआती रिपोर्टों में अफवाह और अचानक फैली घबराहट को भगदड़ से जोड़कर देखा जा रहा है।
सावन सोमवार के कारण उमड़ी थी भारी भीड़
17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण अशोकधाम मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कतार में लगे थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के समय करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के मंदिर क्षेत्र में मौजूद होने की बात सामने आई है।
अशोकधाम लखीसराय का प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां भगवान शिव को समर्पित इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

चीख-पुकार के बीच शुरू हुआ राहत कार्य
भगदड़ के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने जमीन पर गिरे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल टीमें घटनास्थल की ओर रवाना हुईं।
घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। लखीसराय सदर अस्पताल में घायलों का इलाज शुरू किया गया है। प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और राहत-बचाव कार्य को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका पर नजर
हादसे के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। शुरुआती घंटों में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। ऐसे में अंतिम और आधिकारिक आंकड़ा जांच एवं अस्पताल से मिलने वाली जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगा।
मंदिर में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि भगदड़ की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं।
प्रशासन की निगरानी में आगे की कार्रवाई
फिलहाल प्राथमिकता घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की है। प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल और अस्पताल की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। हादसे के बाद मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
यह हादसा एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्था की अहमियत को सामने लाता है। खासकर ऐसे पर्वों पर जब हजारों श्रद्धालु एक साथ किसी धार्मिक स्थल पर पहुंचते हैं, तो सुरक्षित प्रवेश-निकास और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण बेहद जरूरी हो जाता है।
निष्कर्ष:
लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में सावन सोमवार के दिन हुई भगदड़ ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। बाद की रिपोर्टों में 7 श्रद्धालुओं की मौत और 12 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे की परिस्थितियों और वास्तविक कारणों की जांच जारी है।

