लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (Regional Meteorological Centre) की स्थापना के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में आए बड़े बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज प्रदेश तकनीक और अर्ली वार्निंग सिस्टम की बदौलत आपदाओं से लड़ने में पहले से कहीं अधिक सक्षम हो चुका है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर लोग भरोसा नहीं करते थे।
उन्होंने कहा, “12 साल पहले मौसम विभाग जो कहता था, अक्सर उसका उल्टा होता था। अगर बारिश की संभावना बताई जाती थी तो बारिश नहीं होती थी। लेकिन आज तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि लोगों के मोबाइल पर तीन घंटे पहले मौसम का अलर्ट पहुंच जाता है।”
13 मई की आपदा का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी ने हाल ही में 13 मई को प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए बताया कि इस दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी।
उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर सावधानी नहीं बरती गई थी। यदि चेतावनी मिलने के बाद लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाते तो नुकसान काफी कम हो सकता था।

अर्ली वार्निंग सिस्टम ने बचाईं हजारों जानें
सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में अर्ली वार्निंग सिस्टम को काफी मजबूत किया गया है। उन्होंने सहारनपुर की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि मंदिर में कीर्तन के दौरान मौसम विभाग का अलर्ट मिला, जिसके बाद लोगों को वहां से हटाया गया।
हालांकि दो महिलाओं की जान चली गई, लेकिन दर्जनों लोगों की जान बचाने में यह सिस्टम सफल रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जैसे जिलों में हर वर्ष 100 से 150 लोगों की मौत बिजली गिरने और मौसम संबंधी आपदाओं के कारण होती थी। अब यह संख्या घटकर दर्जनों तक सीमित रह गई है।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम संबंधी सटीक जानकारी किसानों के लिए बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 21 प्रतिशत योगदान देता है।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम चक्र के कारण कृषि पर खतरा बढ़ रहा है। मौसम का समय लगभग एक महीने पीछे-आगे हो चुका है। यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में खाद्यान्न संकट भी पैदा हो सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार किसानों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाने पर विशेष जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना का विस्तार
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना का दायरा बढ़ाया है। अब केवल किसान ही नहीं बल्कि बंटाईदार और उनके परिवार के सदस्य भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली मौतों और दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है।
लखनऊ बनेगा मौसम निगरानी का नया केंद्र
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि लखनऊ का मौसम विज्ञान केंद्र अब क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
यह केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मौसम की निगरानी करेगा। इसके लिए भविष्य में लगभग 40 से 50 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में आधुनिक मुख्यालय और नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में तीन आधुनिक डॉप्लर वेदर रडार काम कर रहे हैं जबकि छह नए रडार लगाए जा रहे हैं। प्रयागराज, बरेली और देवरिया में इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
तकनीक से बदलेगा मौसम पूर्वानुमान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले पूरे देश में केवल 17 वेदर रडार थे, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है और अगले दो वर्षों में यह संख्या 100 तक पहुंच जाएगी।
उन्होंने कहा कि अब लोगों को यह भी पता चल जाएगा कि अगले तीन घंटे में मौसम कैसा रहेगा और उन्हें घर से निकलते समय छाता साथ ले जाना चाहिए या नहीं।
आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई ताकत
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना के बाद उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि, विमानन और पर्यटन से जुड़ी सेवाएं अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र भविष्य में मौसम संबंधी आपदाओं के दौरान जनहानि और आर्थिक नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष:
लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में आए बदलावों को रेखांकित किया, वहीं केंद्र सरकार ने भी आधुनिक तकनीक के जरिए मौसम चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाने का भरोसा दिलाया। आने वाले समय में यह केंद्र किसानों, आम नागरिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

