माता वैष्णो देवी: के दर्शन के लिए जाने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने बहुप्रतीक्षित दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे यानी एनई-5 (NE-5) हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से कटरा तक की सड़क यात्रा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान, तेज और आरामदायक हो जाएगी।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत अधिसूचना जारी कर इस एक्सप्रेसवे को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल कर लिया है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली को हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से जोड़ते हुए सीधे कटरा तक पहुंचेगा।
अब कम समय में होगा माता के दरबार का सफर
फिलहाल दिल्ली से कटरा तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 12 से 14 घंटे का समय लगता है। लेकिन नए हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर करीब 8 घंटे में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि सरकार ने अभी आधिकारिक तौर पर यात्रा समय की पुष्टि नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
इससे न केवल वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, बल्कि उत्तर भारत में धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
कहां से शुरू होगा एक्सप्रेसवे?
अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे दिल्ली के रानी खेड़ा गांव के पास NH-344M से शुरू होगा। इसके बाद यह हरियाणा में जसौर खेड़ी गांव के पास कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
इसके बाद यह कॉरिडोर हरियाणा और पंजाब के कई महत्वपूर्ण शहरों और इलाकों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर के कटरा तक पहुंचेगा।

हरियाणा और पंजाब को होगा सबसे बड़ा फायदा
यह एक्सप्रेसवे हरियाणा और पंजाब के कई शहरों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। हरियाणा में यह परियोजना खरखौदा, गोहाना, बुटाना, कलायत और बार्टा जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।
वहीं पंजाब में यह कॉरिडोर गुलज़ापुर, पटरान, भवानीगढ़, धुरी, मलेरकोटला, अहमदगढ़, मुल्लांपुर दाखा, नूरमहल, कंगसाबू, करतारपुर, गुरदासपुर बाईपास और बलसुआ जैसे क्षेत्रों को जोड़ते हुए आगे बढ़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे इन इलाकों में व्यापार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा।
व्यापार और उद्योग को भी मिलेगा बूस्ट
दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे केवल धार्मिक पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।
एक्सप्रेसवे बनने से माल ढुलाई तेज होगी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी। छोटे शहरों और कस्बों में नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। सड़क किनारे होटल, ढाबे, लॉजिस्टिक्स पार्क और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक कॉरिडोर साबित हो सकती है।
निर्माण कार्य से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में इंजीनियर, मजदूर, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी।
इसके अलावा एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित होने वाले नए व्यावसायिक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
वैष्णो देवी मंदिर देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे बनने के बाद सड़क यात्रा ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक होगी, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। इससे जम्मू-कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर विजन
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना केंद्र सरकार के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विजन का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे और आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी वैष्णो देवी श्रद्धालुओं और उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी है। इस परियोजना से यात्रा आसान होने के साथ-साथ व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की तस्वीर बदलने वाले बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गिना जा सकता है।


