पश्चिम बंगाल: की फालता विधानसभा सीट पर गुरुवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा मतदान कराया गया। दोपहर 1 बजे तक करीब 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग ने इस बार कुल 285 पोलिंग बूथ बनाए हैं, जहां शाम 6 बजे तक वोटिंग जारी रहेगी। फालता सीट पर 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान EVM में कथित गड़बड़ी और भाजपा के चुनाव चिन्ह पर टेप लगाए जाने के आरोपों के बाद आयोग ने रीपोलिंग का आदेश दिया था।
फालता में दोबारा मतदान को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के मद्देनजर इस बार हर बूथ पर जवानों की संख्या दोगुनी कर दी है। जहां पहले चार सुरक्षाकर्मी तैनात होते थे, वहीं अब प्रत्येक बूथ पर आठ जवान तैनात किए गए हैं। मतदान केंद्रों के बाहर केंद्रीय बलों की भारी मौजूदगी देखी गई।
फालता विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच माना जा रहा है। हालांकि इस चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक ट्विस्ट तब आया जब TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने मौखिक रूप से चुनाव लड़ने से पीछे हटने का ऐलान कर दिया। बावजूद इसके उनका नाम और चुनाव चिन्ह अब भी EVM में मौजूद है, क्योंकि नाम वापस लेने की आधिकारिक समय सीमा समाप्त हो चुकी है।
29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद फालता में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा ने आरोप लगाया कि कई बूथों पर EVM में उनके चुनाव चिन्ह को टेप लगाकर ब्लॉक किया गया था। इसके अलावा वेब कैमरों की फुटेज के साथ छेड़छाड़ की शिकायतें भी सामने आई थीं। चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी, जिसमें कई बूथों पर अनियमितताओं के संकेत मिले।
सूत्रों के मुताबिक कम से कम 60 बूथों में EVM से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच की गई। इसके बाद चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बनाए रखने और मतदाताओं का विश्वास बहाल करने के लिए दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया।

फालता सीट का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। यह इलाका कभी CPI(M) का गढ़ माना जाता था, लेकिन 2011 के बाद से यहां लगातार TMC का कब्जा रहा है। बीजेपी अब तक इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण 24 परगना जिले में भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ा है।
दक्षिण 24 परगना जिले की कुल 31 सीटों में भाजपा ने पिछले चुनावों में 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। फालता इसी जिले के अंतर्गत आता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फालता की रीपोलिंग केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीति का संकेत भी बन चुकी है।
इस बार फालता में कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं। लेकिन TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव से पीछे हटने की घोषणा ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जहांगीर खान ने लिखित रूप से नाम वापस नहीं लिया और चुनाव आयोग ने उनकी उम्मीदवारी रद्द नहीं की, तो EVM पर उनके नाम पर पड़े वोट वैध माने जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी दुबे के अनुसार, इस पूरे मामले में अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना होगा। यदि आयोग मौखिक बयान को पर्याप्त नहीं मानता, तो ज्यादा वोट मिलने पर जहांगीर खान जीत का दावा भी कर सकते हैं। यही कारण है कि फालता का चुनाव अब कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम बन गया है।
मतदान के दौरान महिलाओं और बुजुर्ग मतदाताओं की लंबी कतारें भी देखने को मिलीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार लोग शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। कई मतदाताओं ने कहा कि EVM विवाद के बाद चुनाव आयोग की सख्ती जरूरी थी।
अब सबकी निगाहें 24 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव केवल एक सीट का मामला नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती सियासत का संकेत माना जा रहा है। भाजपा इसे TMC के खिलाफ जनता के गुस्से के रूप में पेश कर रही है, जबकि TMC इसे विपक्ष की रणनीति बता रही है।
निष्कर्ष:
फालता में रीपोलिंग ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को फिर से गरमा दिया है। EVM विवाद, TMC उम्मीदवार का पीछे हटना और भारी सुरक्षा के बीच हो रही वोटिंग ने इस चुनाव को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब देखना होगा कि 24 मई को आने वाले नतीजे बंगाल की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

