LRN24LRN24
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राजनीति
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
Reading: यूरिया संकट के बीच भारत-रूस की बड़ी डील! 20 हजार करोड़ का प्लांट, मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी
Share
LRN24LRN24
Font ResizerAa
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राजनीति
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
Search News
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राजनीति
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
Follow US
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
© LRN24 News Network

Home - व्यापार - यूरिया संकट के बीच भारत-रूस की बड़ी डील! 20 हजार करोड़ का प्लांट, मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी

यूरिया संकट के बीच भारत-रूस की बड़ी डील! 20 हजार करोड़ का प्लांट, मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी

Rajat Kumar
Last updated: 2026/04/28 at 10:56 PM
Rajat Kumar
Share
3 Min Read
SHARE

वैश्विक तनाव: और सप्लाई चेन में बाधाओं के बीच भारत ने उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत और रूस मिलकर एक बड़े यूरिया उत्पादन संयंत्र की स्थापना कर रहे हैं, जिससे देश की आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम करने की उम्मीद है।

Contents
तीन भारतीय कंपनियां निभाएंगी अहम भूमिकाक्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता कम करने की रणनीतिरूस में ही क्यों लग रहा प्लांट?कब शुरू होगा उत्पादन?खेती और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा

यह संयुक्त परियोजना रूस के समारा में स्थापित की जाएगी और अगले दो वर्षों में इसके शुरू होने की संभावना है। लगभग 20 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता वाले इस प्लांट में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

तीन भारतीय कंपनियां निभाएंगी अहम भूमिका

इस प्रोजेक्ट में भारत की तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां—इंडियन पोटाश लिमिटेड, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड—साझेदार होंगी। ये कंपनियां मिलकर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी, जबकि बाकी राशि रूस की प्रमुख केमिकल कंपनी यूरालकेम ग्रुप द्वारा लगाई जाएगी।

तकनीकी सहयोग के लिए प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है, जिसने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है।

क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि प्रधान देशों में से एक है और यहां यूरिया की भारी मांग रहती है। वर्तमान में देश अपनी जरूरत का लगभग 71% यूरिया मिडिल-ईस्ट देशों से आयात करता है। हर साल लगभग 400 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 300 लाख मीट्रिक टन ही है। इस अंतर को पूरा करने के लिए भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

साल 2025 में ही भारत ने यूरिया आयात पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए। ऐसे में यह नया प्लांट भारत के लिए एक स्थायी और सुरक्षित आपूर्ति स्रोत बन सकता है।

मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता कम करने की रणनीति

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक हालातों के कारण यूरिया सप्लाई प्रभावित हुई है। ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जैसे अहम समुद्री मार्ग पर जोखिम बढ़ने से भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू की।

सरकार ने 2026 के लिए 25 लाख टन यूरिया आयात को मंजूरी दी है, जिसे अल्जीरिया, नाइजीरिया, ओमान और रूस जैसे देशों से मंगाया जा रहा है। इस नई फैक्ट्री के जरिए भारत भविष्य में ऐसे संकटों से काफी हद तक सुरक्षित रह सकेगा।

रूस में ही क्यों लग रहा प्लांट?

यूरिया उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल नेचुरल गैस होता है, जो भारत में सीमित मात्रा में उपलब्ध है और इसे आयात करना महंगा पड़ता है। वहीं रूस दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में शामिल है, जहां यह संसाधन आसानी से और सस्ते में उपलब्ध है।

इसके अलावा, रूस के पास उर्वरक उत्पादन का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विशेषज्ञता भी मौजूद है। यही कारण है कि वहां प्लांट स्थापित करना लागत के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है।

कब शुरू होगा उत्पादन?

इस प्रोजेक्ट की नींव दिसंबर 2025 में रखी गई थी, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पुतिन की मौजूदगी में इस परियोजना को लेकर समझौता (MoU) साइन किया गया था।

अब प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में यह प्लांट उत्पादन शुरू कर देगा।

खेती और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा

यूरिया नाइट्रोजन आधारित उर्वरक है, जो फसलों की वृद्धि के लिए बेहद जरूरी होता है। गेहूं, चावल और मक्का जैसी प्रमुख फसलों में इसके उपयोग से उत्पादन 20% से 50% तक बढ़ सकता है। ऐसे में इस प्लांट से न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।

TAGGED: Agriculture India, Economy News, Fertilizer News, Import Export, India Russia Deal, Russia India Relations, Urea Crisis, Urea Plant
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Joy0
Dead0
Wink0
Rajat Kumar
By Rajat Kumar
Follow:
Lrn24 News Editor
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisments

आपकी राय

सोने-चांदी के दामों में गिरावट का एक मुख्य कारण क्या बताया गया है?
  • Add your answer

क्रिकेट लाइव

Live Cricket Scores

ज्योतिष

आज का मौसम

Widget weather

सोने की कीमत

You Might Also Like

शिक्षादिल्लीराजनीतिराष्ट्रीयवायरल न्यूज़

“NEET पेपर लीक पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ या जिम्मेदारी लो”

3 hours ago
‘भूगोल में रहना है या इतिहास बनना है?’ पाकिस्तान को सेना प्रमुख की चेतावनी
राजनीतिअंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयवायरल न्यूज़

‘भूगोल में रहना है या इतिहास बनना है?’ सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी की पाकिस्तान को सीधी चेतावनी

2 hours ago
राजनीतिउत्तर प्रदेशराज्यलखनऊवायरल न्यूज़

योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी में लागू होगा 2 दिन Work From Home मॉडल

2 hours ago
वायरल न्यूज़दिल्लीराजनीतिराज्य

‘मुझे भारतीय युवाओं पर गर्व है’: CJI सूर्यकांत ने ‘कॉकरोच’ विवाद पर दी सफाई

1 hour ago
Follow US
© 2026 LRN24 News Network. All Rights Reserved.
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy

WhatsApp us

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?