तेहरान/नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब पूरी दुनिया के सामने एक नई चिंता खड़ी कर दी है। अब तक इस संघर्ष का असर तेल की कीमतों, व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन पर दिखाई दे रहा था, लेकिन अब इंटरनेट सेवाओं पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी के एक बयान ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान “इंटरनेट केबल पर शुल्क” लगा सकता है। यानी समुद्र के नीचे बिछी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबल्स के इस्तेमाल के लिए कंपनियों से पैसे वसूले जा सकते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर वैश्विक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
आखिर क्या है इंटरनेट केबल का मामला?
दुनिया में इंटरनेट सिर्फ सैटेलाइट से नहीं चलता। असल में ग्लोबल इंटरनेट का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए काम करता है। इन्हें अंडरसी इंटरनेट केबल कहा जाता है।
ये केबल एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका को आपस में जोड़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक, बैंकिंग सिस्टम, सोशल मीडिया, क्लाउड सर्वर और वीडियो स्ट्रीमिंग तक सब कुछ इन्हीं केबल्स के भरोसे चलता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया के लगभग 95% अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा का ट्रांसफर अंडरसी केबल्स से होता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ तेल व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए भी बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
यहां से कई बड़ी इंटरनेट केबल्स गुजरती हैं, जो एशिया को यूरोप और अफ्रीका से जोड़ती हैं। अगर इस क्षेत्र में किसी तरह की सैन्य कार्रवाई, तकनीकी बाधा या प्रतिबंध लगता है, तो दुनिया के कई देशों में इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टीम की रिपोर्ट के मुताबिक इस इलाके के नीचे इंटरनेट केबल्स का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है।
क्या भारत पर पड़ेगा असर?
भारत भी इस वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। अगर होर्मुज क्षेत्र में इंटरनेट केबल्स पर असर पड़ता है, तो भारत में इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि असर कई तरह से दिख सकता है:
- इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है
- इंटरनेशनल वेबसाइट्स की एक्सेस प्रभावित हो सकती है
- क्लाउड सर्विसेज में दिक्कत आ सकती है
- बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है
- वीडियो कॉलिंग और स्ट्रीमिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं
हालांकि भारत के पास कई वैकल्पिक रूट और नेटवर्क सिस्टम मौजूद हैं, इसलिए पूरी तरह इंटरनेट बंद होने जैसी स्थिति की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

क्या इंटरनेट भी बन सकता है हथियार?
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर भी युद्ध और दबाव की रणनीति का हिस्सा बन सकता है।
जैसे तेल और गैस सप्लाई पर नियंत्रण से आर्थिक दबाव बनाया जाता है, वैसे ही इंटरनेट नेटवर्क और डेटा ट्रैफिक पर नियंत्रण भी भू-राजनीतिक हथियार बन सकता है।
हाल के वर्षों में कई देशों ने साइबर वॉरफेयर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाया है। ऐसे में इंटरनेट केबल्स को लेकर ईरान का बयान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
तेल संकट के साथ डिजिटल चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव पहले ही वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ रही है।
अब अगर इंटरनेट नेटवर्क भी प्रभावित होता है, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और ऑफिस वर्क तक प्रभावित हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चिंता
ईरान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #InternetShutdown और #HormuzCrisis जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने इसे “डिजिटल वॉर” की शुरुआत बताया।
हालांकि अभी तक ईरान की ओर से इंटरनेट केबल्स पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध लागू नहीं किया गया है, लेकिन इस बयान ने दुनिया की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
निष्कर्ष:
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ सैन्य या तेल संकट तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित असर ने दुनिया को नई चिंता में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंडरसी केबल्स वैश्विक इंटरनेट की रीढ़ मानी जाती हैं। ऐसे में अगर वहां कोई बड़ा संकट पैदा होता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।

