मध्य पूर्व: में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। बुधवार को इजराइल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 254 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1,165 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के महीनों में सबसे घातक माना जा रहा है।
हमले मुख्य रूप से बेरूत, बेक्का वैली, माउंट लेबनान, सैदोन और दक्षिणी लेबनान के कई गांवों में किए गए। राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्सों में भारी तबाही देखी गई, जहां कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हमलों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि लगातार विस्फोटों से पूरा इलाका दहल उठा।
इजराइली सेना का कहना है कि इन हमलों का निशाना हिजबुल्लाह के ठिकाने थे। सेना के मुताबिक 100 से ज्यादा कमांड सेंटर, हथियार भंडार और लॉन्चिंग साइट्स को नष्ट किया गया। इजराइल ने दावा किया कि यह कार्रवाई उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी थी और इसे 2 मार्च से चल रहे सैन्य अभियान का हिस्सा बताया गया।
इस हमले के बाद लेबनान सरकार ने देशभर में राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन मलबे में फंसे लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका है, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा की गई थी। हालांकि, इस समझौते को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है। वहीं, अमेरिका के नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए कहा कि समझौता सीमित दायरे में है।
इसके उलट, ईरान का कहना है कि अगर सीजफायर लागू है, तो लेबनान में हमले बंद होने चाहिए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि “सीजफायर और युद्ध साथ-साथ नहीं चल सकते।” उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ शांति की बात करता है और दूसरी तरफ इजराइल के जरिए हमले जारी रखता है।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने पहले ही तीन प्रमुख शर्तें तोड़ दी हैं, जिससे बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह गया है।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। स्पेन ने तेहरान में अपना दूतावास फिर से खोलने का फैसला किया है, ताकि शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाई जा सके। वहीं, ब्रिटेन ने मांग की है कि सीजफायर को लेबनान तक भी बढ़ाया जाए।
तनाव केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर प्रति बैरल 1 डॉलर का शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है।
उधर भारत के लिए राहत की खबर यह है कि होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाज सुरक्षित पहुंच रहे हैं और देश में LPG व पेट्रोल की सप्लाई सामान्य बनी हुई है।
मध्य पूर्व में बढ़ता यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि इसमें वैश्विक शक्तियों की सीधी भागीदारी के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या हालात और बिगड़ते हैं।
निष्कर्ष
लेबनान पर इजराइली हमलों ने न केवल मानवीय संकट को गहरा किया है, बल्कि सीजफायर की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी से यह साफ है कि स्थिति अभी स्थिर होने से काफी दूर है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।

