केतन अग्रवाल हत्याकांड: दूसरे मोबाइल ने खोले ऐसे राज, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया
पुणे: के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच अब ऐसे डिजिटल सबूतों तक पहुंच चुकी है, जिन्होंने इस पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। मुख्य आरोपी सिया गोयल के घर से बरामद दूसरे मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच के मुताबिक हत्या से पहले सिया इंटरनेट पर चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ी खबरें लगातार पढ़ रही थी। इसके अलावा उसने पुलिस हिरासत से जुड़े सवाल भी सर्च किए थे, जिससे जांच एजेंसियों को यह संदेह हुआ कि वह वारदात से पहले ही संभावित कानूनी कार्रवाई को लेकर सोच रही थी।
पुलिस का दावा है कि यह हत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि करीब 19 दिनों तक योजनाबद्ध तरीके से रची गई साजिश का परिणाम थी।
दूसरे मोबाइल से खुला डिजिटल सबूतों का पिटारा
जांच के दौरान पुलिस जब सिया को उसके घर लेकर गई, तब उसके बेडरूम से एक दूसरा मोबाइल फोन बरामद हुआ। यही मोबाइल इस केस का सबसे अहम सबूत बन गया।
फॉरेंसिक जांच में सामने आया कि इस फोन में इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, चैट रिकॉर्ड और कई अन्य डिजिटल जानकारियां मौजूद थीं, जिन्हें छिपाने की कोशिश की गई थी। पुलिस के अनुसार, इन्हीं डिजिटल सबूतों ने हत्या की साजिश को जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।
राजा रघुवंशी केस क्यों पढ़ रही थी सिया?
जांच अधिकारियों के मुताबिक सिया लगातार इंटरनेट पर राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ी खबरें पढ़ रही थी।
राजा रघुवंशी की मौत जून 2025 में मेघालय की एक गहरी खाई में हुई थी। उस मामले में उनकी पत्नी पर प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा था।
पुलिस को आशंका है कि सिया इस चर्चित मामले के घटनाक्रम और जांच प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रही थी ताकि अपनी योजना उसी तरह अंजाम दे सके। हालांकि, पुलिस अभी इस पहलू की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।

महिलाओं की पुलिस कस्टडी पर भी किया था इंटरनेट सर्च
जांच में यह भी सामने आया कि सिया ने इंटरनेट पर यह सवाल भी खोजा था—
“क्या पुलिस कस्टडी में महिलाओं को भी पीटा जाता है?”
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सर्च यह संकेत देता है कि वह संभावित गिरफ्तारी और पूछताछ को लेकर पहले से मानसिक रूप से तैयारी कर रही थी।
कोड वर्ड से होती थी बातचीत
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सिया का कथित प्रेमी चेतन चौधरी एक ही मोबाइल में दो अलग-अलग नंबरों का इस्तेमाल करता था।
दोनों आरोपी बातचीत के दौरान कई कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे ताकि किसी तीसरे व्यक्ति को उनकी बातचीत पर संदेह न हो। पुलिस अब इन कोड शब्दों का विश्लेषण कर रही है।
हत्या के बाद भी सामान्य रही सिया
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हत्या के अगले ही दिन सिया सीधे केतन के घर पहुंच गई।
उसने केतन के परिवार को सांत्वना दी और कहा—
“केतन ऊपर से हमें देख रहा है। कृपया हिम्मत रखिए।”
पुलिस के अनुसार, 18 जून से गिरफ्तारी तक दोनों आरोपी सामान्य जीवन जीते रहे। जांच एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती पूछताछ के दौरान भी दोनों के व्यवहार में घबराहट या पछतावे के स्पष्ट संकेत नहीं मिले।
19 दिनों तक कैसे रची गई हत्या की पूरी साजिश?
पुलिस जांच के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार सामने आया है—
31 मई:
सिया और केतन लोहगढ़ किला घूमने गए। यहीं सिया के मन में कथित रूप से हत्या की योजना बनी।
पासपोर्ट छिपाया गया:
दोनों का बाली (इंडोनेशिया) जाने का कार्यक्रम था, लेकिन जांच के अनुसार सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा दिया ताकि विदेश यात्रा रद्द हो जाए।
14 जून:
पुलिस के अनुसार पहली बार कथित हत्या का प्रयास किया गया। केतन खाई में गिरने से बच गया। सिया ने घटना को सांप दिखने का बहाना बताकर टाल दिया।
18 जून:
प्री-वेडिंग फोटोशूट के बहाने केतन को दोबारा लोहगढ़ किले ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक वहां पहले से मौजूद चेतन चौधरी के साथ मिलकर उसे लगभग 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
डिजिटल साक्ष्य मजबूत कर रहे हैं केस
पुणे पुलिस अब मोबाइल डेटा, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, लोकेशन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, चश्मदीदों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर चार्जशीट तैयार करने में जुटी है।
दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि सभी तकनीकी साक्ष्यों को अदालत में पेश किया जाएगा ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई हो सके।
निष्कर्ष
केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में सामने आए डिजिटल सबूतों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। दूसरे मोबाइल से मिली इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, कथित कोड वर्ड और घटनाओं का क्रम पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, मामले से जुड़े कई आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम सत्य अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

