उत्तर प्रदेश: की राजधानी लखनऊ में अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम उस वक्त हिंसक झड़प में बदल गया, जब माल्यार्पण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। मामला बंथरा नगर पंचायत क्षेत्र के शिवपुरा स्थित अंबेडकर नगर का है, जहां विवाद इतना बढ़ा कि ईंट-पत्थर, लाठी-डंडे और यहां तक कि फायरिंग तक की नौबत आ गई।
जानकारी के मुताबिक, हर साल की तरह इस बार भी अंबेडकर जयंती के मौके पर स्थानीय लोगों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण से पहले बुद्ध प्रार्थना की परंपरा का पालन किया जाता है। इसी बीच नगर पंचायत चेयरमैन रामावती रावत के बेटे रंजीत रावत को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।
बताया जा रहा है कि रंजीत रावत अपने समर्थकों के साथ चार लग्जरी गाड़ियों में मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने वहां पहुंचते ही बिना निर्धारित प्रक्रिया के सीधे माल्यार्पण कर दिया। इससे आयोजकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले बुद्ध वंदना होनी थी, उसके बाद माल्यार्पण किया जाना था। इस पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गाली-गलौज और फिर हिंसा में बदल गई।
देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे, सरिया और ईंट-पत्थर चले। कुछ उपद्रवियों ने वाहनों में तोड़फोड़ भी की। घटनास्थल पर दो राउंड फायरिंग होने की भी बात सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

घटना में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें करन गौतम, विशाल गौतम और सरवन नाम के युवकों की पहचान हुई है। घायलों को इलाज के लिए सरोजनीनगर सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब एक पक्ष के लोग शिकायत करने बंथरा थाने पहुंचे। आरोप है कि वहां भी दूसरे पक्ष के लोग पहुंच गए और थाने परिसर में ही मारपीट करने की कोशिश की गई। इस दौरान धक्का-मुक्की में थाने के कार्यालय का शीशा भी टूट गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। एडीसीपी दक्षिणी और एसीपी कृष्णानगर मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को काबू में किया। पुलिस ने चेयरमैन के बेटे रंजीत रावत समेत 6 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फायरिंग की पुष्टि तो हुई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोली किस पक्ष की ओर से चलाई गई। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी को गोली नहीं लगी।
डीसीपी साउथ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इलाके में फिलहाल पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में बढ़ती राजनीतिक दखल और आपसी विवाद किस तरह कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।
निष्कर्ष:
लखनऊ में अंबेडकर जयंती के दौरान हुआ यह बवाल बताता है कि छोटी-सी असहमति भी किस तरह बड़े हिंसक संघर्ष में बदल सकती है। पुलिस की सक्रियता से हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।

