पश्चिम बंगाल: की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने का संदेश देते हुए साफ कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर जाना चाहते हैं, वे पूरी तरह आजाद हैं।
ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक मजबूत आंदोलन से निकली पार्टी है और इसे फिर से जमीनी स्तर पर खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी दफ्तरों को दोबारा खोला जाएगा, उन्हें रंगा जाएगा और कार्यकर्ताओं को फिर से जनता के बीच सक्रिय किया जाएगा। ममता ने भावुक अंदाज में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे खुद पार्टी कार्यालयों को पेंट करने के लिए तैयार हैं।
बैठक के दौरान ममता के भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए बुलाई गई थी।
ममता बनर्जी ने चुनाव नतीजों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में TMC को केवल 80 सीटें मिलीं, लेकिन यह असली जनादेश नहीं है। उनके मुताबिक जनता का जनादेश “लूटा गया” है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे पार्टी का हौसला टूटने वाला नहीं है।

दरअसल, हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा ने 207 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि TMC को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। चुनाव के बाद से TMC लगातार EVM और वोटर लिस्ट को लेकर सवाल उठा रही है।
बैठक में फालता विधानसभा सीट के उपचुनाव के उम्मीदवार भी मौजूद थे। फालता सीट पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन बाद में EVM में कथित गड़बड़ी और छेड़छाड़ के आरोपों के चलते चुनाव आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। अब वहां 21 मई को पुनर्मतदान होना है।
राजनीतिक माहौल तब और गर्म हो गया जब TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी ने दावा किया कि 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। TMC का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुए।
सुप्रीम Court में सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि यदि जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो प्रभावित पक्ष नई याचिकाएं दाखिल कर सकता है। इस टिप्पणी के बाद TMC को कानूनी लड़ाई में कुछ उम्मीद जरूर मिली है।
TMC सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में कहा कि कई सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही।
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया और TMC अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है।
चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में 30 हजार से कम अंतर से जीत वाली 176 सीटों में भाजपा ने 128 सीटें जीतीं। वहीं TMC को ऐसी 44 सीटें मिलीं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम मार्जिन वाली सीटें आने वाले समय में कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन सकती हैं।
ममता बनर्जी का “जो जाना चाहता है, चला जाए” वाला बयान भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इसे पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की आवाजों और संभावित टूट को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है। हालांकि ममता ने कार्यकर्ताओं से साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस संघर्ष से बनी पार्टी है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प हो सकती है। एक तरफ भाजपा अपनी बड़ी जीत को मजबूत करने में जुटी है, तो दूसरी तरफ TMC संगठन को दोबारा खड़ा करने और कानूनी लड़ाई के जरिए राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
ममता बनर्जी का यह बयान साफ संकेत देता है कि TMC अब संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के भीतर असंतोष और चुनावी विवादों के बीच ममता ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया है। आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और ज्यादा गर्माने की संभावना है।

