Mohali News: बंदी सिख कैदियों की रिहाई को लेकर प्रदर्शन, पुलिस ने किया बल प्रयोग
मोहाली। पंजाब के मोहाली में स्वतंत्रता दिवस के दिन बंदी सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर चल रहे कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।
कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई बंदी लंबे समय से सजा पूरी करने या लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद जेलों में बंद हैं। उनका दावा है कि इनमें कई कैदी बुजुर्ग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और मानवीय आधार पर उनकी रिहाई या पैरोल पर विचार किया जाना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर बढ़ा प्रदर्शन का दबाव
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति उस समय तनावपूर्ण हुई, जब भीड़ को नियंत्रित करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस का उद्देश्य प्रदर्शन को नियंत्रित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है। वहीं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर दे रहे हैं।
क्या है कौमी इंसाफ मोर्चा की मांग?
कौमी इंसाफ मोर्चा की प्रमुख मांग जेलों में लंबे समय से बंद सिख कैदियों की रिहाई या उन्हें पैरोल दिए जाने से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कुछ कैदी लंबे समय से जेलों में हैं और उम्र बढ़ने के साथ उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं।
मोर्चे से जुड़े लोगों का तर्क है कि जिन कैदियों ने अपनी निर्धारित सजा पूरी कर ली है या जिनके मामलों में रिहाई पर कानूनी रूप से विचार संभव है, उनके मामलों की मानवीय दृष्टिकोण से समीक्षा की जानी चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर पंजाब में लंबे समय से आंदोलन और राजनीतिक बहस होती रही है। मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर कौमी इंसाफ मोर्चा का धरना भी लंबे समय से चर्चा में रहा है।

कौन हैं ‘बंदी सिंह’?
‘बंदी सिंह’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर उन सिख कैदियों के लिए किया जाता है जो पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद/मिलिटेंसी के दौर में गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए और लंबे समय से जेल में बंद हैं।
इनमें कुछ कैदी हत्या और बम विस्फोट जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए हैं। यही वजह है कि उनकी रिहाई का मुद्दा कानूनी, राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के कारण संवेदनशील माना जाता है।
सिख संगठनों और कुछ राजनीतिक समूहों का कहना है कि लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के मामलों की उम्र, स्वास्थ्य और सजा की अवधि जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समीक्षा होनी चाहिए।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का क्या पक्ष है?
दूसरी ओर, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का रुख यह रहा है कि गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदियों की रिहाई के मामले में कानून और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
ऐसे मामलों में केवल राजनीतिक या भावनात्मक आधार पर फैसला लेने के बजाय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और प्रत्येक कैदी के मामले की परिस्थितियों की समीक्षा महत्वपूर्ण होती है।
यही कारण है कि बंदी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा लंबे समय से पंजाब की राजनीति और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है।
कई साल से जारी है आंदोलन
कौमी इंसाफ मोर्चा का आंदोलन 2023 से मोहाली-चंडीगढ़ सीमा के आसपास चर्चा में रहा है। मोर्चे की ओर से समय-समय पर प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से जेलों में बंद कैदियों के मामलों की निष्पक्ष और मानवीय समीक्षा भी जरूरी है।
वहीं, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रहती है। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की।
आगे क्या होगा?
मोहाली में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद बंदी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रदर्शनकारी आगे किस रणनीति के साथ आंदोलन बढ़ाते हैं और सरकार की ओर से इस मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।
फिलहाल पुलिस कार्रवाई के दौरान आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल से प्रदर्शन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। मामले में प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
निष्कर्ष:
मोहाली में बंदी सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा लंबे समय से पंजाब में कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है।

