प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के विदेश दौरे के तीसरे चरण में रविवार को स्वीडन पहुंच गए। स्वीडन के शहर गोथेनबर्ग एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने खुद मौजूद रहकर पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस खास मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। भारत और स्वीडन के बीच यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें व्यापार, ग्रीन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा निर्माण और जलवायु परिवर्तन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है।
प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड्स का दौरा पूरा करने के बाद स्वीडन पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इस दो दिवसीय दौरे में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी जाएगी। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष फोकस रहेगा।
इस दौरे का सबसे चर्चित हिस्सा पीएम मोदी का वोल्वो ग्रुप के मुख्यालय का दौरा माना जा रहा है। गोथेनबर्ग स्थित वोल्वो मुख्यालय में पीएम मोदी नई तकनीकों और ऑटोमोबाइल इनोवेशन से जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी लेंगे। वोल्वो ग्रुप के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी जेंस होल्टिंगर ने पीएम मोदी के दौरे को “सम्मान की बात” बताया है। उन्होंने कहा कि भारत वोल्वो के लिए तेजी से उभरता हुआ बड़ा बाजार है और कंपनी पिछले 25 वर्षों से भारत में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में वोल्वो के करीब 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं और यहां कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर मौजूद है। ऐसे में पीएम मोदी की यात्रा भारत-स्वीडन तकनीकी संबंधों को और मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
पीएम मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इस मंच पर यूरोप की कई बड़ी कंपनियों के उद्योगपति और व्यापारिक नेता मौजूद रहेंगे। खास बात यह है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस दौरान ग्रीन ट्रांजिशन, नई तकनीक, एआई, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वीडन की इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था और भारत की तेजी से बढ़ती तकनीकी ताकत दोनों देशों को एक मजबूत साझेदार बना सकती है। यही वजह है कि इस दौरे पर दुनियाभर के उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। वहीं, 2000 से 2025 के बीच स्वीडन ने भारत में 2.825 अरब डॉलर का निवेश किया है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद यह आंकड़े और तेजी से बढ़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी अपने स्वीडन दौरे के बाद नॉर्वे भी जाएंगे, जहां वे तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। नॉर्वे की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि 43 वर्षों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री वहां आधिकारिक दौरे पर जाएगा।
इस पूरे दौरे के जरिए भारत न केवल यूरोपीय देशों के साथ अपने व्यापारिक और तकनीकी संबंध मजबूत करना चाहता है, बल्कि हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और भविष्य की तकनीकों में भी वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वीडन दौरा भारत-यूरोप संबंधों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है। AI, ग्रीन टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल इनोवेशन और व्यापारिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में यह यात्रा दोनों देशों के लिए बड़े अवसर खोल सकती है। वोल्वो मुख्यालय की यात्रा और यूरोपियन इंडस्ट्री मंच में भागीदारी इस दौरे को और खास बना रही है।


