अयोध्या। राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर बुधवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बहुप्रतीक्षित बैठक आज अयोध्या में होने जा रही है। बैठक में राम मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के चयन को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। करीब दो महीने चली चयन प्रक्रिया के बाद चयन समिति ने तीन नामों का पैनल तैयार किया है और इसे मंगलवार को ट्रस्ट को सौंप दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन तीन नामों में से आखिर किस अधिकारी को राम मंदिर की विस्तारित व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
तीन पूर्व अफसरों के नाम पर टिकी निगाहें
सीईओ पद के लिए तैयार किए गए पैनल में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय, पूर्व आईएएस योगेश्वरराम मिश्रा और बिहार कैडर के आईपीएस डॉ. परेश सक्सेना के नाम शामिल हैं।
खास बात यह है कि तीनों अधिकारी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि तीनों की प्रशासनिक और पेशेवर पृष्ठभूमि अलग-अलग रही है। ऐसे में ट्रस्ट के सामने सबसे उपयुक्त उम्मीदवार का चयन करने की चुनौती है।
राजेश पांडेय के पास पुलिस प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और बड़े आयोजनों के प्रबंधन का अनुभव बताया जाता है। राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए यह अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।
वहीं, पूर्व आईएएस योगेश्वरराम मिश्रा के पास प्रशासनिक और शासन स्तर पर काम करने का अनुभव है। मंदिर से जुड़ी विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक एजेंसियों के साथ समन्वय की जरूरत को देखते हुए उनका अनुभव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीसरे उम्मीदवार डॉ. परेश सक्सेना बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उनके पास पुलिस प्रशासन के साथ चिकित्सा क्षेत्र की पृष्ठभूमि भी है। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बीच सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं के लिहाज से यह अनुभव उपयोगी माना जा सकता है।

करीब दो महीने चली चयन प्रक्रिया
राम मंदिर के सीईओ के चयन को लेकर प्रक्रिया करीब दो महीने से चल रही थी। चयन समिति ने विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद तीन अधिकारियों के नाम का पैनल तैयार किया।
मंगलवार को यह पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया गया। अब अंतिम फैसला ट्रस्ट की बैठक में होना है।
बुधवार शाम करीब चार बजे मणिरामदास जी की छावनी में बैठक प्रस्तावित है। बैठक के बाद यह साफ हो सकता है कि राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में किस नाम पर मुहर लगती है।
सीईओ की नियुक्ति को मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राम मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही के साथ सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और अन्य व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की जरूरत बढ़ी है।
चढ़ावा चोरी मामले की भी होगी समीक्षा
ट्रस्ट की बैठक सिर्फ सीईओ के चयन तक सीमित नहीं रहने वाली। बैठक में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच की भी समीक्षा की जाएगी।
ट्रस्ट की ओर से जारी एजेंडे के मुताबिक बैठक में ट्रस्ट के विलेख में संशोधन पर भी चर्चा हो सकती है। ऐसे में बैठक को प्रशासनिक और प्रबंधन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई ट्रस्ट सदस्य अयोध्या पहुंचे
बैठक में हिस्सा लेने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, सदस्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद और सदस्य युगपुरुष स्वामी परमानंद मंगलवार को ही अयोध्या पहुंच गए।
वहीं, ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, सदस्य महंत दिनेंद्रदास और पदेन सदस्य जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी पहले से अयोध्या में मौजूद हैं।
ट्रस्ट के कुछ अन्य सदस्य बैठक में ऑनलाइन भी जुड़ सकते हैं। इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन, प्रदेश के गृह सचिव संजय प्रसाद, सीबीएसई चेयरपर्सन एवं केंद्र सरकार के प्रतिनिधि प्रशांत लोखंडे तथा मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के ऑनलाइन शामिल होने की संभावना बताई गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है CEO का पद?
राम मंदिर का निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं लगातार विस्तार ले रही हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, प्रशासनिक समन्वय, सुविधाओं के संचालन और बड़े आयोजनों की तैयारियों जैसी जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं।
ऐसे में एक अनुभवी मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति से इन व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में ही होगा। तीन नामों के पैनल में से किस अधिकारी को जिम्मेदारी मिलती है, यह बैठक के बाद स्पष्ट होगा।
फिलहाल अयोध्या से लेकर मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और संगठनों तक सभी की नजर ट्रस्ट की इस अहम बैठक पर टिकी है। राम मंदिर को पहला CEO कौन मिलेगा, इसका जवाब आज सामने आने की उम्मीद है।


