अयोध्या: स्थित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा गबन मामले के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। साथ ही, मंदिर निर्माण से जुड़े विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी ट्रस्ट की जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया।
इसी बीच, चढ़ावा चोरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट में दान प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई गंभीर प्रशासनिक कमियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह प्रारंभिक रिपोर्ट है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
ट्रस्ट में क्या हुआ बड़ा बदलाव?
बैठक में चंपत राय के स्थान पर कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें मंदिर के प्रशासन को व्यवस्थित करने, नई टीम गठित करने और दो सहायक नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।
वहीं, ट्रस्ट के दो पद फिलहाल रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्ति को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ट्रस्ट ने संकेत दिए हैं कि अगले चरण में संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत बनाया जाएगा।
बैंक खातों के संचालन में नई व्यवस्था
पहले मंदिर से जुड़े बैंक खातों के संचालन की जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्रा के पास थी। अब नई व्यवस्था के तहत कृष्ण मोहन, जगदीश आफले और चंदन राय संयुक्त रूप से बैंक खातों का संचालन करेंगे।
ट्रस्ट का कहना है कि यह बदलाव वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

मंदिर प्रबंधन में पहली बार बनेगा CEO
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय मंदिर प्रशासन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का लिया गया।
इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई है, जिसमें—
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली
- लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी
- शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक सुरेश हावड़े
को शामिल किया गया है।
यह समिति योग्य उम्मीदवारों के नाम सुझाएगी।
22 जुलाई को फिर होगी अहम बैठक
ट्रस्ट की बैठक सामान्यतः तीन महीने में एक बार होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए 22 जुलाई को विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है।
इस बैठक में—
- नए ट्रस्टी नियुक्त करने,
- CEO चयन प्रक्रिया,
- SIT जांच की प्रगति,
- सुरक्षा और पारदर्शिता सुधार
जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
SIT रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई गंभीर प्रशासनिक कमियों की ओर संकेत किया गया है।
1. CCTV में चोरी की घटनाएं
रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों द्वारा करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और नकदी छिपाने जैसी घटनाएं दिखाई देने की बात कही गई है।
हालांकि, 27 अप्रैल से पहले का पूरा फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण कुल नुकसान का अंतिम आकलन अभी संभव नहीं बताया गया है।
2. सुरक्षा नियमों में कथित ढिलाई
रिपोर्ट में कहा गया कि दान गणना के लिए बनाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में समय के साथ बदलाव किए गए।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार—
- अनिवार्य तलाशी की जगह रैंडम जांच अपनाई गई।
- निर्धारित यूनिफॉर्म व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हुई।
- निजी सामान ले जाने पर प्रभावी रोक नहीं रही।
- प्रवेश और निकास की निगरानी कमजोर रही।
इन बिंदुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है।
3. चाबियों को लेकर सवाल
SIT रिपोर्ट में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके पास मंदिर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं। रिपोर्ट में इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक बताया गया है।
4. कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी सवाल
रिपोर्ट में मनीष कुमार यादव सहित कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि नियुक्तियों में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
किन लोगों का रिपोर्ट में जिक्र?
प्रारंभिक रिपोर्ट में निम्न प्रमुख नामों का उल्लेख किया गया है—
- डॉ. अनिल मिश्रा
- सुभाष श्रीवास्तव
- रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव
- मनीष कुमार यादव
इसके अलावा पुलिस जांच के दौरान कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
चोरी के पैसों से संपत्ति खरीदने का दावा
पुलिस जांच में आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह दावा किया गया है कि कथित रूप से चोरी की गई रकम का उपयोग कुछ संपत्तियां खरीदने में किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार—
- कुछ नकदी बरामद की गई है।
- कुछ वाहनों और आभूषणों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
- बरामद सामग्री का सत्यापन और कानूनी परीक्षण जारी है।
इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
ट्रस्ट ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की है।
इनमें शामिल हैं—
- स्वतंत्र विशेषज्ञों की सलाह लेना।
- दान प्रबंधन प्रणाली को डिजिटल और अधिक सुरक्षित बनाना।
- निगरानी व्यवस्था मजबूत करना।
- CCTV बैकअप अवधि बढ़ाने पर विचार।
- कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना।
ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।
निष्कर्ष
राम मंदिर चढ़ावा गबन प्रकरण के बाद ट्रस्ट में हुए प्रशासनिक बदलाव और SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, जांच अभी जारी है और कई तथ्य अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे। ट्रस्ट ने पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने का भरोसा जताया है। 22 जुलाई की अगली बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।

