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Reading: ‘कोहली जैसे लोग प्रेमानंदजी के पास जाते रहते हैं’: रामभद्राचार्य बोले- निश्चित ही युवाओं को धर्म से जोड़ने का काम कर रहे होंगे
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Home - राज्य - ‘कोहली जैसे लोग प्रेमानंदजी के पास जाते रहते हैं’: रामभद्राचार्य बोले- निश्चित ही युवाओं को धर्म से जोड़ने का काम कर रहे होंगे

‘कोहली जैसे लोग प्रेमानंदजी के पास जाते रहते हैं’: रामभद्राचार्य बोले- निश्चित ही युवाओं को धर्म से जोड़ने का काम कर रहे होंगे

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/06 at 4:31 PM
Rajat Kumar
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3 Min Read
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लखनऊ: में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने धर्म, राजनीति, रामराज्य, युवाओं की भूमिका और देश के वर्तमान सामाजिक माहौल को लेकर खुलकर अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध क्रिकेटर विराट कोहली और संत प्रेमानंद महाराज का भी जिक्र किया।

Contents
रामराज्य की अपनी परिभाषा बताईराजनीति में संन्यासियों की भूमिका पर बड़ी टिप्पणीवीआईपी दर्शन व्यवस्था का किया विरोधगोमाता और राष्ट्रमाता बहस पर भी बोलेमोदी सरकार और विकसित भारत पर भरोसायुवाओं को दिया खास संदेशएआई और तकनीक पर भी रखी राय

जब उनसे पूछा गया कि विराट कोहली सहित कई बड़ी हस्तियां प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए जाती हैं, तो उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से प्रेमानंद महाराज युवाओं को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहे होंगे। उन्होंने कहा कि यदि देश के युवा धर्म और नैतिक मूल्यों से जुड़ते हैं तो यह समाज और राष्ट्र दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है।

रामराज्य की अपनी परिभाषा बताई

रामभद्राचार्य ने कहा कि रामराज्य का अर्थ केवल धार्मिक शासन नहीं बल्कि ऐसा समाज है जहां सभी लोग परस्पर प्रेम करें और अपने कर्तव्यों का पालन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और निर्यातक भारत ही उनके लिए वास्तविक रामराज्य की कल्पना है।

उनके अनुसार ऐसा भारत होना चाहिए जो विश्व को दिशा देने वाला हो और जहां सामाजिक समरसता, न्याय तथा विकास साथ-साथ आगे बढ़ें।

राजनीति में संन्यासियों की भूमिका पर बड़ी टिप्पणी

संतों के राजनीति में बढ़ते हस्तक्षेप पर उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। संन्यासी का काम राजनीति करना नहीं बल्कि राजनीति को दिशा देना है।

हालांकि उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपवाद बताया। उन्होंने कहा कि योगी राजर्षि की भूमिका निभा रहे हैं और वर्तमान समय में अच्छा कार्य कर रहे हैं।

वीआईपी दर्शन व्यवस्था का किया विरोध

धार्मिक स्थलों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रामभद्राचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। वहां किसी भी व्यक्ति को विशेष सुविधा नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मंदिरों में वीआईपी संस्कृति समाप्त होनी चाहिए क्योंकि आस्था के सामने सभी बराबर हैं।

गोमाता और राष्ट्रमाता बहस पर भी बोले

गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग पर उन्होंने कहा कि गाय पहले से ही विश्वमाता है। किसी मां को दोबारा मां घोषित करने की जरूरत नहीं होती। हालांकि उन्होंने देशभर में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन किया।

मोदी सरकार और विकसित भारत पर भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को अवश्य हासिल करेगा।

उन्होंने कहा कि उनकी कल्पना का भारत केवल “सोने की चिड़िया” नहीं बल्कि “सोने का सिंह” होना चाहिए, जो आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक रूप से दुनिया का नेतृत्व करे।

युवाओं को दिया खास संदेश

रामभद्राचार्य ने युवाओं से चरित्रवान बनने, ब्रह्मचर्य का पालन करने, शिक्षा प्राप्त करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि युवाओं को त्याग, सेवा और अनुशासन की भावना अपनानी चाहिए। यदि समाज में कोई भूखा है तो उसे भी अपने भोजन में हिस्सा समझना चाहिए।

एआई और तकनीक पर भी रखी राय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक पर उन्होंने कहा कि तकनीक उपयोगी है लेकिन यह हर प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकती। वास्तविक ज्ञान गुरुजनों और शास्त्रों के अध्ययन से ही प्राप्त होता है।

उन्होंने युवाओं से तकनीक का उपयोग करने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े रहने का आह्वान किया।

रामभद्राचार्य के इस विस्तृत संवाद में धर्म, राजनीति, संस्कृति और युवा शक्ति को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश देखने को मिले। विशेष रूप से विराट कोहली और प्रेमानंद महाराज को लेकर दिया गया उनका बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

TAGGED: धर्म समाचार, नरेंद्र मोदी, प्रेमानंद महाराज, भारत, योगी आदित्यनाथ, रामभद्राचार्य, रामराज्य, लखनऊ न्यूज, विराट कोहली, श्रीराम कथा, सनातन धर्म, हिंदू धर्म
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