SpaceX का 4,000 किलो वजनी रॉकेट चांद से टकराया, NASA ने कहा- पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं
नई दिल्ली। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी घटना सामने आई है। एलन मस्क की कंपनी SpaceX का एक बेकाबू रॉकेट चंद्रमा की सतह से टकरा गया है। लगभग 4,000 किलोग्राम वजन वाला यह रॉकेट का ऊपरी हिस्सा करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा के आइंस्टीन क्रेटर के पास जा टकराया। इस घटना के बाद वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ गई है क्योंकि इससे चंद्रमा की सतह और उसके निर्माण से जुड़ी कई नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है।
हालांकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने स्पष्ट किया है कि इस टक्कर से पृथ्वी को किसी प्रकार का खतरा नहीं है। फिलहाल इस टक्कर की पुष्टि चंद्रमा की नई तस्वीरों और वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद की जाएगी।
क्या था यह रॉकेट?
यह मलबा SpaceX के Falcon-9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा था, जिसे जनवरी 2025 में अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था।
इस मिशन के जरिए अमेरिका के Blue Ghost और जापान के Hakuto-R लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजा गया था। मिशन सफल होने के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही अनियंत्रित रूप से घूमता रहा और धीरे-धीरे उसकी दिशा बदलती गई।
18 महीनों तक अंतरिक्ष में भटकता रहा रॉकेट
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पिछले लगभग 18 महीनों में इस रॉकेट के मलबे का मार्ग लगातार बदलता रहा।
खगोलविदों ने पहले ही गणनाओं के आधार पर अनुमान लगाया था कि यह टुकड़ा अंततः चंद्रमा से टकरा सकता है। निर्धारित समय पर यही हुआ और रॉकेट चंद्रमा की सतह से टकरा गया।
आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई टक्कर
यह टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित प्रसिद्ध आइंस्टीन क्रेटर के आसपास हुई।
आइंस्टीन क्रेटर लगभग 170 किलोमीटर व्यास वाला विशाल गड्ढा है। यह क्षेत्र पृथ्वी से दिखाई देने वाले चंद्रमा के हिस्से में स्थित है।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस टक्कर से पैदा हुई चमक इतनी कम थी कि इसे सामान्य दूरबीन से देख पाना संभव नहीं था।

100 किलोमीटर तक उड़ी होगी चंद्र धूल
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डॉ. मैट बोथवेल के अनुसार इस टक्कर से चंद्रमा की सतह पर मौजूद धूल का विशाल गुबार उठा होगा।
अनुमान है कि यह धूल लगभग 100 किलोमीटर तक ऊपर उठी होगी और कई मिनटों तक अंतरिक्ष में फैली रही होगी।
यह वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण डेटा साबित हो सकता है।
अभी क्यों नहीं आई तस्वीरें?
जब यह घटना हुई, उस समय कोई भी ऑर्बिटर सही स्थान पर मौजूद नहीं था, इसलिए टक्कर की लाइव तस्वीरें रिकॉर्ड नहीं हो सकीं।
अब दक्षिण कोरिया का Danuri Orbiter और NASA का Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) आने वाले दिनों में इस स्थान की तस्वीरें लेंगे।
वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके यह पता लगाएंगे कि इस टक्कर से चंद्रमा पर कितना बड़ा नया गड्ढा बना है।
चांद पर बढ़ता जा रहा है अंतरिक्ष कचरा
इस घटना के बाद चंद्रमा पर मौजूद मानव निर्मित वस्तुओं की संख्या लगभग 3,000 तक पहुंच गई है।
इनका कुल वजन करीब 190 टन बताया जा रहा है।
इनमें पुराने अंतरिक्ष यान, रॉकेट के हिस्से, वैज्ञानिक उपकरण और मिशनों के दौरान छोड़ा गया अन्य हार्डवेयर शामिल है।
हालांकि चंद्रमा पर वातावरण नहीं होने के कारण इससे किसी जैविक पर्यावरण को नुकसान नहीं होता, लेकिन भविष्य में बढ़ते अंतरिक्ष अभियानों के कारण यह चिंता का विषय बनता जा रहा है।
वैज्ञानिकों को क्या मिलेगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना विज्ञान के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
आमतौर पर प्राकृतिक उल्कापिंड जब चंद्रमा से टकराते हैं, तब वैज्ञानिकों के पास उनके वजन, गति और दिशा की पूरी जानकारी नहीं होती।
लेकिन इस मामले में रॉकेट का—
- वजन
- गति
- आकार
- दिशा
पहले से ज्ञात थी।
इससे वैज्ञानिक यह बेहतर ढंग से समझ पाएंगे कि इतनी ऊर्जा से हुई टक्कर के बाद चंद्रमा की सतह पर क्या परिवर्तन हुए।
यह अध्ययन भविष्य के चंद्र अभियानों और सौर मंडल के शुरुआती इतिहास को समझने में भी मदद करेगा।
इधर ऊपरी हिस्सा टकराया, उधर बूस्टर फिर उड़ान को तैयार
दिलचस्प बात यह है कि Falcon-9 रॉकेट का निचला हिस्सा (Booster) पुनः उपयोग के लिए डिजाइन किया गया था।
यही बूस्टर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आया था और अब इसे 10 अगस्त को 18वीं बार लॉन्च किए जाने की तैयारी चल रही है।
यही SpaceX की पुन: उपयोग योग्य रॉकेट तकनीक की सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है।
क्या है Space Debris और Einstein Crater?
Space Debris वह मलबा होता है जो पुराने उपग्रहों, रॉकेटों या अंतरिक्ष अभियानों के बाद अंतरिक्ष में रह जाता है।
वहीं Einstein Crater चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित लगभग 170 किलोमीटर चौड़ा विशाल प्रभाव गड्ढा है, जिसका नाम महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सम्मान में रखा गया है।
निष्कर्ष
SpaceX के Falcon-9 रॉकेट का चंद्रमा से टकराना पृथ्वी के लिए खतरे की बात नहीं है, लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। इस नियंत्रित डेटा वाली टक्कर से वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह, धूल के व्यवहार और प्रभाव गड्ढों के निर्माण को पहले से कहीं बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। आने वाले दिनों में ऑर्बिटर द्वारा भेजी जाने वाली तस्वीरें इस घटना की पूरी तस्वीर साफ करेंगी और शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराएंगी।

