आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल गुरुवार सुबह इबादत और भाईचारे की मिसाल बन गया। ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के मौके पर ताजमहल परिसर स्थित मस्जिद में हजारों नमाजियों ने नमाज अदा की और देश-दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी। सुबह करीब 8:45 बजे ताज के साए में नमाज शुरू हुई, जिसमें करीब 5000 लोगों ने हिस्सा लिया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।
इस खास मौके पर ताजमहल को तीन घंटे के लिए निशुल्क रखा गया था, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग परिसर तक पहुंचे। ताजमहल परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की टीम और पुलिस प्रशासन लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए थे।
बच्चों में दिखा खास उत्साह
ईद के त्योहार को लेकर बच्चों में अलग ही उत्साह दिखाई दिया। छोटे-छोटे बच्चे नए कपड़ों में अपने परिवार के साथ ताजमहल पहुंचे और नमाज अदा की। नमाज के बाद बच्चों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की शुभकामनाएं दीं।
हालांकि भीषण गर्मी का असर इस बार नमाजियों की संख्या पर देखने को मिला। मस्जिद ताजमहल कमेटी के अध्यक्ष सैयद इब्राहिम उस्ताद जैदी ने बताया कि पिछले आयोजनों की तुलना में इस बार कम लोग पहुंचे, लेकिन माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण रहा।
नाइजीरिया से आए पर्यटकों ने भी मनाई ईद
इस बार ताजमहल में ईद का जश्न अंतरराष्ट्रीय रंग में भी नजर आया। नाइजीरिया से आए कई पर्यटकों ने भी ताजमहल परिसर में नमाज अदा की और लोगों से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
विदेशी मेहमानों ने कहा कि ताजमहल जैसे ऐतिहासिक स्थल पर ईद मनाना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे की भावना की तारीफ की।

ताजमहल के बाहर भी दिखी त्योहार की रौनक
ताजमहल के पूर्वी गेट के बाहर सुबह से ही मेले जैसा माहौल दिखाई दिया। आसपास की दुकानों और स्टॉल्स पर लोगों की भीड़ रही। बच्चों ने खिलौने खरीदे तो कई लोगों ने पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया।
सड़क किनारे लगे स्टॉल्स पर सेवइयां, मिठाइयां और ईद से जुड़ी चीजों की खूब बिक्री हुई। पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
बकरे की तस्वीर वाला केक बना चर्चा का विषय
बकरीद के मौके पर शाहगंज इलाके में एक अनोखी पहल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। तिरंगा मंजिल शेरवानी मार्ग पर एडवोकेट गुल चमन शेरवानी और उनके परिवार ने बकरे की तस्वीर वाला केक काटकर प्रतीकात्मक रूप से त्योहार मनाया।
उन्होंने इस मौके पर जीव हत्या रोकने और इंसानियत का संदेश दिया। गुल चमन शेरवानी ने कहा कि असली कुर्बानी अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि अल्लाह इंसान की नियत देखता है, दिखावा नहीं।
उनकी इस पहल की हिंदू और मुस्लिम समाज दोनों ने सराहना की। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द और मानवता का संदेश देने वाली पहल बताया।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
बकरीद को देखते हुए ताजमहल परिसर और शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। नमाज के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
प्रशासन ने लोगों से शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की। पूरे आयोजन के दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
ताजमहल बना भाईचारे और इंसानियत की मिसाल
ईद-उल-अजहा के मौके पर ताजमहल परिसर में जो दृश्य देखने को मिला, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता में है। यहां नमाज, दुआ, गले मिलना और इंसानियत का संदेश हर किसी के दिल को छू गया।
निष्कर्ष:
ताजमहल में बकरीद की नमाज सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह देश में भाईचारे, अमन और इंसानियत का बड़ा संदेश बनकर सामने आई। हजारों लोगों ने एक साथ नमाज अदा कर देश की खुशहाली की दुआ मांगी, जबकि विदेशी मेहमानों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और खास बना दिया।

