मिडिल ईस्ट: में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान अपने संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और संभावित शांति समझौते की उम्मीदों को भी मजबूत किया है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत काफी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देश एक बड़े समझौते के बेहद करीब हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि यह डील सफल होती है, तो मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे संघर्ष का अंत संभव हो सकता है।
यूरेनियम डील क्यों है अहम?
यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्राकृतिक यूरेनियम को सेंट्रीफ्यूज मशीनों के जरिए शुद्ध किया जाता है, जिसे ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहा जाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 5 से 6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, जिसमें से लगभग 120-130 किलोग्राम 60% तक शुद्ध किया जा चुका है। अगर इसे 90% तक शुद्ध किया जाए, तो इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और इजराइल लंबे समय से ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं।

इजराइल-लेबनान सीजफायर: शांति की ओर कदम?
इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है कि Israel और Lebanon 10 दिनों के अस्थायी सीजफायर पर सहमत हो गए हैं। यह युद्धविराम भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात लागू हो गया।
ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से बातचीत की, जिसके बाद यह सहमति बनी।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस सीजफायर के तहत इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार रहेगा, लेकिन वह लेबनान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा। वहीं लेबनान सरकार पर हिजबुल्लाह को नियंत्रित करने का दबाव रहेगा।
सीजफायर के बावजूद जारी तनाव
हालांकि, युद्धविराम लागू होने के कुछ ही समय बाद इसके उल्लंघन की खबरें भी सामने आई हैं। दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की रिपोर्ट मिली है, जिससे यह साफ है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर केवल एक अस्थायी समाधान है और स्थायी शांति के लिए व्यापक समझौते की जरूरत होगी।
ग्लोबल इकोनॉमी पर असर
G-7 देशों ने भी इस संघर्ष को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर और अधिक गंभीर हो सकता है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि यदि ईरान के साथ समझौता हो जाता है, तो होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी, जिससे वैश्विक बाजार को राहत मिलेगी।
निष्कर्ष:
मिडिल ईस्ट में शांति की दिशा में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। ईरान-अमेरिका के बीच संभावित यूरेनियम डील और इजराइल-लेबनान सीजफायर एक नई शुरुआत हो सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सभी पक्षों को गंभीर और ठोस कदम उठाने होंगे।

