उत्तर प्रदेश: की राजनीति एक बार फिर तीखे आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गई है। Lucknow में चल रहे विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान बयानबाजी इतनी तीखी हो गई कि सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया।
डिप्टी CM का बड़ा आरोप
उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री Brijesh Pathak ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “सपा के गुंडे और माफिया Mayawati की हत्या करना चाहते थे।” उन्होंने चर्चित गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय भाजपा के हस्तक्षेप से ही मायावती की जान बच पाई थी।
पाठक ने सदन में विपक्ष के सामने हाथ जोड़कर अपील भी की कि महिलाओं को देश की सबसे बड़ी पंचायत में प्रतिनिधित्व दिया जाए। उनका यह भावुक अंदाज भी चर्चा का विषय बन गया।
योगी का विपक्ष पर हमला
इस बहस के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष की नीतियों के कारण ही आज उन्हें “मुस्लिम महिलाओं का श्राप” झेलना पड़ रहा है।
योगी ने Shah Bano case का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि उस समय राजनीतिक दबाव में आकर न्याय से समझौता किया गया, जिसका खामियाजा आज तक देश भुगत रहा है।

महिला आरक्षण पर टकराव
सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा ने इस बिल को आगे बढ़ने नहीं दिया, जबकि विपक्ष का कहना है कि बिल 2023 में ही पारित हो चुका है, लेकिन सरकार इसे लागू नहीं कर रही।
सदन में भाजपा और सपा विधायकों के बीच नारेबाजी भी हुई। भाजपा की महिला विधायक पोस्टर लेकर पहुंचीं, जबकि सपा विधायक बिल को लागू करने की मांग करते हुए प्रदर्शन करते नजर आए।
सपा विधायक का पलटवार
सपा विधायक Ragini Sonkar ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सदन में कविता पढ़ते हुए कहा—“मैं यूपी की नारी हूं, हर रोज जलाई जाती हूं…”
उनका यह बयान सदन में गूंजता रहा और विपक्ष ने इसे महिलाओं की वास्तविक स्थिति का प्रतिबिंब बताया।
अन्य नेताओं की बयानबाजी
सत्र के दौरान अन्य मंत्रियों और विधायकों ने भी तीखी टिप्पणियां कीं। मंत्री संजय निषाद ने विपक्ष पर जातीय राजनीति का आरोप लगाया, जबकि असीम अरुण ने महिला आरक्षण को लागू करने में हो रही देरी पर सवाल उठाए।
वहीं, मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे सच में महिलाओं के हितैषी हैं, तो अपनी पार्टी में अधिक से अधिक महिलाओं को टिकट दें।
सियासी संदेश और रणनीति
सरकार इस निंदा प्रस्ताव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष महिला विरोधी है। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बताते हुए सरकार पर आरोप लगा रहा है कि वह केवल मुद्दों को भुनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे सियासत के केंद्र में रहेंगे।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह सत्र केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी ताकत के प्रदर्शन का मंच बन गया है। महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, वह राजनीति की बदलती दिशा को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस नीतिगत बदलाव में तब्दील होती है या सिर्फ सियासी बयानबाजी तक सीमित रह जाती है।


