त्योहारों से पहले चीनी के दाम ने बढ़ाई चिंता
लखनऊ/उत्तर प्रदेश: रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले बाजार में चीनी की कीमतों ने आम लोगों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश के कुछ खुदरा बाजारों में चीनी का भाव बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों में चीनी की कीमत में लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक की तेजी देखी गई है।
कीमतों में अचानक आई इस बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिनके घरों में त्योहारों के दौरान मिठाई और पकवान अधिक बनाए जाते हैं। वहीं मिठाई कारोबारियों के लिए भी बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
पहली बार 60 रुपये के पार पहुंचा चीनी का भाव
कारोबारियों के अनुसार, कुछ दिन पहले तक चीनी लगभग 48 से 50 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही थी। अब कई जगह इसका खुदरा भाव 60 रुपये पार कर 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
न्यू हैदराबाद क्षेत्र के एक किराना व्यापारी के मुताबिक, कीमत में यह तेजी काफी कम समय में आई है। वहीं थोक कारोबारियों का कहना है कि चीनी के भाव पहली बार इस स्तर तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं।
बाजार में इस तेजी का सबसे बड़ा कारण मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है।
मांग के मुकाबले आधी आपूर्ति का दावा
व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में जितनी चीनी की मांग है, उसके मुकाबले करीब आधी ही आपूर्ति हो पा रही है। ऐसे में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और इसके बाद दिवाली तक मिठाइयों और घरेलू पकवानों की मांग में तेजी आने की उम्मीद है।
अगर आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो चीनी के दाम में आगे भी बढ़ोतरी हो सकती है।

चीनी का उत्पादन घटने से भी बढ़ा दबाव
कारोबारियों के अनुसार, इस साल चीनी का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत कम रहा है। उत्पादन में कमी का असर बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर पड़ा है।
नई चीनी मिलों का पेराई सत्र आमतौर पर अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है। ऐसे में नए सीजन की चीनी बाजार में आने तक मौजूदा स्टॉक पर ही निर्भरता बनी रह सकती है।
यही वजह है कि नए पेराई सत्र से पहले कीमतों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता का भी असर
कारोबारियों ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे एथेनॉल उत्पादन को भी एक वजह बताया है। उनके मुताबिक, चीनी मिलों के लिए गन्ने से चीनी के बजाय एथेनॉल उत्पादन करना कई परिस्थितियों में अधिक लाभकारी रहा है।
एथेनॉल की मांग बढ़ने के कारण गन्ने के इस्तेमाल का एक हिस्सा चीनी उत्पादन से हटकर एथेनॉल की ओर गया। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा प्रभावित हुई और स्टॉक पर दबाव बढ़ा।
हालांकि, चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे केवल एक कारण नहीं है। उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, बाजार की मांग और आगामी त्योहार—सभी कारक मिलकर कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
मिठाई कारोबारियों की बढ़ी परेशानी
चीनी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर मिठाई कारोबार पर भी पड़ रहा है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है और मिठाई बनाने में चीनी प्रमुख कच्चे माल में शामिल है।
कारोबारियों के मुताबिक, एक किलो खोये में लगभग 200 ग्राम चीनी का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है।
इसके अलावा दूध, खोया, ड्राई फ्रूट्स, घी और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी भी कारोबारियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
त्योहारों पर आम आदमी की जेब पर असर
चीनी की कीमत में 15 रुपये प्रति किलो तक की तेजी छोटी लग सकती है, लेकिन त्योहारों के दौरान इसकी खपत बढ़ने पर इसका असर परिवार के कुल बजट पर दिखाई दे सकता है।
घर में मिठाई बनाने से लेकर बाजार से मिठाई खरीदने तक, बढ़ी हुई लागत अंततः ग्राहक तक पहुंच सकती है। यदि कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले त्योहारों में मिठाइयों के दाम भी प्रभावित होने की संभावना है।
सरकार के सामने चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए चीनी सीजन की शुरुआत तक बाजार में कीमतों को नियंत्रित कैसे रखा जाएगा। सरकार के लिए पर्याप्त स्टॉक और सामान्य आपूर्ति बनाए रखना अहम होगा।
व्यापारियों की नजर आने वाले दिनों में चीनी की आपूर्ति, थोक कीमतों और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर बनी रहेगी। अगर त्योहारों से पहले सप्लाई में सुधार होता है तो कीमतों पर दबाव कुछ कम हो सकता है।
निष्कर्ष
त्योहारों से पहले चीनी का 65 रुपये किलो तक पहुंचना आम उपभोक्ता के लिए चिंता की बात है। उत्पादन में कमी, मौजूदा स्टॉक पर दबाव, एथेनॉल की मांग और आगामी त्योहारों के कारण चीनी बाजार में तेजी बनी हुई है। अब देखना होगा कि नई पेराई शुरू होने तक बाजार में आपूर्ति किस तरह सामान्य होती है और क्या चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लग पाती है।


