लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रोडवेज चालक और परिचालकों के प्रदर्शन से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। कमता स्थित अवध बस स्टेशन पर कर्मचारियों ने निजी वाहनों के कथित अवैध संचालन और बसों के परिचालन से जुड़ी समस्याओं के विरोध में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर सरकारी बसों के संचालन, निजी वाहनों की प्रतिस्पर्धा और संविदा कर्मचारियों की आय से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
कमता बस स्टेशन पर क्यों भड़के रोडवेज कर्मचारी?
कर्मचारियों का आरोप है कि अवध बस स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने किए गए डायवर्जन के कारण रोडवेज बसें यात्रियों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रही हैं। उनका दावा है कि जिन स्थानों पर सरकारी बसों को यात्रियों को लेने के लिए पहुंचना चाहिए, वहां निजी बसें और अर्टिगा जैसी गाड़ियां यात्रियों को ले जाती हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस स्थिति से उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की आय पर असर पड़ रहा है। कर्मचारियों के मुताबिक, यात्रियों के निजी वाहनों की ओर जाने से रोडवेज बसों में सवारियों की संख्या घटती है और इसका नुकसान निगम के साथ-साथ कर्मचारियों को भी उठाना पड़ता है।
हालांकि, निजी वाहनों के संचालन को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच से होनी चाहिए। कर्मचारियों की मांग है कि बस स्टेशन और निर्धारित पिकअप प्वाइंट के आसपास यात्री परिवहन के नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
आय की बाध्यता और वेतन कटौती पर भी नाराजगी
रोडवेज चालक-परिचालकों के विरोध का एक बड़ा मुद्दा आय की निर्धारित बाध्यता भी है। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे तय आय का लक्ष्य पूरा करने की अपेक्षा की जाती है, जबकि उनके अनुसार यात्रियों को लेने के स्थान और निजी वाहनों की मौजूदगी जैसी परिस्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि निर्धारित आय पूरी नहीं होने पर उनके वेतन से कटौती की जाती है। वे 50 प्रतिशत आय की बाध्यता समाप्त करने और वेतन कटौती से जुड़ी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
उनका कहना है कि जब बसों को यात्रियों तक पहुंचने में ही कठिनाइयां आ रही हैं, तब कर्मचारियों पर आय का दबाव डालना उचित नहीं है। दूसरी ओर, इन मांगों पर परिवहन निगम के प्रबंधन का पक्ष और किसी संभावित समाधान की आधिकारिक घोषणा भी महत्वपूर्ण होगी।

सड़क पर प्रदर्शन से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
कमता स्थित अवध बस स्टेशन लखनऊ से यात्रा करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। यहां बसों का संचालन प्रभावित होने से अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सरकारी बसों पर निर्भर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
काम पर जाने वाले लोगों, दैनिक यात्रियों और दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ी। सड़क पर प्रदर्शन और यातायात प्रभावित होने की स्थिति में यात्रियों को अतिरिक्त समय भी लग सकता है।
ऐसे हालात में यात्रियों के लिए जरूरी है कि वे यात्रा से पहले बस के संचालन और उपलब्धता की जानकारी लें। विशेषकर दूसरे शहरों की यात्रा करने वाले लोगों को प्रस्थान के समय और बस की स्थिति की पुष्टि कर लेनी चाहिए। प्रदर्शन की स्थिति बदलने के साथ सेवाओं में भी बदलाव हो सकता है।
अधिकारियों के साथ वार्ता से नहीं निकला समाधान
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश शाखा अवध डिपो से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को लेकर पहले भी प्रबंधन को नोटिस दिया गया था।
परिषद के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 9 अक्टूबर को प्रबंधन के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई, लेकिन समस्याओं का निर्णायक समाधान नहीं निकल सका। 12 अक्टूबर को दोबारा बातचीत हुई, फिर भी कर्मचारियों को अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने की बात कही गई।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि जब तक लंबित मुद्दों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन का पूर्व घोषित कार्यक्रम जारी रहेगा। परिषद ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों के विरुद्ध किसी कथित दमनात्मक या उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का विरोध किया जाएगा।
16 अक्टूबर को फिर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
कर्मचारी परिषद ने 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। संगठन की मांग है कि परिवहन निगम प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं का न्यायसंगत समाधान करे और वार्ताओं में बनी सहमतियों को प्रभावी ढंग से लागू करे।
आगामी प्रदर्शन को देखते हुए यात्रियों को बस सेवाओं से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि, धरने के कारण कितनी बसें प्रभावित होंगी और सेवा कितनी देर तक बाधित रहेगी, इसका आकलन आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही किया जा सकता है।
अब परिवहन निगम के सामने क्या चुनौती है?
इस विवाद का समाधान केवल प्रदर्शन समाप्त कराने तक सीमित नहीं है। परिवहन निगम के सामने यात्रियों को सुविधाजनक सेवा उपलब्ध कराने, निर्धारित बस स्टॉप और पिकअप प्वाइंट पर व्यवस्था सुधारने तथा कर्मचारियों की आय से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा करने की चुनौती है।
यदि निजी वाहनों के अवैध संचालन की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित विभागों को नियमों के मुताबिक कार्रवाई करनी होगी। वहीं, कर्मचारियों की मांगों पर प्रबंधन को स्पष्ट संवाद और समयबद्ध समाधान की दिशा में कदम उठाने होंगे।
फिलहाल, कमता बस स्टेशन पर प्रदर्शन ने सरकारी परिवहन व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने रखे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या 16 अक्टूबर का प्रस्तावित धरना यात्रियों की परेशानी को और बढ़ाता है।

