बेंगलुरु। कर्नाटक में वंदे मातरम् के कितने स्टैंजा सरकारी कार्यक्रमों में गाए जाएं, इसे लेकर कांग्रेस सरकार और बीजेपी के बीच विवाद तेज हो गया है। इसी बीच कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने बीजेपी नेताओं बीवाई विजयेंद्र और आर. अशोक को एक सार्वजनिक चुनौती दी है।
खरगे ने कहा कि दोनों नेता वंदे मातरम् के सभी स्टैंजा बिना टेलीप्रॉम्प्टर और बिना कागज देखे गाकर दिखाएं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे ऐसा कर पाते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक सरकार ने राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो स्टैंजा गाने का आदेश जारी किया है। हालांकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के लिए इस व्यवस्था में अपवाद रखा गया है।
खरगे ने बीजेपी और पीएम मोदी पर भी उठाए सवाल
प्रियांक खरगे ने इस मुद्दे पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस अपने पुराने निर्णय के अनुरूप पहले दो स्टैंजा गाने की बात कर रही है, तो अब बीजेपी की ओर से पूरी रचना गाने पर जोर क्यों दिया जा रहा है।
खरगे ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे ऐतिहासिक नेताओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय पूर्व के नेताओं के फैसलों से जुड़ा है।
हालांकि बीजेपी इस मुद्दे पर अलग रुख रखती है और कर्नाटक सरकार के आदेश की आलोचना कर रही है।
क्या है कर्नाटक सरकार का फैसला?
कर्नाटक सरकार ने सितंबर में आदेश जारी कर कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में सामान्य तौर पर वंदे मातरम् के पहले दो स्टैंजा गाए जाएंगे। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रम इसके अपवाद हैं।
राज्य सरकार के आदेश में वंदे मातरम् के राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान और राष्ट्रीय एकता से जुड़े महत्व का भी उल्लेख किया गया है। सरकार ने अपने फैसले को कार्यक्रमों में एकरूपता, गरिमा और उचित प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने की व्यवस्था बताया है।

केंद्र के दिशा-निर्देश में क्या कहा गया था?
इस विवाद की दूसरी अहम कड़ी केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देश हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में वंदे मातरम् के गायन को लेकर विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जब वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन दोनों एक साथ गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम् का आधिकारिक संस्करण प्रस्तुत किया जाए। केंद्र के निर्देश में छह स्टैंजा वाले आधिकारिक संस्करण का उल्लेख किया गया था।
केंद्र के दिशा-निर्देशों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और कुछ औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों जैसे अवसरों पर भी आधिकारिक संस्करण के इस्तेमाल का प्रोटोकॉल बताया गया था।
कांग्रेस का दो स्टैंजा वाला रुख क्यों?
इस विवाद में कांग्रेस अपने 1937 के प्रस्ताव का हवाला दे रही है। कांग्रेस कार्य समिति ने अगस्त 2026 में उस प्रस्ताव का पालन करने का निर्णय लिया था, जिसके तहत पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो स्टैंजा गाए जाने की बात कही गई थी।
यही रुख बाद में कर्नाटक सरकार के सरकारी कार्यक्रमों से जुड़े निर्णय के साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
अब हाई कोर्ट पहुंचा मामला
विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। 15 सितंबर 2026 को कर्नाटक हाई कोर्ट में अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने जनहित याचिका (PIL) दायर की, जिसमें राज्य सरकार के पहले दो स्टैंजा वाले आदेश को चुनौती दी गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि राज्य सरकार का आदेश केंद्र के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने गृह मंत्रालय के 9 जुलाई 2026 के पत्र का भी हवाला दिया है, जिसमें राज्यों को राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण के संबंध में निर्देश दिए गए थे।
PIL में यह कानूनी सवाल भी उठाया गया है कि क्या कोई राज्य सरकार कार्यकारी आदेश के जरिए राष्ट्रीय गीत के गायन का स्वरूप तय कर सकती है। इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय से स्पष्ट होगी।
बीजेपी बनाम कांग्रेस: अब विवाद किस मोड़ पर?
एक तरफ कांग्रेस कर्नाटक सरकार के फैसले और अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव का बचाव कर रही है। दूसरी तरफ बीजेपी केंद्र के दिशा-निर्देशों और पूरे आधिकारिक संस्करण के इस्तेमाल की बात उठा रही है।
प्रियांक खरगे की इस्तीफे वाली चुनौती ने इस विवाद को राजनीतिक रूप से और सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि उनकी चुनौती का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि बीजेपी नेता उस चुनौती को स्वीकार करते हैं या नहीं।
वहीं, हाई कोर्ट में दाखिल PIL के कारण अब इस विवाद का कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।
निष्कर्ष
कर्नाटक का वंदे मातरम् विवाद अब तीन स्तरों पर चल रहा है—राज्य सरकार का आदेश, कांग्रेस और बीजेपी की राजनीतिक बहस तथा हाई कोर्ट में लंबित कानूनी चुनौती। प्रियांक खरगे ने बीजेपी नेताओं को सभी स्टैंजा बिना सहायता के गाने की चुनौती देकर बहस को नया मोड़ दिया है। दूसरी ओर, PIL में राज्य सरकार के आदेश और केंद्र के दिशा-निर्देशों के बीच कथित टकराव का मुद्दा उठाया गया है। अब आगे की तस्वीर राजनीतिक बयानों के साथ-साथ अदालत की कार्यवाही से भी साफ होगी।

