नई दिल्ली। भारत की आर्थिक क्षमता, युवा आबादी और तकनीकी प्रगति को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अंदाज में जवाब दिया है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में उन्होंने भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताते हुए उन लोगों पर तंज कसा, जो लगातार भारत की क्षमता और विकास की गति पर संदेह करते हैं।
वित्त मंत्री ने ऐसे संशयवादियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द ‘नाराज फूफाजी’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को भारत की प्रगति पर सवाल उठाने का कोई न कोई कारण हमेशा मिल जाता है। उनका इशारा उन लोगों की ओर था, जो भारत की युवा आबादी और आर्थिक क्षमता को अवसर के बजाय समस्या के तौर पर देखते हैं।
भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का ले रहा फायदा
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत इस समय अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का वास्तविक अनुभव कर रहा है। देश की बड़ी युवा आबादी केवल संख्या नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, नवाचार और उत्पादकता को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण ताकत है।
उनके मुताबिक, भारत के पास बड़ी संख्या में युवा हैं, जो नई तकनीक को अपनाने, नए व्यवसाय खड़े करने और अर्थव्यवस्था को गति देने की क्षमता रखते हैं। यही युवा शक्ति आने वाले वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वित्त मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को अपनी उपलब्धियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए। उन्होंने नकारात्मक सोच के बजाय देश की क्षमताओं और उपलब्ध अवसरों पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
टीवी स्टूडियो की बहस पर भी कटाक्ष
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने उन बहसों पर भी कटाक्ष किया, जहां भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग टेलीविजन स्टूडियो में बैठकर इस बात पर बहस करते रहते हैं कि क्या भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश खत्म हो गया है या फिर यह देश पर बोझ बनने वाला है।
सीतारमण ने ऐसी सोच को खारिज करते हुए कहा कि भारत की मौजूदा युवा आबादी देश के लिए चुनौती से कहीं ज्यादा एक अवसर है। जरूरत इस बात की है कि युवाओं की क्षमता को सही दिशा, कौशल, रोजगार और तकनीकी अवसरों से जोड़ा जाए।

डिजिटल इंडिया की ताकत का किया जिक्र
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में वित्त मंत्री ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल क्षेत्र में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं, जिनका प्रभाव बड़े स्तर पर दिखाई दे रहा है।
यूपीआई इसका एक प्रमुख उदाहरण है। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने वित्तीय लेनदेन को आसान और तेज बनाया है। छोटे कारोबारियों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक, डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
वित्त मंत्री ने भारत की तकनीकी क्षमता, डिजिटल वित्त और अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रही प्रगति को भी देश की बढ़ती ताकत के तौर पर पेश किया।
टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर
निर्मला सीतारमण ने भारतीय तकनीकी परिवेश को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने एक संघीय उद्योग मंच बनाने की बात कही, जो देश के व्यापक प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक साथ लाने में मदद कर सकता है।
ऐसे मंच के जरिए सरकार, उद्योग और तकनीकी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश की जा सकती है। इससे नई तकनीकों, वित्तीय नवाचार और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
CBDC को लेकर RBI को सुझाव
वित्त मंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक से थोक और खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के पायलट को आगे बढ़ाने का सुझाव भी दिया। डिजिटल करेंसी को लेकर दुनिया के कई देशों में प्रयोग चल रहे हैं और भारत भी इस दिशा में काम कर रहा है।
CBDC के विस्तार से डिजिटल वित्तीय प्रणाली को और मजबूत करने तथा भविष्य की वित्तीय तकनीकों के लिए नए अवसर पैदा करने की संभावना है। हालांकि, इसके साथ सुरक्षा, गोपनीयता और वित्तीय स्थिरता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
AI को बताया दोधारी तलवार
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी वित्त मंत्री ने सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने AI को एक दोधारी तलवार के तौर पर देखा, क्योंकि इसका इस्तेमाल एक तरफ धोखाधड़ी का पता लगाने और रोकने के लिए किया जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ अपराधी इसी तकनीक का इस्तेमाल नई तरह की धोखाधड़ी करने के लिए भी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार का उद्देश्य दक्षता और उत्पादकता बढ़ाना होना चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि नई तकनीकें नई सिस्टमेटिक नाजुकता पैदा न करें।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर जोर
वित्त मंत्री के पूरे संबोधन में भारत की युवा शक्ति, डिजिटल क्षमता और तकनीकी विकास को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़कर देखा गया। उनका संदेश साफ था कि भारत के सामने मौजूद जनसांख्यिकीय लाभांश को बोझ मानने के बजाय उसे आर्थिक और सामाजिक विकास की ताकत में बदलने की जरूरत है।
भारत के पास बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित होता डिजिटल ढांचा और तकनीकी नवाचार की क्षमता है। अब चुनौती इन संसाधनों को बेहतर कौशल, रोजगार, सुरक्षित तकनीक और मजबूत संस्थागत व्यवस्था के साथ जोड़ने की है।

