नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बढ़ती सामरिक और तकनीकी क्षमता को लेकर बड़ा संदेश दिया है। ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख, स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते भारत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अब केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और विमान निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता विकसित करनी है। इसी क्रम में उन्होंने बहादुर भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का भी उल्लेख किया, जिन्होंने गंभीर परिस्थितियों में अदम्य साहस दिखाकर विमान में सवार यात्रियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया स्वदेशी ताकत का असर
प्रधानमंत्री लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उन्होंने बताया था कि भारत में तैयार किए गए ड्रोन, मिसाइल और अन्य रक्षा प्रणालियों ने अभियान के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और स्वदेशी उत्पादन ने देश की सैन्य क्षमता को नई दिशा दी है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया गया। सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बढ़ते समन्वय को भारत की सामरिक ताकत का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अब मेड इन इंडिया विमान पर नजर
भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के बाद अब विमानन और आधुनिक एयरक्राफ्ट निर्माण की क्षमता बढ़ाना भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के संदेश में इस बात पर जोर दिखाई देता है कि भारत को भविष्य की जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपनी डिजाइन, निर्माण और तकनीकी क्षमता को मजबूत करना होगा।
इस दिशा में स्वदेशी प्लेटफॉर्म और रक्षा प्रणालियों का विकास पहले ही भारत की रणनीतिक सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश में रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर लगातार जोर दिया गया है।

कैप्टन स्मित मच्छार का जिक्र क्यों खास है?
प्रधानमंत्री के संदेश में कैप्टन स्मित मच्छार का जिक्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में उन्होंने उड़ान के दौरान बेहद खतरनाक स्थिति का सामना करते हुए असाधारण साहस दिखाया। रिपोर्टों के अनुसार, फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान सह-पायलट के हमले में स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों और अन्य लोगों को हमलावर को काबू करने में मदद मिली और विमान को सुरक्षित रूप से आपात स्थिति में उतारा जा सका।
प्रधानमंत्री ने उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत के दौरान उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके साहस तथा त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मोदी ने कहा कि देश को उन पर गर्व है और उनके साहस ने अनेक लोगों की जिंदगी बचाने में मदद की।
17 साल के उड़ान अनुभव ने दिलाई बड़ी मदद
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने अपने अनुभव को साझा किया। उनके अनुसार, करीब 17 वर्षों के उड़ान अनुभव ने उन्हें संकट के समय विमान की स्थिति को समझने और तुरंत फैसला लेने में मदद की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
इस पूरी घटना ने यह भी दिखाया कि विमान उड़ाने में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संकट के समय मानसिक संतुलन और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण होती है।
हनुमान चालीसा से मिली मानसिक ताकत
कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री से बातचीत में यह भी बताया कि संकट के दौरान उन्होंने खुद को शांत रखने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया। प्रधानमंत्री ने उनके इस अनुभव को भावनात्मक रूप से समझते हुए कहा कि इतनी कठिन परिस्थिति से गुजरने के बाद भावुक होना स्वाभाविक है।
भारत के लिए बड़ा संदेश
ऑपरेशन सिंदूर, स्वदेशी रक्षा तकनीक और कैप्टन स्मित मच्छार जैसे उदाहरणों को एक साथ देखें तो प्रधानमंत्री का संदेश व्यापक दिखाई देता है। भारत अब सुरक्षा, तकनीक, विमानन और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
स्वदेशी ड्रोन और मिसाइल से लेकर आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और भविष्य के विमान निर्माण तक, आत्मनिर्भरता को भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पहले भी कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी तकनीक और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन की क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।

