पटना: बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महागठबंधन का प्रदर्शन उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया, जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। प्रदर्शन के दौरान महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर जमकर नारेबाजी की।
सुबह से जुटने लगी थी भीड़
पटना में प्रदर्शन को लेकर सुबह से ही राजनीतिक हलचल दिखाई देने लगी थी। बिहार विधानसभा के सामने सचिवालय थाना के पास करीब पौने दस बजे से कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ जुटने लगी। जैसे ही तेजस्वी यादव प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर रखी थी।
प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव बैरिकेड पर चढ़ गए। उनकी यह तस्वीर तुरंत चर्चा का विषय बन गई। इससे पहले दिल्ली में विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के दौरान भी बैरिकेडिंग को लेकर ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं। पटना में तेजस्वी के इस अंदाज ने प्रदर्शन को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन का सबसे बड़ा मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई और विपक्ष की ओर से उठाए गए कथित ‘वोट चोरी’ के सवालों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
महागठबंधन के नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। विपक्ष इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक अधिकार और मतदान के अधिकार से जोड़कर लगातार आंदोलन कर रहा है। हालांकि, ये आरोप विपक्ष के हैं और चुनाव आयोग तथा सत्तापक्ष की ओर से इस मुद्दे पर अलग पक्ष रखा गया है।

पहले भी सड़कों पर उतर चुका है विपक्ष
पटना में गुरुवार का प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ। इससे पहले महागठबंधन ने बिहार के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। सात अक्टूबर को प्रखंड स्तर पर आक्रोश मार्च और प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा गया था। इसके बाद आठ अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर धरना और पटना में राजभवन मार्च की योजना बनाई गई थी।
बुधवार को भी पटना में महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आक्रोश मार्च निकाला था। इस दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए थे तथा SIR को लेकर सवाल उठाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने बिहार में चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए और आंदोलन जारी रखने की बात कही थी।
534 प्रखंडों तक पहुंचा विरोध
विपक्षी दलों ने इस अभियान को बिहार के बड़े हिस्से तक पहुंचाने की कोशिश की है। सात अक्टूबर को राज्य के सभी 534 प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इस दौरान राजद, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए और पुतले भी जलाए।
महागठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची और SIR से जुड़े सवाल केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। विपक्षी नेता इसी आधार पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।
पटना में बढ़ा राजनीतिक तनाव
गुरुवार को तेजस्वी यादव के बैरिकेड पर चढ़ने की घटना ने प्रदर्शन को एक अलग राजनीतिक रंग दे दिया। प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे और पुलिस की बैरिकेडिंग के चलते माहौल तनावपूर्ण बना रहा। नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
विपक्ष लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर राजनीतिक स्तर पर तीखी बहस जारी है। ऐसे में पटना का प्रदर्शन बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आंदोलन आगे भी जारी रखने का संकेत
महागठबंधन की ओर से पहले ही साफ किया जा चुका है कि SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर उसका आंदोलन जारी रहेगा। विपक्षी दल इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जोड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
निष्कर्ष
पटना में महागठबंधन का प्रदर्शन अब केवल एक दिन के विरोध तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। SIR, मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। तेजस्वी यादव का बैरिकेड पर चढ़ना इस प्रदर्शन की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गया। अब देखना होगा कि विपक्ष के लगातार आंदोलन के बाद चुनाव आयोग और केंद्र की ओर से इस राजनीतिक विवाद पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

