बॉलीवुड: और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद अब उनकी आखिरी विदाई की तैयारियां तेज हो गई हैं। 75 वर्षीय अभिनेता का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा में निधन हुआ। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत से लेकर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र तक शोक की लहर दौड़ गई। महाराष्ट्र सरकार ने उनके सिनेमा और रंगमंच में योगदान को देखते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया है।
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के डोनजे स्थित उनके फार्महाउस पर किया जाना है। अंतिम यात्रा को लेकर पुणे प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की विशेष तैयारी शुरू कर दी है। बड़ी संख्या में आम लोग, प्रशंसक, फिल्मी हस्तियां और वीआईपी मेहमान उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।
पुणे में बढ़ाई गई सुरक्षा, VIP मूवमेंट पर नजर
नाना पाटेकर की अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में वीआईपी लोगों के पहुंचने की संभावना है। राजनीतिक नेताओं और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े प्रमुख चेहरों के आने की उम्मीद के कारण पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, वीआईपी वाहनों के लिए अलग रूट और ट्रैफिक प्रबंधन की तैयारी की जा रही है। पुलिस प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात कर सकती है ताकि अंतिम यात्रा के दौरान भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सामान्य यातायात पूरी तरह बाधित न हो।
डोनजे और खडकवासला के आसपास के इलाकों में भी प्रशासन की नजर रहेगी। फार्महाउस के आसपास प्रशंसकों की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रवेश और निकासी व्यवस्था को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
सिंहगढ़ रोड पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की आशंका
नाना पाटेकर की अंतिम यात्रा के कारण सिंहगढ़ रोड और उससे जुड़े रास्तों पर अतिरिक्त ट्रैफिक दबाव पड़ सकता है। खासकर शाम के समय सामान्य पीक-ऑवर ट्रैफिक के साथ वीआईपी काफिलों और अंतिम दर्शन के लिए आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने से स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
ट्रैफिक पुलिस संभावित जाम वाले स्थानों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और जरूरत पड़ने पर डायवर्जन की तैयारी कर रही है। प्रशासन की कोशिश है कि अंतिम यात्रा भी शांतिपूर्वक संपन्न हो और आम यात्रियों को भी कम से कम परेशानी हो।
इसलिए सिंहगढ़ रोड से डोनजे या खडकवासला की तरफ जाने वाले लोगों को शाम के समय अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि, अंतिम समय पर लागू होने वाले डायवर्जन और प्रतिबंध स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर निर्भर करेंगे।

कब पहुंचेगा नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर?
नाना पाटेकर का निधन गोवा में हुआ था। उनके निधन के बाद जरूरी चिकित्सकीय और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को पुणे लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, पार्थिव शरीर के पुणे पहुंचने के बाद उसे डोनजे स्थित फार्महाउस ले जाया जाएगा। वहां प्रशंसकों और करीबी लोगों को अंतिम दर्शन का अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है।
अंतिम संस्कार के समय को लेकर दिन में अलग-अलग अपडेट सामने आए हैं। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में शाम के समय अंतिम संस्कार की बात कही गई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में रात करीब 9 से 10 बजे के बीच अंतिम संस्कार की संभावना बताई गई। इसलिए अंतिम समय को लेकर प्रशासन और परिवार की आधिकारिक सूचना को ही अंतिम माना जाना चाहिए।
राजकीय सम्मान के साथ होगी आखिरी विदाई
महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर को पूर्ण राजकीय सम्मान देने का फैसला किया है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मराठी रंगमंच, मराठी सिनेमा और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है।
नाना पाटेकर केवल अभिनेता नहीं थे, बल्कि थिएटर से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। यही कारण है कि उनकी अंतिम विदाई को लेकर राज्य सरकार ने विशेष सम्मान देने का निर्णय लिया।
आम लोगों के लिए भी अंतिम दर्शन की व्यवस्था
नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद उनके प्रशंसकों में भारी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पुणे पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।
उनके फार्महाउस पर आम लोगों के लिए अंतिम दर्शन की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करना होगी।
पुलिस और प्रशासन की कोशिश रहेगी कि प्रशंसक श्रद्धांजलि दे सकें, लेकिन फार्महाउस के आसपास अत्यधिक भीड़ जमा न हो। वीआईपी और आम लोगों की आवाजाही को अलग-अलग तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है।
नाना पाटेकर की विरासत को मिलेगी आखिरी सलामी
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म Gaman से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद Parinda, Prahaar, Krantiveer, Tiranga, Khamoshi और Ab Tak Chhappan जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और गंभीर किरदारों को निभाने का अंदाज दर्शकों के बीच खास तौर पर लोकप्रिय रहा।
उनकी आखिरी विदाई में उमड़ने वाली भीड़ इस बात का संकेत होगी कि पर्दे पर निभाए गए किरदारों से आगे बढ़कर नाना पाटेकर ने दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी जगह बनाई थी।

