नई दिल्ली: रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। फिल्म की कहानी, भव्यता और कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर आए दिन नई चर्चाएं सामने आती रहती हैं। इसी बीच अभिनेता अजिंक्य देव ने अपनी कास्टिंग से जुड़ा एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि फिल्म में ऋषि विश्वामित्र की भूमिका निभाने से पहले उन्होंने राजा दशरथ के किरदार के लिए ऑडिशन दिया था।
हालांकि, बाद में राजा दशरथ की भूमिका अनुभवी अभिनेता अरुण गोविल को मिली। वहीं, अजिंक्य देव को ऋषि विश्वामित्र का महत्वपूर्ण किरदार ऑफर किया गया। इस खुलासे ने फिल्म की कास्टिंग को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है। सवाल यह है कि आखिर अजिंक्य देव को दशरथ की जगह विश्वामित्र का किरदार कैसे मिला और अभिनेता इस बदलाव को किस नजरिए से देखते हैं?
तीन साल पहले दिया था राजा दशरथ के किरदार के लिए ऑडिशन
अजिंक्य देव ने एक बातचीत में बताया कि जब फिल्म के निर्माताओं ने उनसे संपर्क किया था, तब उन्हें राजा दशरथ की भूमिका के लिए ऑडिशन देने को कहा गया था। यह प्रक्रिया करीब तीन साल पहले शुरू हुई थी। उस समय फिल्म की कास्टिंग और कई अन्य पहलुओं पर काम चल रहा था।
अभिनेता के मुताबिक, उन्होंने दशरथ के किरदार के लिए ऑडिशन दिया और इसके बाद आगे की प्रक्रिया का इंतजार किया। समय के साथ फिल्म की कास्टिंग में बदलाव हुआ और राजा दशरथ की भूमिका अरुण गोविल को मिल गई।
अजिंक्य देव ने इस बदलाव को सकारात्मक रूप से लिया। उन्होंने अरुण गोविल की तारीफ करते हुए कहा कि वह इस भूमिका के लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं। उनके मुताबिक, अरुण गोविल का इस किरदार से जुड़ना फिल्म के लिए अच्छी बात है।

अरुण गोविल को क्यों खास मान रहे हैं अजिंक्य देव?
अरुण गोविल की पहचान भारतीय टेलीविजन के इतिहास में बेहद खास रही है। वर्ष 1987 में प्रसारित रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाकर उन्होंने घर-घर में लोकप्रियता हासिल की थी। आज भी बड़ी संख्या में दर्शक उन्हें इसी किरदार के लिए याद करते हैं।
अब नितेश तिवारी की बड़े पर्दे वाली ‘रामायण’ में अरुण गोविल भगवान राम के पिता राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। यह बदलाव इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि जिस अभिनेता को दर्शकों ने वर्षों तक राम के रूप में देखा, वह अब उसी महागाथा में राम के पिता के किरदार में नजर आएंगे।
अजिंक्य देव ने भी माना कि दशरथ की भूमिका के लिए अरुण गोविल का चयन उपयुक्त है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अभिनेता ने भूमिका बदलने को किसी प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे फिल्म की कास्टिंग का स्वाभाविक हिस्सा माना।
विश्वामित्र का किरदार मिलते ही क्यों खुश हुए अजिंक्य देव?
राजा दशरथ के लिए ऑडिशन देने के बाद अजिंक्य देव को जब ऋषि विश्वामित्र की भूमिका ऑफर की गई, तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। अभिनेता के अनुसार, वह इस किरदार के महत्व को समझते हैं और उन्हें लगा कि यह भूमिका उनके व्यक्तित्व के अनुकूल है।
रामायण की कथा में ऋषि विश्वामित्र का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। वही राजा दशरथ से भगवान राम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए साथ भेजने का आग्रह करते हैं। इसके बाद राम और लक्ष्मण का ऋषि के साथ वन में जाना उनकी जीवन यात्रा का अहम हिस्सा बनता है।
विश्वामित्र भगवान राम को कई महत्वपूर्ण अस्त्रों और दिव्य विद्याओं का ज्ञान देते हैं। आगे चलकर यही यात्रा राम और लक्ष्मण को मिथिला तक पहुंचाती है, जहां सीता स्वयंवर की कथा सामने आती है।
इस लिहाज से विश्वामित्र केवल एक ऋषि का किरदार नहीं, बल्कि राम की शुरुआती यात्रा को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण पात्र हैं। अजिंक्य देव के लिए इस भूमिका को निभाना फिल्म की पौराणिक कथा से गहराई से जुड़ने का अवसर है।
फिल्म की शूटिंग में तकनीक का अनुभव रहा अलग
अजिंक्य देव ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ा अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक और विशेष प्रभावों के साथ काम करना उनके लिए एक नया अनुभव था।
उनके मुताबिक, शूटिंग के दौरान कई जगहों पर विशेष निशान लगाए जाते थे और कलाकारों को तय स्थान पर रुकना पड़ता था। ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि बाद में दृश्य तैयार करते समय डिजिटल प्रभावों और अन्य तकनीकी तत्वों को सही तरीके से जोड़ा जा सके।
अभिनेता ने बताया कि एक प्रक्रिया के दौरान उनके पूरे शरीर को लगभग 150 कैमरों की मदद से स्कैन किया गया। इससे उनका डिजिटल रूप तैयार करने और फिल्म के तकनीकी दृश्यों में इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।
उन्होंने इस अनुभव को सीखने का अच्छा अवसर बताया। बड़े बजट की पौराणिक फिल्म में अभिनय के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को समझना उनके लिए अलग तरह की चुनौती रही।
रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी भी निभा रहे अहम भूमिकाएं
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। साई पल्लवी माता सीता के किरदार में हैं, जबकि यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान का किरदार निभा रहे हैं।
फिल्म में अरुण गोविल का राजा दशरथ बनना भी चर्चा का प्रमुख विषय है। उनके पुराने राम वाले किरदार और नई भूमिका के बीच दर्शक एक खास भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।
निर्माता नमित मल्होत्रा इस परियोजना को बड़े स्तर पर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को दो भागों में पेश करने की योजना है। ऐसे में कलाकारों की भूमिकाओं और निर्माण में इस्तेमाल की जा रही तकनीक को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है।
अब विश्वामित्र के रूप में नजर आएंगे अजिंक्य देव
अजिंक्य देव का राजा दशरथ के लिए ऑडिशन देना और बाद में विश्वामित्र की भूमिका मिलना फिल्म की कास्टिंग से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू है। अभिनेता ने इस बदलाव को सहजता से स्वीकार किया और अरुण गोविल के चयन की तारीफ भी की।
अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बड़े पर्दे पर अजिंक्य देव ऋषि विश्वामित्र के किरदार को किस अंदाज में पेश करते हैं। रामायण की कथा में इस पात्र की अहमियत को देखते हुए उनकी भूमिका फिल्म के शुरुआती घटनाक्रम में महत्वपूर्ण हो सकती है।

