मुंबई: बॉलीवुड में कई ऐसी जोड़ियां रही हैं, जिनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री के साथ-साथ ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग को लेकर भी लंबे समय तक चर्चाएं होती रही हैं। नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला का नाम भी ऐसी ही चर्चित जोड़ियों में लिया जाता रहा है। 90 के दशक में दोनों की नजदीकियों को लेकर कई तरह की बातें सामने आती थीं। हालांकि, इन चर्चाओं को लेकर दोनों के बीच किसी रोमांटिक रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई।
अब फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ के लेखक रणबीर पुष्प ने उस दौर को याद करते हुए नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते पर अपना अनुभव साझा किया है। उनके बयान ने एक बार फिर उस दौर की पुरानी चर्चाओं को चर्चा में ला दिया है।
नाना और मनीषा के बीच कैसी थी बॉन्डिंग?
रणबीर पुष्प के मुताबिक, नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच अच्छी दोस्ती और मजबूत आपसी समझ थी। दोनों कलाकार साथ काम करते समय अपने दृश्यों पर चर्चा करते थे और एक-दूसरे के साथ सहज नजर आते थे।
लेखक ने बातचीत के दौरान यह जरूर माना कि दोनों काफी करीब थे, लेकिन उन्होंने इस नजदीकी को अपनी नजर से कभी प्रेम संबंध के तौर पर नहीं देखा।
उनके मुताबिक, दोनों के बीच जिस तरह की समझ थी, उसका असर उनके काम और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली केमिस्ट्री में भी नजर आता था।
क्या दोनों के बीच प्यार था?
यही वह सवाल है जिसने नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला को लेकर वर्षों से चली आ रही चर्चाओं को जन्म दिया। रणबीर पुष्प से जब दोनों के रिश्ते को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वे दोनों करीब थे, लेकिन इसे रोमांस कहना है या दोस्ती, यह निश्चित तौर पर कहना उनके लिए संभव नहीं है।
हालांकि, जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या उन्होंने दोनों के बीच दोस्ती से आगे बढ़ती हुई कोई रोमांटिक केमिस्ट्री महसूस की थी, तो उनका जवाब इससे अलग था।
रणबीर पुष्प ने स्पष्ट किया कि उन्होंने दोनों के रिश्ते को कभी उस नजरिए से नहीं देखा। उनके लिए यह दोस्ती और आपसी समझ का रिश्ता था। बाद में जब अखबारों और चर्चाओं के जरिए उन्होंने ऐसी बातें सुनीं, तब उन्हें इस तरह की अफवाहों के बारे में पता चला।

सेट पर दोनों की समझ थी खास
रणबीर पुष्प ने बताया कि दोनों कलाकार अपने सीन को लेकर बातचीत करते थे। किसी दृश्य को किस तरह प्रस्तुत करना है, इसे लेकर उनके बीच अच्छी समझ थी। यही वजह थी कि दोनों की साथ में की गई परफॉर्मेंस प्रभावशाली दिखाई देती थी।
लेखक के अनुसार, नाना और मनीषा की यह बॉन्डिंग काम के दौरान साफ दिखाई देती थी। लेकिन उन्होंने इसे निजी रिश्ते की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिल्मी दुनिया में कलाकारों की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री और ऑफस्क्रीन रिश्तों को लेकर अक्सर अटकलें लगाई जाती रही हैं।
‘अग्नि साक्षी’ से फिर चर्चा में आया पुराना किस्सा
नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला ने 1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ में साथ काम किया था। फिल्म का निर्देशन पार्थो घोष ने किया था और इसमें जैकी श्रॉफ भी प्रमुख भूमिका में थे। यह एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म थी।
फिल्म में नाना और मनीषा की भूमिकाओं तथा उनके बीच दिखाई गई केमिस्ट्री ने दर्शकों का ध्यान खींचा था। इसी दौर में दोनों के बीच कथित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं भी तेज हुई थीं।
रणबीर पुष्प ने कहा- मेरा ध्यान काम पर रहता था
रणबीर पुष्प ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म के सेट पर उनका मुख्य ध्यान अपने काम पर रहता था। वह कलाकारों की निजी जिंदगी या उनके आपसी समीकरणों पर विशेष नजर नहीं रखते थे।
उनके अनुसार, उनका काम पूरा होता था और वह शूटिंग देखने के बाद लौट जाते थे। इसलिए सेट पर नाना और मनीषा के बीच निजी तौर पर क्या चल रहा था, इसे लेकर वह किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की स्थिति में नहीं थे।
यही वजह है कि उनका बयान इस पूरे मामले में किसी रिश्ते की पुष्टि करने के बजाय उनके अपने अनुभव तक सीमित दिखाई देता है।
अफवाह और सच के बीच अंतर समझना जरूरी
नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के कथित रिश्ते की चर्चा कई दशक पुरानी है। समय-समय पर दोनों के नाम साथ जोड़े जाते रहे, लेकिन रणबीर पुष्प के बयान से भी किसी रोमांटिक रिश्ते की पुष्टि नहीं होती।
उनका कहना मूल रूप से इतना है कि दोनों कलाकारों के बीच नजदीकी, दोस्ती और अच्छी समझ जरूर थी। दोनों अपने काम को लेकर एक-दूसरे के साथ सहज थे और उनकी यह बॉन्डिंग स्क्रीन पर भी दिखाई देती थी।
ऐसे में इस पुराने किस्से को लेकर सबसे अहम बात यही है कि चर्चाओं और प्रमाणित तथ्य में अंतर रखा जाए। लेखक ने जो बताया, वह उनके साथ काम करने के दौरान देखे गए अनुभव पर आधारित है, न कि किसी कथित प्रेम संबंध की पुष्टि।
निष्कर्ष
नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला की नजदीकियों की चर्चा भले ही 90 के दशक से चली आ रही हो, लेकिन ‘अग्नि साक्षी’ के लेखक रणबीर पुष्प ने दोनों के बीच मजबूत दोस्ती और आपसी समझ की बात कही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने कभी उनकी बॉन्डिंग को रोमांटिक नजरिए से नहीं देखा।
इस बयान के बाद पुरानी चर्चाओं को एक बार फिर हवा जरूर मिली है, लेकिन इसे नाना और मनीषा के प्रेम संबंध की पुष्टि नहीं माना जा सकता। असल में लेखक का बयान दोनों कलाकारों की प्रोफेशनल बॉन्डिंग और दोस्ती पर ज्यादा रोशनी डालता है।

