भारत: में जनगणना की प्रक्रिया एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है। Census 2027 का पहला चरण आज यानी 1 अप्रैल से शुरू हो गया है। यह जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इस बार नागरिकों को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ यानी खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे यह प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और आसान बनने की उम्मीद है।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
इस बार जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में ‘भवन सूचीकरण और आवास जनगणना’ शामिल है, जो अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और घरेलू संसाधनों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।
दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित होगा, जिसमें जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी जैसे सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, प्रवासन, प्रजनन दर और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। इस चरण में जातिगत डेटा भी शामिल किया जाएगा, जो भविष्य की नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
डिजिटल जनगणना से क्या बदलेगा?
इस बार कागज के फॉर्म पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं। गणनाकर्ता अब स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे। इसके अलावा नागरिकों को भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए करीब 11,718 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। मोबाइल ऐप और पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग आसानी से इसमें भाग ले सकें।
सेल्फ-एन्यूमरेशन क्या है और कैसे काम करेगा?
सेल्फ-एन्यूमरेशन इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत है। इसके तहत नागरिक खुद अपने घर, परिवार और व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। यह सुविधा हर चरण से पहले 15 दिनों तक उपलब्ध रहेगी।
इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी, क्योंकि लोग खुद अपनी जानकारी दर्ज करेंगे।
राज्यों के अनुसार अलग-अलग तारीखें
जनगणना के पहले चरण की तारीखें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार अलग-अलग तय की गई हैं। जैसे Delhi, Karnataka, Goa, Odisha और Sikkim में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी। वहीं अन्य राज्यों में यह अलग-अलग समय पर आयोजित की जाएगी।
संदर्भ तिथि में भी बदलाव
जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है। हालांकि, पहाड़ी और बर्फीले क्षेत्रों जैसे Uttarakhand और Himachal Pradesh के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?
जनगणना किसी भी देश की योजना और विकास का आधार होती है। इसके आंकड़ों के आधार पर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं बनाती है। डिजिटल माध्यम से यह प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक विश्वसनीय होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल जनगणना भविष्य में नीति निर्माण और संसाधनों के बेहतर वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निष्कर्ष:
Census 2027 भारत के इतिहास की सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत जनगणना साबित होने जा रही है। डिजिटल प्रक्रिया और सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा इसे न केवल आसान बनाएगी, बल्कि डेटा की गुणवत्ता भी बेहतर करेगी। आने वाले समय में इसके परिणाम देश की विकास नीतियों को नई दिशा देंगे।

