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Reading: “हम विश्वगुरु नहीं हैं…”: Murli Manohar Joshi के बयान से सियासी हलचल, संस्कृत को लेकर बड़ा संदेश
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Home - दिल्ली - “हम विश्वगुरु नहीं हैं…”: Murli Manohar Joshi के बयान से सियासी हलचल, संस्कृत को लेकर बड़ा संदेश

“हम विश्वगुरु नहीं हैं…”: Murli Manohar Joshi के बयान से सियासी हलचल, संस्कृत को लेकर बड़ा संदेश

Rajat Kumar
Last updated: 2026/04/20 at 9:13 AM
Rajat Kumar
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5 Min Read
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भारतीय राजनीति: और वैचारिक विमर्श में एक बार फिर “विश्वगुरु” शब्द को लेकर बहस तेज हो गई है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष Murli Manohar Joshi के हालिया बयान ने इस चर्चा को नई दिशा दे दी है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि भारत को खुद को “विश्वगुरु” कहना उचित नहीं है।

Contents
संस्कृत को बताया भविष्य की भाषाओपनहाइमर और गीता का संदर्भयुवाओं को दिया खास संदेशसंस्कृत को अनिवार्य बनाने पर क्या बोले?वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिकानिष्कर्ष:

दरअसल, यह बयान Sanskrit Bharati के कार्यालय उद्घाटन समारोह में दिया गया, जहां उनसे सवाल पूछा गया कि क्या भारत आज ‘विश्वगुरु’ बन चुका है। इस पर जोशी ने जवाब देते हुए कहा, “मेरा मानना है कि ‘विश्वगुरु’ शब्द हमें नहीं बोलना चाहिए। हम विश्वगुरु नहीं हैं। हम कभी थे, और हमें फिर से बनना चाहिए।”

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत की वैश्विक भूमिका, तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को देखते हुए ‘विश्वगुरु’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर किया जाता है। लेकिन जोशी ने इस पर संयम बरतने की सलाह दी।

संस्कृत को बताया भविष्य की भाषा

अपने संबोधन में जोशी ने संस्कृत भाषा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और विज्ञान का विशाल भंडार है। उनके मुताबिक, “अगर भारत संस्कृत को विश्व संप्रेषण की भाषा बना सके, तो यह देश की सबसे बड़ी देन होगी।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संस्कृत की उपयोगिता को स्वीकार किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने NASA का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के वैज्ञानिक भी संस्कृत की संरचना और सटीकता को सराहते हैं।

ओपनहाइमर और गीता का संदर्भ

जोशी ने अपने भाषण में परमाणु बम के जनक माने जाने वाले वैज्ञानिक J. Robert Oppenheimer का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि जब ओपनहाइमर ने परमाणु परीक्षण देखा, तो उनके मुंह से Bhagavad Gita का श्लोक निकला, जिसमें भगवान कृष्ण के विराट रूप का वर्णन है।

यह उदाहरण देते हुए उन्होंने संस्कृत और भारतीय ग्रंथों की वैश्विक स्वीकार्यता और प्रभाव को रेखांकित किया। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि भारतीय ज्ञान परंपरा कितनी गहरी और प्रभावशाली रही है।

युवाओं को दिया खास संदेश

जोशी ने देश के युवाओं को संस्कृत सीखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग को न केवल संस्कृत पढ़नी चाहिए, बल्कि उसमें लिखना और बोलना भी सीखना चाहिए। उनका मानना है कि इससे भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती मिलेगी और ज्ञान का संरक्षण भी होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई विद्वानों और वैज्ञानिकों ने संस्कृत के महत्व को स्वीकार किया है, इसलिए भारत के लोगों को भी इसे अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए।

संस्कृत को अनिवार्य बनाने पर क्या बोले?

संस्कृत को शिक्षा प्रणाली में अनिवार्य बनाने के सवाल पर जोशी ने बताया कि उन्होंने पहले भी इस दिशा में सुझाव दिया था, लेकिन सभी राज्यों ने इसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि Uttarakhand ने संस्कृत को राजकीय भाषा का दर्जा दिया है, लेकिन वहां भी इसके प्रचार-प्रसार में अपेक्षित काम नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी माना कि आज के दौर में अंग्रेजी भाषा का प्रभाव अधिक है, क्योंकि व्यापार, शिक्षा और तकनीक का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी में संचालित होता है। इसे उन्होंने एक “विडंबना” बताया और कहा कि इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका

जोशी का यह बयान केवल भाषा या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और आत्ममूल्यांकन से भी जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि भारत को पहले अपने ज्ञान और मूल्यों को मजबूत करना चाहिए, तभी वह वास्तव में “विश्वगुरु” बन सकता है।


निष्कर्ष:

Murli Manohar Joshi का बयान एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि केवल दावे करने से कोई देश “विश्वगुरु” नहीं बनता। इसके लिए ठोस ज्ञान, संस्कृति और वैश्विक योगदान जरूरी है। संस्कृत को बढ़ावा देने और भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने की उनकी अपील इस दिशा में एक संकेत मानी जा सकती है।

TAGGED: BJP News, Education Policy, India World Guru Debate, Indian Culture, Murli Manohar Joshi, Political Statement, Sanskrit Language
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